- चीन की एक सरकारी विमानन निगरानी संस्था से जारी यह तस्वीर तेजी से दुनिया भर में वायरल हो गई.
- चीन की एयरफोर्स के पास अब करीब 500 चेंगदू J-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान मौजूद हैं.
- चीन 2030 तक लगभग 800 J-20 और 2035 तक करीब 1,500 J-20 तैयार करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है.
हाल ही में चीन के शेनयांग J-16 मल्टीरोल फाइटर जेट की कुछ तस्वीरें सामने आई हैं. फाइटर जेट बड़ी संख्या में एयर-टू-एयर मिसाइलों से लैस दिखाई दिया. इसे बीस्ट मोड कहा जा रहा है. इन तस्वीरों ने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों और सैन्य एक्सपर्ट्स का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. अब हर कोई यह समझने की कोशिश कर रहा है कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी एयर फोर्स लंबी दूरी तक हवाई बढ़त बनाने और लगातार कॉम्बैट एयर पेट्रोलिंग करने की कितनी क्षमता हासिल कर चुकी है.
यह तस्वीर चीन की एक सरकारी विमानन निगरानी संस्था ने जारी की थी, जिसके बाद यह तेजी से दुनिया भर में वायरल हो गई. तस्वीर में J-16 लड़ाकू विमान पर आठ PL-15 लंबी दूरी की विजुअल रेंज से बाहर की मिसाइलें और दो PL-10 छोटी दूरी की डॉगफाइट मिसाइलें लगी हुई दिखाई दे रही हैं.
अब सवाल यह है कि क्या यह केवल डराने के लिए किया गया प्रचार है, या फिर चीन वास्तव में इतनी बड़ी सैन्य क्षमता हासिल कर चुका है?
इसी बीच चीन की सैन्य विमानन गतिविधियों पर नजर रखने वाले डीनों के नाम से एक्सपर्ट एंड्रियास रूपप्रेख्ट का आकलन है कि चीन की एयरफोर्स के पास अब करीब 500 चेंगदू J-20 पांचवीं पीढ़ी के स्टील्थ लड़ाकू विमान मौजूद हैं.
इससे पहले कई रिपोर्ट्स में कहा गया था कि चीन 2030 तक लगभग 800 J-20 और 2035 तक करीब 1,500 J-20 तैयार करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है. दिलचस्प बात यह है कि लगभग इसी समय भारत की पांचवीं पीढ़ी का स्वदेशी लड़ाकू विमान AMCA भी एयरफोर्स में शामिल होना शुरू होगा.
उधर, चीन अपने पांचवीं पीढ़ी के दूसरे स्टील्थ फाइटर शेनयांग J-35 का उत्पादन भी तेजी से बढ़ा रहा है. इसकी उत्पादन क्षमता लगभग दोगुनी की जा रही है. पाकिस्तान इस विमान को खरीदने वाला पहला विदेशी देश बनने की तैयारी में है.

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तकनीकी क्षेत्रों में अमेरिका से आगे चीन
चीन सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, बल्कि कई दूसरी अहम तकनीकों में भी तेजी से आगे निकलता दिखाई दे रहा है. ऑस्ट्रेलियन स्ट्रैटेजिक पॉलिसी इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट के अनुसार, दुनिया की 74 महत्वपूर्ण और उभरती हुई तकनीकों में से 66 क्षेत्रों में चीन बढ़त बनाए हुए है. इनमें रक्षा तकनीक, अंतरिक्ष, रोबोटिक्स, ऊर्जा, पर्यावरण, बायोटेक्नोलॉजी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी करीब 90 फीसद रणनीतिक क्षेत्र शामिल हैं. इसके मुकाबले अमेरिका केवल आठ तकनीकी क्षेत्रों में आगे माना गया है.
ऐसे में यह समझना जरूरी हो जाता है कि चीन के ये नए लड़ाकू विमान आखिर कितने ताकतवर हैं और उसकी एंटी एक्सेस/एरिया डिनायल यानी A2/AD रणनीति कैसे काम करती है.

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शेनयांग J-16 क्या है?
शेनयांग J-16, को हिडन ड्रैगन भी कहा जाता है. यह किसी भी मौसम में उड़ान भरने की क्षमता से लैस 4.5 पीढ़ी के ट्विन इंजन और दो सीटों वाला मल्टीरोल स्ट्राइक फाइटर है.
इसे शेनयांग J-11 के आधार पर विकसित किया गया है. J-11 खुद रूस के मशहूर सुखोई Su-27 लड़ाकू विमान का लाइसेंस प्राप्त चीनी संस्करण है.
1990 के दशक में चीन ने रूस से Su-27 और Su-30MKK जैसे एयर सुपीरियरिटी फाइटर खरीदे थे. बाद में इन्हीं विमानों का लाइसेंस लेकर चीन ने अपने यहां J-11A बनाना शुरू किया. J-16 उसी परिवार का और अत्याधुनिक अपग्रेडेड रूप है, इसे खास कर स्ट्राइक मिशनों पर भेजने के लिए तैयार किया गया है.
J-16 में आधुनिक AESA यानी एक्टिव इलेक्ट्रॉनिकली स्कैन्ड ऐरे रडार लगाया गया है, जो एक साथ कई लक्ष्यों पर नजर रख सकता है और उन्हें ट्रैक कर सकता है. इस विमान में चीन के स्वदेशी WS-10B इंजन लगे हैं. आफ्टरबर्नर के साथ ये इंजन करीब 135 किलोन्यूटनतक का थ्रस्ट पैदा करते हैं.
विमान का वजन कम रखने के लिए इसमें बड़ी मात्रा में कंपोजिट मैटेरियल का इस्तेमाल किया गया है.
J-16 पर ऐसी खास पेंट लगाई गई है जिससे इसकी रडार पर दिखाई देने की संभावना कम हो जाती है. साथ ही इसमें इलेक्ट्रॉनिक सपोर्ट सिस्टम भी लगाए गए हैं, जिससे यह दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को दबाने के मिशन को बेहतर तरीके से अंजाम दे सकता है.
J-16 में लंबी दूरी की आधुनिक मिसाइलें, नए सेंसर और अत्याधुनिक एवियोनिक्स लगाए गए हैं. यह इस बात का संकेत है कि चीन अब लड़ाकू विमान तकनीक के लिए रूस पर पहले जितना निर्भर नहीं रहा. इसके अलावा J-20 स्टील्थ फाइटर में इस्तेमाल की गई कुछ तकनीकों को भी J-16 में शामिल किया गया है.
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अब तक चीन 450 से ज्यादा J-16 लड़ाकू विमान बना चुका है.
J-16 में कुल 12 बाहरी हार्डपॉइंट हैं, जिन पर करीब 8000 किलोग्राम तक हथियार लगाए जा सकते हैं.
यह विमान कई तरह के हथियार ले जा सकता है, जिनमें एयर-टू-एयर मिसाइलें, एंटी शिप मिसाइलें, गाइडेड बम, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर पॉड्स शामिल हैं.
जब J-16 को बीस्ट मोड यानी मिसाइल ट्रक कॉन्फिगरेशन में तैयार किया जाता है, तब यह एक साथ 10 से 12 एयर-टू-एयर मिसाइलें लेकर उड़ सकता है.
इनमें आम तौर पर लंबी दूरी की PL-15और PL-17BVR मिसाइलें तथा नजदीकी हवाई लड़ाई (डॉगफाइट) के लिए PL-10 छोटी दूरी की मिसाइलें शामिल होती हैं.
चेंगदू J-20, जिसे माइटी ड्रैगन भी कहा जाता है, चीन का दो इंजन वाला, हर मौसम में उड़ान भरने वाला पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान है.
इसने पहली बार 11 जनवरी 2011 को उड़ान भरी थी. इसका विकास 1990 के दशक के आखिर में शुरू किए गए J-XX प्रोग्राम के तहत किया गया था.
J-20 का डिजाइन डबल कैनार्ड लेआउट पर आधारित है. यानी इसके मुख्य पंखों के आगे छोटे कंट्रोल विंग लगाए गए हैं. इसी तरह का डिजाइन चीन के J-10 लड़ाकू विमान में भी देखने को मिलता है.
इस विमान को मुख्य रूप से हवा में दुश्मन के विमानों पर बढ़त हासिल करने के लिए बनाया गया था, लेकिन इसमें सटीक हमले करने की क्षमता भी है.
शुरुआत में J-20 में चीन के स्वदेशी WS-10B थ्रस्ट-वेक्टरिंग इंजन लगाए गए थे. इन इंजनों का पहली बार सार्वजनिक प्रदर्शन 2018 के झुहाई एयर शो में किया गया था.

स्टील्थ लड़ाकू विमान शामिल करने वाला केवल दूसरा देश
मार्च 2017 में J-20 को आधिकारिक तौर पर चीनी एयरफोर्स में शामिल कर लिया गया. इसके एयरफोर्स में शामिल होते ही अमेरिका के बाद चीन दुनिया का ऐसा केवल दूसरा देश बना गया जिसने पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ लड़ाकू विमान अपने हवाई बेड़े में शामिल किया हो.
अक्टूबर 2023 में अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि चीन J-20 को लगातार और आधुनिक बना रहा है. इसमें कई नए सुधार किए जा रहे हैं, जैसे- पहले से ज्यादा हथियार ले जाने की क्षमता. ड्रोन के साथ मिलकर ऑपरेशन करने वाले कंट्रोल सिस्टम. अधिक ताकतवर WS-15 थ्रस्ट-वेक्टरिंग इंजन.

