विज्ञापन

जंग दूर, असर भरपूर: बीयर, कंडोम, सड़क… एक जंग ने रोजमर्रा की चीजें प्रभावित कर दीं, जानें भारत में किन-किन इंडस्ट्री पर असर

ईरान-अमेरिका जंग भले हजारों किलोमीटर दूर लड़ी जा रही हो, लेकिन इसका असर भारत के हर घर तक महसूस किया जा रहा है. तेल और गैस की सप्लाई में आई रुकावट ने सड़क निर्माण से लेकर बीयर, कंडोम, खाने-पीने और घर बनाने तक, हर चीज को प्रभावित कर दिया है. जंग से अब आम आदमी की जेब पर सीधा असर पड़ रहा है.

जंग दूर, असर भरपूर: बीयर, कंडोम, सड़क… एक जंग ने रोजमर्रा की चीजें प्रभावित कर दीं, जानें भारत में किन-किन इंडस्ट्री पर असर
  • ईरान-US के तनाव से भारत में सप्लाई चेन बाधित होकर कई उद्योगों की उत्पादन लागत और उपलब्धता प्रभावित हो रही है.
  • ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण कंस्ट्रक्शन सेक्टर में लागत बढ़ी है और कई प्रोजेक्ट्स में देरी होने लगी है.
  • पेट्रोकेमिकल कच्चे माल की कमी से कंडोम उद्योग प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतों में बढ़ोतरी की आशंका है.
नई दिल्ली:

ईरान-अमेरिका टकराव भले ही मिडिल ईस्ट के आसमान में गूंज रहा हो, लेकिन उसकी आहट भारत के बाजारों, फैक्ट्रियों और घरों तक साफ सुनाई देने लगी है. यह सिर्फ एक जंग नहीं, बल्कि सप्लाई चेन पर पड़ा ऐसा झटका है जिसने रोजमर्रा की जिंदगी को उलझा दिया है. तेल और गैस की लाइनों में आई रुकावट ने एक-एक कर कई इंडस्ट्री की सांसें फुला दी हैं. कहीं सड़क बनाने के लिए डामर कम पड़ रहा है, कहीं बीयर की कैन गायब होने की भी खबरें हैं, तो कहीं कंडोम और पैकेजिंग तक पर संकट खड़ा हो गया है.

दरअसल, यह असर सिर्फ महंगाई तक सीमित नहीं है, बल्कि एक ऐसी 'चेन रिएक्शन' बन चुका है, जिसमें कच्चे माल से लेकर तैयार सामान तक हर कड़ी कमजोर पड़ रही है. सवाल अब सिर्फ यह नहीं कि जंग कितनी लंबी चलेगी, बल्कि यह है कि इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जिंदगी को कितनी गहराई तक झकझोर देगा.

यह भी पढ़ें- वर्ल्ड वॉर, वियतनाम युद्ध... ईरान जंग पर भाषण देते हुए इतिहास का पन्ना क्यों पलटने लगे ट्रंप?

कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट पर असर

ईरान-यूएस तनाव के चलते सबसे पहले असर ऊर्जा लागत पर पड़ा, जिसका सीधा असर कंस्ट्रक्शन सेक्टर पर दिख रहा है. LNG और फ्यूल महंगे होने से सीमेंट, स्टील और टाइल्स बनाने वाली फैक्ट्रियों की लागत बढ़ गई है. गुजरात के मोरबी जैसे इंडस्ट्रियल क्लस्टर में सिरेमिक यूनिट्स धीमी पड़ गई हैं. इससे बिल्डर्स के लिए प्रोजेक्ट की लागत बढ़ी है और कई प्रोजेक्ट्स में देरी हो रही है. नतीजा यह कि घर बनाना महंगा होता जा रहा है और रियल एस्टेट सेक्टर पर दबाव बढ़ता दिख रहा है.

AI जेनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर

AI जेनरेटेड प्रतीकात्मक तस्वीर

कंडोम इंडस्ट्री पर भी दिखने लगा है ईरान युद्ध का असर

मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव और ईरान संकट के कारण भारत का लगभग ₹7,000-8,000 करोड़ का कंडोम उद्योग प्रभावित हो रहा है. पेट्रोकेमिकल सप्लाई चेन बाधित होने से सिलिकॉन ऑयल और अमोनिया जैसे कच्चे माल की कमी हो गई है, जिससे उत्पादन पर संकट मंडरा रहा है और भविष्य में कंडोम की कीमतें बढ़ने या उपलब्धता कम होने की आशंका है.

यह भी पढ़ें- होर्मुज पर बदल गया ट्रंप का मन, बोले-जंग रुकेगी तो अपने आप खुल जाएगा, हमें जरूरत नहीं

ग्लास इंडस्ट्री (बोतल संकट)

ग्लास इंडस्ट्री पूरी तरह गैस पर निर्भर करती है और मिडिल ईस्ट से गैस सप्लाई में रुकावट ने इस सेक्टर को बुरी तरह प्रभावित किया है. उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जैसे ग्लास हब में कई भट्टियां बंद हो गई हैं या कम क्षमता पर चल रही हैं. उत्पादन में 30-40% तक गिरावट देखी जा रही है. इसका असर सिर्फ चूड़ियों तक सीमित नहीं है, बल्कि बीयर, दवाइयों और परफ्यूम की बोतलों की सप्लाई भी प्रभावित हो रही है.

लिकर इंडस्ट्री पर असर

Latest and Breaking News on NDTV

रायटर्स के मुताबिक, कांच निर्माता कंपनियों को अपना उत्पादन आंशिक या पूरी तरह से रोकना पड़ा है. इसका नतीजा यह हुआ कि बोतलों की कीमतों में करीब 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई है. सिर्फ बोतलें ही नहीं, बल्कि पैकेजिंग से जुड़ी दूसरी लागत भी बढ़ी है. कागज के कार्टन की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं. उस पर लगने वाले लेबल और टेप जैसी सामग्री भी महंगी हो गई है. इसके साथ ही शिपिंग में देरी के कारण एल्युमीनियम के आयात पर असर पड़ा है. इससे कैन बनाने वालों को भी सप्लाई में कटौती की चेतावनी देनी पड़ी है. यह संकट ऐसे समय में सामने आया है जब भारत भीषण गर्मी की ओर बढ़ रहा है.

स्टील और मेटल इंडस्ट्री

स्टील और मेटल इंडस्ट्री में गैस और ऊर्जा की बड़ी भूमिका होती है. जंग के चलते LPG और अन्य ईंधन की कमी से कई छोटे और मंझोले प्लांट दबाव में आ गए हैं. एल्युमिनियम जैसी धातुओं की कीमतों में तेजी आई है, जिससे ऑटोमोबाइल, इंफ्रास्ट्रक्चर और मशीनरी सेक्टर की लागत बढ़ गई है. इससे पूरे मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम पर असर पड़ रहा है.

केमिकल और प्लास्टिक इंडस्ट्री

केमिकल और प्लास्टिक इंडस्ट्री तेल से निकलने वाले प्रोडक्ट्स जैसे नाफ्था पर निर्भर करती है. जैसे ही तेल की सप्लाई और कीमत प्रभावित हुई, इन इंडस्ट्रीज की लागत भी बढ़ गई. प्लास्टिक पैकेजिंग, FMCG प्रोडक्ट्स और रोजमर्रा के सामान बनाने वाली कंपनियों पर दबाव बढ़ा है. इससे शैम्पू, पैकेज्ड फूड और अन्य कंज्यूमर प्रोडक्ट्स महंगे होने की आशंका है.

खेती और एग्रीकल्चर सप्लाई

Latest and Breaking News on NDTV

इस जंग का असर खेती तक पहुंच गया है. बीज और खाद की सप्लाई पैकेजिंग और लॉजिस्टिक्स पर निर्भर करती है, जो अभी प्रभावित हो रही है. कई कंपनियों को पैकेजिंग मैटेरियल की कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे किसानों तक समय पर बीज और खाद नहीं पहुंच पा रहे. अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो इसका असर पैदावार और फसल चक्र पर पड़ सकता है.

शिपिंग और ट्रेड

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम तेल और ट्रेड रूट्स में से एक है. यहां तनाव बढ़ने से शिपिंग कंपनियों का जोखिम और बीमा लागत बढ़ गई है. इसका असर एक्सपोर्ट-इंपोर्ट पर पड़ा है और शिपिंग रेट्स में भी उछाल आया है. भारत जैसे ट्रेड-डिपेंडेंट देश के लिए यह बड़ा झटका है, क्योंकि इससे सामान की लागत और डिलीवरी टाइम दोनों बढ़ रहे हैं.

