- PM के काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने से सुरक्षा ढांचे में बदलाव और सरकारी खर्च में उल्लेखनीय कमी आएगी.
- काफिले की गाड़ियों की संख्या लगभग 50% घटाकर करीब 20 करने से सालाना एक करोड़ रुपये तक ईंधन की बचत संभव है.
- PM के काफिले में बुलेटप्रूफ, बमरोधी और जैमर वाहन सहित कई सुरक्षा गाड़ियां शामिल होती हैं.
प्रधानमंत्री के काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने से न सिर्फ सुरक्षा ढांचे में बदलाव आएगा, बल्कि इसका सीधा असर सरकारी खर्च पर भी दिखेगा. अनुमान है कि सिर्फ ईंधन में ही सालाना करोड़ों की बचत हो सकती है.
प्रधानमंत्री के काफिले की गाड़ियों की संख्या तय नहीं होती, लेकिन आमतौर पर यह संख्या 30 से 40 के बीच रहती है. अगर इसमें 50% की कटौती की जाए, तो काफिले में गाड़ियों की संख्या घटकर करीब 20 रह जाएगी.
Leading from the front, Prime Minister Narendra Modi has reduced his convoy size significantly. This was implemented in his recent domestic visit. Reduction in vehicles was done while maintaining essential security components as per SPG protocol. The convoy size was reduced in… pic.twitter.com/QxH8lOrUx5
— ANI (@ANI) May 13, 2026
सालाना एक करोड़ की बचत
आंकड़ों के मुताबिक, काफिले में शामिल गाड़ियां रोज औसतन 50 किलोमीटर का सफर तय करती हैं. ये बुलेटप्रूफ गाड़ियां होती हैं, जिनका माइलेज 4 से 5 किलोमीटर प्रति लीटर के बीच रहता है. ऐसे में 20 गाड़ियां कम होने से हर दिन करीब 250 लीटर डीजल की बचत होगी. सालाना आधार पर यह बचत करीब 91,250 लीटर तक पहुंचती है. इस तरह सिर्फ ईंधन में ही एक साल में करीब 1 करोड़ रुपये की बचत हो सकती है.

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काफिले में कौन-कौन सी गाड़ियां होती हैं
प्रधानमंत्री के काफिले में अत्याधुनिक सुरक्षा से लैस गाड़ियां शामिल होती हैं, जिनमें रेंज रोवर, BMW और मर्सिडीज जैसी बुलेटप्रूफ और बमरोधी गाड़ियां प्रमुख होती हैं. पीएम किस गाड़ी में बैठेंगे, इसका फैसला आखिरी समय पर सुरक्षा एजेंसियां करती हैं.
काफिले की शुरुआत पायलट गाड़ी से होती है, जो रास्ता साफ करती है। इसके बाद जैमर वाहन चलता है, जो रेडियो सिग्नल को बाधित कर रिमोट IED जैसे खतरों को निष्क्रिय करता है. इसके पीछे एस्कॉर्ट गाड़ियां और एसपीजी कमांडो के साथ चलने वाली SUV (फॉर्च्यूनर या लैंड क्रूजर) होती हैं.
भ्रम की स्थिति बनाने के लिए डमी गाड़ियां भी शामिल होती हैं. इसके अलावा एम्बुलेंस और काफिले के अंत में स्थानीय प्रशासन के अधिकारी जैसे डीएम और एसएसपी की गाड़ियां रहती हैं.
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राज्यों में भी काफिले कम करने का ट्रेंड
देश के कई राज्यों में मुख्यमंत्रियों ने भी अपने काफिले को छोटा किया है.
- राजस्थान: 14-16 से घटाकर 5 गाड़ियां
- मध्य प्रदेश: 13 से घटाकर 8
- गुजरात: 14-16 से घटाकर सिर्फ 3
- उत्तर प्रदेश: 15-18 से घटाकर 8-9
- बिहार (डिप्टी सीएम): 5-7 से घटाकर 2
इस ट्रेंड से साफ है कि सुरक्षा बनाए रखते हुए खर्च कम करने की दिशा में राज्यों ने भी कदम बढ़ाए हैं. प्रधानमंत्री के काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने का फैसला सुरक्षा और खर्च के संतुलन का उदाहरण बन सकता है. इससे न सिर्फ ईंधन की बचत होगी, बल्कि सरकारी खर्च में भी बड़ी कटौती संभव है, जिसका असर लंबी अवधि में दिखेगा.
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