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Sant Ki Seekh: जीवन के कठिन समय में भगवान आपका साथ कब देते हैं?

Ishwar Ka Sath: कठिन समय आने पर भगवान किसका साथ साथ देते हैं? कर्म पर या फिर भाग्य पर विश्वास करने वाले की? आखिर किस पर बरसती है ईश्वरीय कृपा? दैवीय कृपा के सही मायने जानने के लिए पढ़ें महामंडलेश्वर आचार्य स्वामी भास्करानंद की बड़ी सीख. 

Sant Ki Seekh:  जीवन के कठिन समय में भगवान आपका साथ कब देते हैं?
Whom does God help: ईश्वर का साथ किसे मिलता है?
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Bhagwan Kiska Sath Dete Hai: एक बार किसी ने मुझसे कहा कि अगर कोई  एक दिन किसी ने मुझसे कहा कि कोई अपना तुम्हे छोड़कर चला जाए तो तुम क्या करोगे. तब मैंने उससे कहा कि - अपने कभी छोड़कर जाते नहीं और जो छोड़कर चला जाता है वह कभी अपना होता नहीं है. ऐसे में सवाल उठता है कि आपको कौन कभी भी छोड़कर नहीं जाता है. इसका जवाब है परमात्मा यानि ईश्वर. आम जीवन में यदि देखें तो आपका बेटा कितना प्रिय क्यों ना हो, पुत्री कितनी प्रिय क्यों ना हो, पति कितना प्रिय क्यों न हो, पत्नी कितनी भी प्रिय क्यों न हो लेकिन 24 घंटे में एक ऐसा समय जरूर आता है जब वह आपको या फिर आप उन्हें छोड़कर चले जाते हैं. जब आप सो जाते हैं तो नींद में सभी छूट जाते हैं फिर कोई कितना ही क्यों प्रिय न हो, लेकिन उस समय भी अगर कोई आपके साथ होता है तो वह परमात्मा है.

जीवन में भगवद् चिंतन का महत्व

जीवन में जितने भी लोग हैं सभी किसी न किसी स्वार्थ से जुड़े हुए हैं, और जब लोगों का मतलब पूरा हो जाता है तो कोई किसी का होता नहीं है. नानक जी ने कहा था कि नाम न जपिया राम का मूड़े फिर पाछे पछिताय. कहने का तात्पर्य यह है कि भगवान राम का ही नाम जपो क्योंकि अंत में राम ही तुम्हारे कठिन समय में काम आने वाले हैं. यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो बाद में आपको पछताना पड़ेगा. अभी सब तुम्हारे हैं लेकिन एक समय ऐसा आएगा जब कोई नहीं होगा, तब उस संकट के समय में सिर्फ और सिर्फ भगवान तुम्हारे साथ होंगे. इसलिए आज से ही भगवद् चिंतन प्रारंभ कर दीजिए. 

तब भगवान ने दिलाई गजराज को मुक्ति

गजेंद्र मोक्ष की कथा में वर्णन आता है कि जब संकट के समय में कोई काम नहीं आया तो हाथी ने भगवान का स्मरण किया. आम तौर पर मनुष्य तो भगवान का नाम लेता नहीं है, लेकिन उस हाथी ने नारायण का ध्यान किया. इसके पीछे भी एक कारण है. पूर्व जन्म में मिली शिक्षा उसकी वजह बनी है. मान्यता है कि वह हाथी पूर्व जन्म में एक राजा था, जिसे गुरु के गुस्से के कारण गज रूप में जन्म लेना पड़ा लेकिन उसी गुरु के आशीर्वाद से भगवान का नाम लेने पर उसके उद्धार का वरदान भी मिला. जब गज ने संकट के समय में भगवान का स्मरण किया तो प्रभु उसे उससे मुक्ति दिलाने में सहायक बने. गुरु नानक जी ने कहा है कि संग सखा सब तजि गये, कोई न निभयो साथ, कह नानक इस विपत्ति में एक टेक रघुनाथ. परमात्मा आपकी पग-पग में रक्षा करता है. 

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प्रतिदिन करें भगवान का ध्यान

जब कभी भी चीजें बदलती हैं तो मनुष्य भी बदल जाते हैं. स्थान बदलता है तो मित्र बदल जाते हैं. भविष्य बदला जाता है तो व्यवस्थाएं बदल जाती हैं, लेकिन इन सभी के बीच परमात्मा कभी नहीं बदलता है, इसलिए आज से ही हम परमात्मा को अपना सच्चा साथी मान लें क्योंकि सच्चे मन से सुमिरन करने पर वही परमात्मा हमें बचाने के लिए आता है. बिल्कुल वैसे ही जैसे उस हाथी ने भगवान को पुकारा तो भगवान उसे बचाने के लिए दौड़े चले आये. मान्यता है कि गजेंद्र मोक्ष की यह कथा या फिर कहें इसके मंत्रों का पाठ सूर्योदय के पहले और रात्रि में सोने के पहले करने वाले व्यक्ति के जीवन में कभी दुख नहीं आता है और अगर आ भी जाए तो भगवान की कृपा से व्यक्ति को उस दुख या कष्ट से शीघ्र ही मुक्ति मिल जाती है.

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