यह भी पढ़ें- 'प्रोपेगैंडा की धुंध से बाहर निकलें और हकीकत देखें...', ईरान के राष्ट्रपति का अमेरिकी जनता को खुला पत्र

MSME सेक्टर (छोटे उद्योग)

छोटे और मंझोले उद्योग (MSME) इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं. कच्चा माल महंगा होने, बिजली और गैस की लागत बढ़ने और ऑर्डर घटने से इन यूनिट्स की हालत खराब हो रही है. कई छोटे उद्योग उत्पादन घटाने या अस्थायी रूप से बंद करने को मजबूर हो गए हैं, जिससे रोजगार पर भी असर पड़ रहा है.

फूड और रेस्टोरेंट इंडस्ट्री

Latest and Breaking News on NDTV

रेस्टोरेंट और फूड इंडस्ट्री की लागत में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है. LPG और अन्य ईंधन महंगे होने से किचन ऑपरेशन महंगे हो गए हैं. कई रेस्टोरेंट्स ने मेन्यू के दाम बढ़ा दिए हैं या कुछ आइटम हटाने पड़े हैं. इसका सीधा असर ग्राहकों की जेब पर पड़ रहा है.

एविएशन सेक्टर

एविएशन सेक्टर में सबसे बड़ा खर्च एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) का होता है. तेल की कीमतें बढ़ते ही एयरलाइंस की लागत बढ़ गई है. कई एयरलाइंस टिकट के दाम बढ़ाने या फ्लाइट्स कम करने पर विचार कर रही हैं. इसका असर यात्रियों की संख्या और ट्रैवल प्लानिंग पर भी पड़ रहा है.

पेट्रोल-डीजल पर असर

Latest and Breaking News on NDTV

ईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी युद्ध का पेट्रोल-डीजल की कीमतों और आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा है. कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन में बाधा आने के कारण भारत समेत दुनिया भर में ईंधन की कीमतों में बदलाव देखा जा रहा है. सरकार ने कीमतों पर काबू पाने के लिए एक्साइज ड्यूटी कम की है. इससे सरकार खुद के राजस्व में घाटा झेल रही है ताकि आम आदमी पर जंग का बोझ न बढ़े. 

यह भी पढ़ें- होर्मुज संकट का हल निकालने के लिए 35 देश आज करेंगे महामंथन, जानें ये क्यों और कितना जरूरी

रेमिटेंस और रोजगार

खाड़ी देशों में काम कर रहे भारतीय मजदूरों पर भी इस जंग का असर पड़ा है. कई प्रोजेक्ट्स रुकने से रोजगार प्रभावित हुआ है और कुछ लोग भारत लौटने लगे हैं. इससे भारत को मिलने वाली रेमिटेंस (विदेश से आने वाला पैसा) पर दबाव पड़ सकता है, जो अर्थव्यवस्था के लिए अहम स्रोत है.

आसान शब्दों में कहें तो ईरान-यूएस जंग का असर अब साफ तौर पर भारत की अर्थव्यवस्था के हर हिस्से में दिखाई दे रहा है. यह सिर्फ तेल या ऊर्जा संकट नहीं है, बल्कि एक चेन रिएक्शन है जो इंडस्ट्री से लेकर आम आदमी तक पहुंच चुका है. अगर यह तनाव लंबा खिंचता है, तो महंगाई और आर्थिक सुस्ती दोनों का खतरा और गहरा सकता है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस टकराव से सप्लाई चेन बाधित हुई है, जिससे महंगाई बढ़ी और कई उद्योग प्रभावित हुए हैं.
कच्चे माल की कमी से उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे कीमतें बढ़ने या उपलब्धता कम होने का खतरा है.
ऊर्जा लागत बढ़ने से निर्माण की लागत बढ़ी है, जिससे घर बनाने की कीमतें महंगी हो रही हैं.
शिपिंग लागत और बीमा लागत बढ़ी है, जिससे एक्सपोर्ट-इंपोर्ट और डिलीवरी समय प्रभावित हुआ है.
ईंधन की कीमतें बढ़ने से एयरलाइंस की लागत बढ़ी है, जिससे टिकट के दाम बढ़ने और उड़ानों में कटौती का खतरा है.
पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Iran Israel War, Iran Israel War Live Updates, Iran War Impact India, Iran War Impact Indian Industry, How Much War Impacting India
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com