आज यानी 22 जुलाई को भड़ली नवमी मनाई जा रही है. इसे भड़रिया नवमी के नाम से भी जाना जाता है. वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को भड़ली नवमी मनाई जाती है. इस दिन अबूझ मुहूर्त होता है और शादी-विवाह जैसे मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं. साथ ही ये दिन किसी भी नए कार्य को शुरू करने के लिए भी बेहद शुभ माना जाता है. आइए जानते हैं इसका धार्मिक महत्व और क्यों होता है ये सबसे शुभ मुहूर्त.
भड़ली नवमी तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि की शुरुआत आज यानी 22 जुलाई को सुबह 5 बजकर 16 मिनट पर हो गई है. वहीं, इसका समापन 23 जुलाई को सुबह 7 बजकर 3 मिनट पर होगा. ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए भड़ली नवमी का पर्व आज यानी 22 जुलाई को मनाया जा रहा है.
भड़ली नवमी का धार्मिक महत्व
देवशयनी एकादशी से ठीक 2 दिन पहले भड़ली नवमी मनाई जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह केवल एक तिथि ही नहीं है बल्कि स्वयं सिद्ध मुहूर्त है. अगर किसी कारण से आपका विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यापार, भूमि पूजन या कोई अन्य शुभ कार्य करने के लिए उचित और शुभ मुहूर्त नहीं मिल रहा हो तो भड़ली नवमी के दिन वे सभी कार्य किए जा सकते हैं. माना जाता है कि भड़ली नवमी का शुभ मुहूर्त भगवान विष्णु का दिया हुआ मुहूर्त है. इसे अबूझ मुहूर्त भी कहते हैं. इस दिन किसी भी शुभ कार्य करने के लिए मुहूर्त की जरूरत नहीं है.
भड़ली नवमी पर किसकी पूजा करें?
भड़ली नवमी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करने का विधान है. देवशयनी एकादशी से पहले इस दिन श्री हरि की पूजा करना बेहद फलदायी माना जाता है. इसके अलावा इस दिन वैष्णव परंपरा से जुड़े लोग भगवान विष्णु की विशेष पूजा, हवन और व्रत आदि करते हैं.
Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.
यह भी पढ़ें: Sawan 2026 Vastu Tips: सावन शुरू होने से पहले घर ले आएं ये 5 शुभ चीजें, बनी रहेगी महादेव की कृपा
यह भी पढ़ें: सावधान! 90% लोग घर में करते हैं ये 5 गलतियां, इसलिए नहीं टिकती मां लक्ष्मी की कृपा
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं