ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि द्विवेदी का कहना है कि इस वर्ष की अपेक्षा 2026 बेहतर तो होगा, लेकिन कुछ ऐसी चीजें होने वाली हैं जो बहुत बड़े स्तर पर प्रभाव डालेंगी जिसमें सबसे महत्वपूर्ण है आर्थिक स्थितियां, ज्योतिष दृष्टि से 2026 का साल रिसेशन का दौरा होगा और बड़े स्तर पर आर्थिक परिस्थितियों गड़बड़ होने के कारण मल्टीनेशनल कंपनियों से लेकर हर तरफ कई बड़े आर्थिक बदलाव देखे जा सकेंगे. जिसका प्रभाव आम जनमानस पर सीधे तौर पर पड़ेगा वहीं अन्य कई मामलों में भी 2026 मिला-जुला असर लेकर आएगा.
ज्योतिषाचार्य के मुताबिक भारत के क्षितिज पर कन्या लग्न के उदय काल के साथ ही रोहिणी नक्षत्र वृषभ राशि के उच्चस्थ चंद्रमा का संचरण साथ ही लग्नेश बुध के साथ ही पौष शुक्ल त्रयोदशी, सिद्धिविनायक के वार बुधवार को सभी तिथियों को देने वाला नव वर्ष 2026 का आगमन श्री गणेश सिद्धि योग में हो रहा है, जो 2026 को आर्थिक, राजनीतिक, कूटनीतिक विदेश नीति सहित चतुर्दिक विकास की ओर अग्रसर करने वाला होगा.
ग्रहों की चाल करेगी प्रभावित
उन्होंने बताया कि देखा जाए नव वर्ष 2026 की कुंडली कन्या लग्न, वृषभ राशि की है. इस वर्ष की लग्न कुंडली व नवांश कुंडली की सूक्ष्म गणना के आधार पर लग्नेश बुध चतुर्थ स्थान (सुख भाव) बृहस्पति के घर में सूर्य मंगल शुक्र के साथ संरक्षण कर रहा है, तो वहीं पर देवगुरु बृहस्पति की सप्तम दृष्टि पड़ रही है. देखा जाए तो यह वर्ष भारत के लिए उन्नति कारक होगा.
बढ़ेगा भारत का रुतबा
यह वर्ष भारत के लिए विश्व व्यापार में आयात निर्यात को बढ़ावा देने वाला होगा, भारत की कूटनीति व विदेश नीति मजबूत होगी. विश्व पटल पर भारत अग्रिम पंक्ति में खड़ा नजर आएगा. इस वर्ष नव वर्ष की कुंडली में शनि और राहु की युति षष्ठ भाव में है.
कोई नया वायरस होगा पैदा
उन्होंने बताया कि निश्चित रूपेण छठे भाव (शत्रु रोग ऋण) पर यह युति भारत को विशेष सफलता दिलाएगी. जिसमें भारत के शत्रु राष्ट्रो पर भारत का दबदबा बनाने वाला होगा. यह साल मेडिकल क्षेत्र में विशेष उपकरणों के साथ ही मेडिकल क्षेत्र में कोई नई खोज या नई उपलब्धि को प्राप्त करने वाला होगा. साथ ही शनि और राहु की युति किसी नये विषाणु या महामारी को जन्म भी दे सकती हैं.
होंगे युद्ध खूब आएंगी आपदायें
भारत की कुंडली कर्क राशि से छठे भाव धनु राशि में सूर्य, मंगल, बुध, शुक्र की युति व नव वर्ष की कुंडली के चतुर्थ भाव में सूर्य मंगल, बुध, शुक्र की युति के लिये कहा गया है, जब एक राशि पर 4 से ज्यादा ग्रह होते हैं तो धरती जल या रक्त से संचित होती है यानी धरती पर बड़े युद्ध की आशंका, दैविक आपदाएं, प्राकृतिक आपदाएं, भूकंप महामारी इत्यादि देखने को मिल सकती है.
फसल अच्छी लेकिन सोना चांदी होगा महंगा
वही रबी और खरीफ की फसले सामान्य रहेगी. सराफा बाजार में सोने चांदी में तेजी देखने को मिलेगी. डीजल और पेट्रोल की कीमतों में सामान्य दृष्टि बनी रहेगी. वृषभ का चंद्रमा उच्चस्थ होने से भाग्य भाव में भारत को विशेष मजबूती प्रदान करने वाला होगा.
बन रही आर्थिक मंदी की स्थिति
वही नव वर्ष की कुंडली में सुख भाव में सूर्य, मंगल, शुक्र, बुद्ध दशम भाव में बृहस्पति सप्तम भाव में शनि और राहु की युति यानी देवगुरु बृहस्पति को राहु मंगल, सूर्य, बृहस्पति को देख रहे हैं. ज्योतिष में बृहस्पति को धन का कारक माना गया है, अर्थात बृहस्पति पर तीन पाप ग्रहों की दृष्टि से विश्व पटल पर भारत सहित आर्थिक मंदी की भी आशंका बनी रहेगी.
चार ग्रहण में एक भारत में दिखेगा
इस वर्ष विश्व पटल पर चार ग्रहण होंगे। जिसमें से दो सूर्य ग्रहण दो चंद्र ग्रहण होंगे. इन चार ग्रहों में से भारत में 2026 में सिर्फ एक ग्रहण ही दिखाई देगा, जो 3 मार्च 2026 को लगने वाला खग्रास चंद्र ग्रहण भारत में खंड चंद्र ग्रहण के रूप में दिखाई देगा.
हिंदी मास की वृद्धि से अधिक मास
वही 2026 में हिंदी के महीने में ज्येष्ठ मास की अभिवृद्धि से इस वर्ष 12 की जगह 13 महीने मान्य होंगे. इसको हम सनातनी मलमास या अधिक मास भी कहते हैं, अर्थात विशिष्ट मास की वृद्धि है.
इन राशियों पर शनि का होगा प्रभाव
वही मांगलिक कार्यों की दृष्टि से लग्न मुहूर्त सामान्य से कम देखने को मिलेंगे. इस वर्ष कुंभ मीन मेष राशि पर शनि की साढेसाती बनी रहेगी, जबकि सिंह एवं धनु राशि पर शनि की अढैया होगी.
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