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क्या है J-20S?
J-20 का नया दो सीटों वाला संस्करण J-20S कहलाता है. इसे कई तरह के मिशनों के लिए तैयार किया गया है.
जिनमें लंबी दूरी के मिशन, हवा में बढ़त हासिल करने, बेहद सटीक हमला करने, इंसान सहित और इंसान रहित दोनों तरह के संचालनों, युद्ध की निगरानी करने, इलेट्रॉनिक वारफेयर, कमांड ऐंड कंट्रोल मिशन, इन सभी के लिए तैयार किया गया है.
J-20 की सबसे बड़ी ताकत उसकी सिचुएशनल अवेयरनेस यानी युद्धक्षेत्र की पूरी तस्वीर एक साथ समझने की क्षमता मानी जाती है. इसमें लगे आधुनिक सेंसर और कंप्यूटर अलग-अलग स्रोतों से मिलने वाली जानकारी को एक साथ जोड़कर पायलट को तुरंत उपलब्ध कराते हैं.
साथ ही स्टील्थ तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम की मदद से यह कोशिश की जाती है कि दुश्मन को J-20 की सही स्थिति का पता ही न चल सके.
कुछ डिफेंस एक्सपर्ट्स मानते हैं कि J-20 में AESA रडार लगाया गया है, जिसमें करीब 2000 से 2200 ट्रांसमिट/रिसीव मॉड्यूल लगे हो सकते हैं. इससे इसकी लक्ष्य खोजने और ट्रैक करने की क्षमता काफी बढ़ जाती है.

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360 डिग्री नजर रखने वाला सिस्टम
J-20 में ऐसे इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल सेंसर लगाए गए हैं, जो काफी हद तक अमेरिकी F-35 फाइटर जेट के सेंसर सिस्टम जैसे माने जाते हैं. इनकी मदद से विमान के आसपास 360 डिग् रीतक निगरानी की जा सकती है. बाद के J-20 मॉडलों में यह क्षमता और बेहतर की गई है.
फरवरी 2024 में चीनी मीडिया ने दावा किया था कि J-20 अब AEWC जैसे मिशन भी पूरा कर सकता है. यानी यह हवा में रहते हुए दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने और दूसरे विमानों को निर्देश देने का काम साथ-साथ कर सकता है.
क्या J-20 पूरी तरह स्टील्थ है?
कुछ रक्षा विशेषज्ञ J-20 के डिजाइन पर सवाल भी उठाते हैं. उनका कहना है कि विमान के आगे लगे कैनार्ड उसकी स्टील्थ क्षमता को कुछ हद तक कम कर सकते हैं. क्योंकि ये रडार पर विमान की पहचान होने की संभावना बढ़ा सकते हैं. हालांकि चीन का दावा है कि उसने डिजाइन और नई तकनीकों की मदद से इस कमी को काफी हद तक दूर कर लिया है.
हर साल कितने J-20 बन रहे हैं?
चीन का दावा है कि वह हर साल 100 से 120 J-20 बना सकता है. हालांकि कई स्वतंत्र रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि वास्तविक उत्पादन 60 से 70 विमान प्रति वर्ष के आसपास होना ज्यादा संभव है.

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तो J-20 आखिर कितने हथियार ले जा सकता है?
J-20 लगभग 11,000 किलोग्राम तक हथियार ले जाने में सक्षम है.
इसके अंदर बने हथियार कक्ष में करीब छह PL-10 छोटी दूरी की मिसाइलें, L-15, PL-16 और PL-21 श्रेणी की लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलें रखी जा सकती हैं.
जरूरत पड़ने पर बाहरी हार्डपॉइंट पर PL-15 लंबी दूरी की मिसाइल और PL-17 बेहद लंबी दूरी की मिसाइल भी लगाई जा सकती हैं.
इस तरह J-20 सिर्फ स्टील्थ फाइटर नहीं, बल्कि लंबी दूरी तक हवाई युद्ध लड़ने वाला अत्याधुनिक मल्टीरोल लड़ाकू विमान बन जाता है.
J-35चीन का सबसे नया दो इंजन वाला, पांचवीं पीढ़ी का स्टील्थ मल्टीरोल लड़ाकू विमान है. इसे मुख्य रूप से हवा में बढ़त हासिल करने और जमीन पर सटीक हमले करने के लिए विकसित किया गया है.
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