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Success Story: घूंघट में दी परीक्षा, पिता का अधूरा सपना शादी के बाद बेटी ने किया पूरा; छठे अटेंप्ट में बनी अफसर

"इरादे मजबूत हों तो हालात रोक नहीं सकते" - ये बात सागर की 30 वर्षीय राशि चौबे ने सच कर दिखाई. उन्होंने शादी के बाद भी ससुराल में रहकर पिता के सपने को पूरा करने की जिद नहीं छोड़ी.

Success Story: घूंघट में दी परीक्षा, पिता का अधूरा सपना शादी के बाद बेटी ने किया पूरा; छठे अटेंप्ट में बनी अफसर
Success Story: पिता का सपना पूरा करने के लिए सागर की राशि चौबे बनी माइनिंग अफसर.
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  • सागर की राशि चौबे ने 5 बार असफलता के बाद भी नहीं छोड़ी उम्मीद, छठी बार में MPPSC में सफलता पाई.
  • पिता के निधन के बाद परिस्थितियां बिगड़ीं तो परिवार ने कर दी शादी.
  • ससुराल में दिन में काम करतीं तो रात में पढ़ाई, पति ने भी खूब दिया साथ.

Inspirational Story: कहते हैं कि अगर इरादे मजबूत हों तो हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, मंजिल तक पहुंचने से कोई नहीं रोक सकता. मध्य प्रदेश के सागर की 30 वर्षीय राशि चौबे ने इस कहावत को सच साबित कर दिखाया है. पिता का अफसर बनने का सपना अपनी आंखों में संजोए राशि ने लगातार संघर्ष किया. पांच बार असफलता मिली, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आखिरकार छठे प्रयास में मध्य प्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) की परीक्षा उत्तीर्ण कर माइनिंग इंस्पेक्टर (खनिज निरीक्षक) का पद हासिल कर लिया.

राशि की सफलता सिर्फ एक प्रतियोगी परीक्षा पास करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह संघर्ष, धैर्य, पारिवारिक सहयोग और दृढ़ संकल्प का ऐसा उदाहरण है, जो हर उस युवा को प्रेरित करता है जो असफलताओं से निराश हो जाता है.

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Success Story: पिता चाहते थे राशि चौबे पढ़-लिखकर बने अफसर

पिता का सपना पूरा करने के लिए की दिन-रात मेहनत

राशि ने NDTV को बताया कि उनके पिता बचपन से ही चाहते थे कि उनकी बेटी पढ़-लिखकर एक जिम्मेदार सरकारी अधिकारी बने. इसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने पूरी मेहनत से पढ़ाई शुरू की. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान उन्होंने दिन-रात एक कर दिया, लेकिन सफलता बार-बार उनसे दूर रही. एक-दो नहीं बल्कि लगातार पांच बार उन्हें असफलता का सामना करना पड़ा. हर बार उम्मीद टूटती थी, लेकिन पिता का सपना उन्हें फिर से खड़ा कर देता था.

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 Success Story: उम्मीद टूटती थी, लेकिन पिता का सपना पूरा करने को फिर खड़ी हो जाती थीं राशि चौबे

पढ़ाई के दौरान पिता निधन, टूट चुकीं थी राशि

संघर्ष के इसी दौर में राशि के जीवन में सबसे बड़ा दुख आया. उनके पिता का निधन हो गया. पिता के जाने के बाद मानो परिवार की पूरी दुनिया बदल गई. राशि बताती हैं कि वह मानसिक रूप से पूरी तरह टूट चुकी थीं. पिता ही परिवार की सबसे बड़ी ताकत थे. वे मंदिर में पुजारी थे और उसी आय से पूरे परिवार का पालन-पोषण करते थे. परिवार में पांच भाई-बहन हैं और पिता के निधन के बाद घर की जिम्मेदारी बड़े भाई के कंधों पर आ गई.

परिस्थितियों को देख परिवार को करनी पड़ी शादी

पारिवारिक परिस्थितियों को देखते हुए भाई ने राशि की शादी कर दी. शादी के बाद जिम्मेदारियां और बढ़ गईं. एक ओर पिता का अधूरा सपना था तो दूसरी ओर नए परिवार की जिम्मेदारियां. हालांकि, राशि की जिंदगी में यह नया अध्याय उनके लिए संबल बन गया. उन्हें अपने पति और ससुराल पक्ष का भरपूर सहयोग मिला.

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 Success Story: राशि की ससुराल वालों ने तैयारी में नहीं आने दी बाधा.

ससुराल में मिला खूब सहयोग

राशि ने एनडीटीवी से आगे कहा कि उनका विवाह संयुक्त परिवार में हुआ है. उन्हें कभी यह महसूस नहीं होने दिया गया कि शादी के बाद उनकी पढ़ाई या तैयारी में कोई बाधा आएगी. उनके पति ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया, जबकि सास-ससुर ने भी उन्हें बेटी की तरह सहयोग दिया. जब भी किसी परीक्षा के लिए बाहर जाना होता, उनकी सास स्वयं उनके लिए टिफिन तैयार करती थीं और पूरे परिवार का उत्साह उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता था.

राशि का कहना है कि संयुक्त परिवार में रहने के अपने अलग फायदे हैं. परिवार के सदस्य जिम्मेदारियां साझा कर लेते हैं, जिससे पढ़ाई और तैयारी के लिए समय निकालना आसान हो जाता है. यही कारण रहा कि विवाह के बाद भी उन्होंने अपने लक्ष्य से समझौता नहीं किया.

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दिन में घर की जिम्मेदारी उठाई तो रात में सपना पूरा करने को पढ़ाई

उन्होंने दिन में घर की जिम्मेदारियां निभाईं और रात को देर तक जागकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करती रहीं. कई बार थकान होती थी, लेकिन पिता की याद और उनका सपना उन्हें फिर से किताबों के पास बैठा देता था. लगातार मेहनत और आत्मविश्वास के बल पर आखिरकार MPPSC-2025 की परीक्षा में उन्होंने सफलता हासिल कर खनिज निरीक्षक के पद पर चयन प्राप्त किया.

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देर-सवेर सफलता मिल ही जाती है- राशि चौबे

राशि मानती हैं कि असफलता किसी भी मंजिल का अंत नहीं होती. यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य पर अडिग रहे और लगातार प्रयास करता रहे तो सफलता देर-सवेर जरूर मिलती है. उनका कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को एक-दो असफलताओं से निराश नहीं होना चाहिए. हर असफलता व्यक्ति को कुछ नया सिखाती है और सफलता की ओर एक कदम आगे बढ़ाती है.

आज राशि चौबे की सफलता न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे सागर जिले के लिए गर्व का विषय है. उन्होंने यह साबित कर दिया कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हों, यदि परिवार का साथ, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प हो तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता. पिता के सपने को अपनी मंजिल बनाकर उन्होंने जो सफलता हासिल की है, वह हजारों बेटियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गई है.

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