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Census 2027 में जाति कैसे दर्ज की जाएगी? जानिए जनगणना के सवाल नंबर 10 का पूरा मतलब

भारत की जनगणना 2027 का पहला चरण जल्द ही पूरा हो जाएगा. इसमें हाउस लिस्टिंग की जा रही है. अब दूसरा चरण भी 17 अगस्त से शुरू हो गया है. इसमें आबादी की गिनती की जा रही है और साथ ही जाति की भी गितनी हो रही है. आखिर कैसे दर्ज की जाएगी जातियां?

Census 2027 में जाति कैसे दर्ज की जाएगी? जानिए जनगणना के सवाल नंबर 10 का पूरा मतलब
जाति जनगणना 2027
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  • जनगणना 2011 में कुल 29 सवाल थे, जबकि जनगणना 2027 के दूसरे चरण में 40 सवाल पूछे जा रहे हैं.
  • जाति जनगणना समझने के लिए 1931 की जनगणना महत्वपूर्ण है.
  • तब देश भर में 4147 से अधिक जातियों और उप-जातियों की गणना की गई थी.

जनगणना 2027 के दूसरे फेज में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा सभी जातियों की गिनती की जाएगी. सवाल नंबर 10 में SC/ST/Caste पूछा जाएगा और व्यक्ति अपनी जाति खुद बताएगा. इन्युमरेटर किसी तैयार सूची में से जाति नहीं चुनेगा. हालांकि इस खुले फॉर्मेट को लेकर डेटा की शुद्धता पर सवाल हैं, क्योंकि 2011 के सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना में कथित तौर पर इसी तरह लाखों अलग-अलग जातियों के नाम सामने आए थे. जनगणना 2027 में पहली बार SC/ST के अलावा सभी जातियों की गिनती होगी. लेकिन जाति किसी तैयार सूची से नहीं, बल्कि व्यक्ति के बताए नाम के आधार पर दर्ज होगी. यही तरीका अब डेटा की शुद्धता को लेकर सबसे बड़ी बहस बन गया है.

जनगणना 2027 में जाति कैसे दर्ज होगी?

14 अगस्त 2026 को भारत के महापंजीयक और जनगणना आयुक्त कार्यालय (Registrar General and Census Commissioner of India) ने आबादी गणना के लिए 40 सवालों की अधिसूचना जारी की. इनमें सबसे ज्यादा चर्चा सवाल नंबर 10 की है. जिसमें 'अनुसूचित जाति (SC)/ अनुसूचित जनजाति (ST)/ जाति' पूछा गया है. इसके जरिए ही जनगणना 2027 में जाति दर्ज की जाएगी. इसमें भी सबसे अहम यह है कि जाति दर्ज करने के लिए गणनाकार (इन्युमरेटर) के पास पहले से तैयार जातियों की कोई सूची मौजूद नहीं होगी. जनगणना अधिकारियों के मुताबिक जिस शख्स की गणना की जा रही है उसने जो भी जाति बताई, गणनाकार (इन्युमरेटर) उसी के आधार पर उसकी जाति दर्ज करेगा.

यानी प्रक्रिया कुछ इस तरह होगी.

किसी पुरुष या महिला ने अपनी जाति बताई. इन्युमरेटर उसे दर्ज कर लेगा. जनगणना के डेटा में उस जवाब को ही शामिल कर लिया जाएगा. यह तरीका जनगणना 2027 से पहले किए गए प्री-टेस्ट में भी इस्तेमाल किया गया था. ये प्री-टेस्ट जुलाई में 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में किए गए थे.

क्या जनगणना 2027 में हर जाति की गिनती होगी?

इस जनगणना में जाति का सवाल एक बड़ा बदलाव है. स्वतंत्र भारत में पहली बार अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा जातियों की भी गणना की जाएगी. जनगणना 2011 में कुल 29 सवाल थे, जबकि जनगणना 2027 के दूसरे चरण में 40 सवाल पूछे जा रहे हैं. यानी 13 नए डेटा फील्ड जोड़े गए हैं. और जाति इन्हीं 13 फील्ड्स में से एक और सबसे अहम फील्ड है. जिसकी सबसे अधिक चर्चा भी है.

जाति की गणना के लिए कोई सूची क्यों नहीं इस्तेमाल की गई?

जाति जनगणना समझने के लिए 1931 की जनगणना महत्वपूर्ण है. जनगणना रिपोर्ट्स की समीक्षा और इस विशेष जनगणना का विश्लेषण करने वाले जानकारों के लेखों के मुताबिक- 'भारत की 1931 की जनगणना में देश भर में 4147 से अधिक जातियों और उप-जातियों  की गणना की गई थी. इनमें 300 से अधिक ईसाई धर्म के जाति समूह थे, वहीं 500 ऐसे थे जो इस्लाम का पालन करते थे.'

बता दें कि 1931 के सर्वेक्षण में जनगणना करने वालों से यह अनुरोध किया गया था कि वे मुसलमानों, ईसाइयों, सिखों, जैनियों, बौद्धों और आर्य या ब्राह्मण हिंदुओं की जातिगत जानकारी पर जोर न दें. हां, अगर यह जानकारी उपलब्ध कराई जाए तो उसे दर्ज कर लें.

जाति जनगणना का सीधा लाभ क्या होगा?

अंग्रेजी अखबार द हिंदू के मुताबिक सामाजिक-आर्थिक और जाति सर्वेक्षण 2011 (SECC) में जाति से जुड़े जवाबों के आधार पर 46 लाख से अधिक अलग-अलग जाति नाम सामने आए थे. हालांकि इसे सामान्य जनगणना के समान नहीं माना जा सकता क्योंकि यह एक सर्वे था जो जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत होने वाली नियमित जनगणना का हिस्सा नहीं था. सरकार ने बाद में 2011 SECC के जाति संबंधी आंकड़ों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए और डेटा में गलतियों का हवाला दिया. इसी वजह से 2011 में जुटाया गया जाति संबंधी पूरा डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया.

अब जब जाति आधारित गणना की जा रही है तो इससे सरकार के पास देश की सामाजिक संरचना से जुड़ा एक नया और व्यापक आंकड़ा तैयार हो सकता है. इसका इस्तेमाल सामाजिक कल्याण योजनाओं, आरक्षण से जुड़ी बहस, सरकारी नीतियों और संसाधनों के वितरण जैसे मुद्दों पर चर्चा में किया जा सकता है. हालांकि असली चुनौती आंकड़ा जुटाने के बाद उसकी सफाई, वर्गीकरण और व्याख्या की होगी. जिसका सीधा फायदा सरकारी योजनाओं का लाभ हाशिए पर खड़े समाज के वर्गों तक पहुंचाने में मिलेगा. 

लेकिन सरकार के अधिकारियों के मुताबिक, खुले फॉर्मेट का अनुभव पहले सामाजिक आर्थिक और जाति जनगणना यानी SECC 2011 में भी सामने आया था. उस प्रक्रिया में लोगों से उनकी जाति का नाम खुद बताने को कहा गया था. नतीजा यह हुआ कि लाखों अलग-अलग जातियों के नाम सामने आए.

विपक्ष की आपत्तियां क्या हैं?

एक ही समुदाय के लोग अलग-अलग नाम लिख सकते हैं. उदाहरण के लिए, दिए गए विवरण के अनुसार कुछ लोगों ने बनिया जाति के लिए गुप्ता, अग्रवाल जैसे अलग-अलग नाम लिखे. इससे जातियों के नामों की संख्या बहुत बढ़ गई. यही वजह है कि जनसंख्या 2027 में भी सवाल खुला रखने को लेकर डेटा की गुणवत्ता पर सवाल उठ रहे हैं.

कांग्रेस ने भी इस तरीके की आलोचना करते हुए कहा है कि खुले प्रश्नों से डेटा की गुणवत्ता और उसकी व्याख्या में मुश्किलें पैदा हो सकती हैं.

सबसे बड़ी चुनौती केवल लोगों से जाति पूछना नहीं है, बल्कि अलग-अलग नामों को सही तरीके से समझना और दर्ज करना होगी. मान लीजिए दो लोग एक ही सामाजिक समूह से आते हैं, लेकिन दोनों अपनी जाति के अलग नाम बताते हैं. अगर गणनाकार (इन्यूमरेटर) उन नामों को उसी रूप में दर्ज करता है, तो बाद में डेटा को वर्गीकृत करने की चुनौती पैदा हो सकती है.

विपक्षी पार्टियों ने जाति जनगणना से पहले व्यापक सलाह की मांग की थी. उनका कहना था कि जाति की गणना जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण विषय पर सभी स्टेकहोल्डर्स से चर्चा होनी चाहिए.

हालांकि सरकार की ओर से दिए गए विवरण कुछ और ही कहानी कहते हैं. 2025 के दौरान सरकार की ओर से कई बार कहा गया कि अंतिम जाति प्रश्नावली अभी तय नहीं हुई है. फिर फरवरी 2026 में संसद को बताया गया कि जनगणना के दूसरे चरण के शुरू होने से पहले जाति से जुड़े सवाल सूचित किए जाएंगे जो तब तय नहीं थे. 

गृह मंत्रालय के मुताबिक जाति गणना को लेकर विभिन्न संस्थाएं और राज्य सरकारों से प्रतिनिधियों ने मुलाकात की थी, इसके बाद 14 अगस्त 2026 को 40 सवालों वाली प्रश्नावली जारी कर दी गई. 

आखिर जनगणना 2027 में जाति दर्ज करने का तरीका क्यों महत्वपूर्ण है?

जनगणना में जाति का आंकड़ा पहली बार इतने व्यापक स्तर पर दर्ज किया जाना भारत की सामाजिक संरचना को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जा सकता है.

लेकिन इसकी उपयोगिता इस बात पर काफी निर्भर करेगी कि डेटा कितना सटीक और व्यवस्थित तरीके से दर्ज होता है.

अगर लोग एक ही जाति के लिए अलग-अलग नाम लिखते हैं, तो बाद में डेटा क्लासिफिकेशन चुनौती बन सकती है. दूसरी तरफ, तैयार सूची के बजाय व्यक्ति की अपनी बताई पहचान दर्ज करने का तरीका यह सुनिश्चित करता है कि इन्यूमरेटर अपनी तरफ से जाति तय न करे. यही जनगणना 2027 की जाति गणना का सबसे बड़ा सवाल है.

जाति पूछना आसान है, लेकिन करोड़ों लोगों की अलग-अलग सामाजिक पहचान को एक भरोसेमंद और तुलनीय जनगणना डेटा में बदलना असली चुनौती होगी.

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