हिन्दू पंचांग के अनुसार हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस तिथि को अक्षय तृतीया की तरह ही माना जाता है. साथ ही इस दिन अबुझ मुहूर्त होता है, जो शादी विवाह और अन्य मांगलिक कार्य के लिए बेहद शुभ होता है. इसी कड़ी में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस साल भड़ली नवमी कब है और इसका धार्मिक महत्व क्या होता है...
कब है भड़ली नवमी?
हिन्दू पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत 22 जुलाई को सुबह में 5 बजकर 16 मिनट पर होगा. वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 23 जुलाई को सुबह 7 बजकर 3 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए भड़ली नवमी का व्रत 22 जुलाई को रखा जाएगा.
भड़ली नवमी का महत्व
भड़ली नवमी पर अबूझ मुहूर्त होता है. इस दिन मांगलिक कार्यों को करने के लिए ग्रह नक्षत्रों का प्रभाव बेहद अनुकूल माना जाता है. इस दिन कई लोग नए कार्यों की शुरुआत करते हैं. मान्यता है कि इस दिन नए कार्य शुरू करने से शुभ परिणाम मिलते हैं. साथ ही इसके बाद देवशयनी एकादशी पड़ती है जिसके बाद चातुर्मास की शुरुआत होती है. चातुर्मास से कोई भी शुभ कार्य नहीं होते हैं. ऐसे में भड़ली नवमी तिथि पर कई शुभ कार्य किए जाते हैं.
इस साल मान्य नहीं होगा अबूझ मुहूर्त
ध्यान देने वाली बात है कि इस साल भड़ली नवमी पर अबूझ मुहूर्त होने के बाद भी कोई मांगलिक कार्य नहीं किए जाएंगे. दरअसल, देव गुरु बृहस्पति अस्त स्थिति में हैं और देव गुरु के अस्त होने पर कोई मांगलिक कार्य नहीं किया जा सकता है. इसी कारण भड़ली नवमी पर इस साल कोई भी शुभ और मांगलिक कार्य नहीं किए जा सकेंगे.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
यह भी पढ़ें: 'अडापा बिजे' रस्म हुई संपन्न, गुंडिचा मंदिर में विराजमान हुए महाप्रभु जगन्नाथ, 9 दिनों तक देंगे भक्तों को दर्शन
यह भी पढ़ें: कांवड़ ले जाते समय 'बम भोले' क्यों बोलते हैं कांवड़िए? पंडित जी से जानिए 'बोल बम' जयकारे का अर्थ
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं