विज्ञापन

कांवड़ ले जाते समय 'बम भोले' क्यों बोलते हैं कांवड़िए? पंडित जी से जानिए 'बोल बम' जयकारे का अर्थ

सावन के महीने में शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और गंगा जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. कांवड़ यात्रा के दौरान शिव भक्त बोल बम, बम भोले बोलते हुए चलते हैं.

कांवड़ ले जाते समय 'बम भोले' क्यों बोलते हैं कांवड़िए? पंडित जी से जानिए 'बोल बम' जयकारे का अर्थ
कांवड़ यात्रा 2026
file photo

सावन का महीना शुरू होने वाला है. सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति का सबसे पवित्र समय माना जाता है. इस समय शिवभक्त कांवड़ यात्रा पर निकलते हैं और गंगा जल लाकर भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं. इस साल कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगी. 11 अगस्त को सावन शिवरात्रि के दिन श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कांवड़ ले जाते समय बम भोले क्यों बोला जाता है और बोल बम जयकारे का अर्थ क्या है.

बोल बम और बम भोले का अर्थ

बोल बम- 'बोल' का अर्थ है उच्चारण करना या कहना और 'बम' भगवान शिव का अत्यंत पवित्र स्वरूप व शक्ति का सूचक है. यह शिवभक्तों को ईश्वर का स्मरण कराते हुए आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है.

बम भोले- 'भोले' भगवान शंकर का ही नाम है. इस जयकारे का भाव है कि हे भोलेनाथ! आप हमारे सभी कष्टों और भय को दूर करें.

पौराणिक महत्व

धार्मिक कथाओं के अनुसार, जब भगवान शिव ने देवी-देवताओं के आग्रह पर राजा दक्ष को बकरे का सिर लगाया था, तब राजा दक्ष के मुख से सबसे पहले 'बम बम' शब्द ही निकले थे. तब से ही इस ध्वनि को शिवजी को समर्पित और अत्यंत प्रभावशाली माना गया है. कांवड़ यात्रा के दौरान 'बोल बम' या 'बम भोले' का जयकारा लगाने से कांवड़ियों को असीम ऊर्जा मिलती है. पंडित जी के अनुसार, 'बम' एक सिद्ध मंत्र है जो ब्रह्मा, विष्णु और महेश की शक्ति का प्रतीक है. यह जयकारा थकान मिटाने, कष्टों को दूर करने और भगवान शिव को प्रसन्न करने का माध्यम है.

कांवड़ की मान्यताएं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सबसे पहली कांवड़ भगवान परशुराम ने त्रेतायुग में उठाई थी. उन्होंने उत्तर प्रदेश के पुरा महादेव में शिव जी का जलाभिषेक किया था. इसके अलावा मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकला विष पीने के बाद शिव जी का कंठ नीला पड़ गया था और उनके शरीर में जलन हो रही थी. तब रावण ने कांवड़ में पवित्र गंगाजल लाकर शिव जी को अर्पित किया था, जिससे उन्हें उस जलन से राहत मिली. तभी से कांवड़ यात्रा की परंपरा चली आ रही है.

यह भी पढ़ें:- Kanwar Yatra 2026: पहली बार कांवड़ लेने जा रहे हैं तो इन नियम का रखें खास ध्यान, जानिए क्या है मान्यताएं 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Kanwar Yatra, Sawan
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com