Ashadha Amavasya Kab Hai: हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष में पड़ने वाली पंद्रहवीं तिथि अमावस्या कहलाती है, जिसे पितरों की पूजा से लेकर स्नान-दान आदि के लिए अत्यधिक फलदायी माना गया है. जिस अमावस्या पर चंद्र देवता के आकाश में दर्शन नहीं होते हैं, वह आषाढ़ के महीने में कब पड़ेगी? सनातन परंपरा में आषाढ़ मास की अमावस्या का क्या महत्व है और इस दिन क्या करना और क्या नहीं करना चाहिए? आइए आषाढ़ मास में पितरों का आशीर्वाद पाने से लेकर मां लक्ष्मी को मनाने तक का उपाय और सभी जरूरी नियम के बारे में विस्तार से जानते हैं.
आषाढ़ अमावस्या की तारीख

पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि 13 जुलाई 2026, सोमवार की शाम 06:49 बजे प्रारंभ होकर 14 जुलाई 2026, मंगलवार को दोपहर 03:12 बजे समाप्त होगी. ऐसे में उदया तिथि के अनुसार आषाढ़ मास की अमावस्या 14 जुलाई 2026, मंगलवार को मान्य होगी और इसी दिन इससे जुड़ी पूजा, स्नान, दान और उपाय आदि किया जाएगा.
आषाढ़ मास की अमावस्या पर क्या करना चाहिए?
- आषाढ़ मास की अमावस्या पर अपने पितरों को प्रसन्न करने के लिए विशेष रूप से तर्पण, पिंडदान और श्राद्ध करें.
- आषाढ़ अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए अपने घर के दक्षिण दिशा तथा पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीया जलाएं.
- आषाढ़ अमावस्या पर शनि संबंधी दोष को दूर करने के लिए काली गाय, कुत्ते और कौवे को रोटी खिलाएं और मछलियों को आटे की गोली डालें.
- आषाढ़ अमावस्या पर धन की देवी मां लक्ष्मी की विशेष पूजा एवं उनके मंत्रों का जप करें.
आषाढ़ अमावस्या पर क्या नहीं करना चाहिए?

- हिंदू मान्यता के अनुसार आषाढ़ मास की अमावस्या पर अपने बाल, दाढ़ी, नाखून नहीं कटवाने चाहिए.
- आषाढ़ अमावस्या पर किसी के साथ वाद-विवाद न करें और न किसी निर्जन या अंधेरे वाले स्थान पर जाएं.
- आषाढ़ मास की अमावस्या पर व्यक्ति को दिन में भूलकर भी नहीं सोना चाहिए.
- आषाढ़ अमावस्या पर क्रोध या विवाद न करें और न ही तामसिक चीजों का सेवन करें.
आषाढ़ अमावस्या का धार्मिक महत्व

हिंदू मान्यता के अनुसार प्रत्येक महीने में पड़ने वाली हर तिथि और सप्ताह के हर वार का अपना एक अलग धार्मिक महत्व होता है. यदि बात करें आषाढ़ मास की अमावस्या तिथि की तो इसे सनातन परंपरा में हलहारिणी अमावस्या के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि इस दिन किसान अपने हल और खेती से जुड़े औजारों की पूजा करते हैं.
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि का महाउपाय, जिसे करते ही जल्द पूरी होती है बड़ी से बड़ी मनोकामना
सनातन परंपरा में इस पावन तिथि को पितरों के निमित्त पूजा, स्नान, दान, तर्पण, श्राद्ध आदि के लिए अत्यंत ही फलदायी माना गया है. आषाढ़ अमावस्या पर पितरों की पूजा के साथ धन की देवी मां लक्ष्मी और शनि देवता संबंधी उपाय करके उनका विशेष आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है.
आषाढ़ मास की अमावस्या का महाउपाय

हिंदू मान्यता के अनुसार आषाढ़ मास की अमावस्या का पुण्यफल पाने के लिए यदि संभव हो तो किसी जलतीर्थ पर जाकर स्नान और अपने सामर्थ्य के अनुसार दान देना चाहिए. आषाढ़ अमावस्या पर किसी जरूरतमंद व्यक्ति को काले जूते, काला छाता, वस्त्र, अन्न और धन का दान करना चाहिए.
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है. एनडीटीवी इसकी पुष्टि नहीं करता है.)
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं