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सर्जियो गोर का बड़ा धमाका: भारत के साथ पैक्स सिलिका, एआई, डिफेंस, बिजनेस पर बढ़ रहे आगे

भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बहुत बात हो रही है. पाकिस्तान के साथ ईरान युद्ध के दौरान अमेरिका की करीबी भी सारी दुनिया ने देखी, मगर पाकिस्तान के साथ पिच अलग है और भारत के साथ. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर के इस इंटरव्यू से पूरी पिक्चर क्लियर हो जाएगी.

सर्जियो गोर का बड़ा धमाका: भारत के साथ पैक्स सिलिका, एआई, डिफेंस, बिजनेस पर बढ़ रहे आगे
मार्को रुबियो की पत्नी के साथ नई दिल्ली में सर्जियो गोर की फाइल फोटो. (फोटो क्रेडिट-AFP)
  • सर्जियो गोर ने भारत में छह महीने के कार्यकाल के दौरान द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती पर जोर दिया
  • बोले- पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच करीबी और पुराना दोस्ताना रिश्ता भारत-अमेरिका सहयोग का मुख्य आधार है
  • दावा किया कि व्यापार समझौते पर अंतिम चरण में चर्चा चल रही है और उम्मीद है कि जल्द ही इसे पूर्ण कर लिया जाएगा

भारत में अपने कार्यकाल के छह महीने पूरे होने पर, अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने शनिवार को कहा कि भारत-अमेरिका संबंध मजबूत हैं और इनकी नींव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच करीबी रिश्ते हैं. व्हाइट हाउस में IANS के साथ एक खास इंटरव्यू में, गोर ने भारत में अब तक के अपने अनुभव, द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर हो रही प्रगति, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, H-1B वीजा, लोगों के बीच आपसी संबंधों और रणनीतिक साझेदारी की अपार संभावनाओं के बारे में बात की.

  1. IANS: आपने भारत में छह महीने पूरे कर लिए हैं. अब तक आपका अनुभव कैसा रहा है?
    एम्बेसडर गोर: मैं असल में कल ही भारत से लौटा हूं. ये छह महीने बहुत ही शानदार रहे हैं. मुझे इस खूबसूरत देश में हर जगह घूमने और कई बेहतरीन लोगों से मिलने का मौका मिला है. मैंने भारत के गतिशील पहलुओं और इसकी अद्भुत संभावनाओं को देखा है. मैं अक्सर इस अद्भुत क्षमता के बारे में बात करता हूं और मेरा मतलब सच में यही होता है. आप किसी भी सेक्टर को देख लें, अमेरिका और भारत मिलकर काम कर सकते हैं और उसे अगले स्तर पर ले जा सकते हैं. चाहे वह फार्मास्युटिकल इंडस्ट्री हो, IT हो, रक्षा सहयोग हो या कुछ और भी—अमेरिका और भारत इन सभी पर मिलकर काम कर सकते हैं.
  2. IANS: आपने पूरे भारत में बहुत यात्रा की है, किन जगहों ने आप पर सबसे गहरा असर डाला है?
    एम्बेसडर गोर: मैं किसी एक जगह को सबसे अच्छा या बुरा नहीं कहूंगा, लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगा कि मैं कई शानदार जगहों पर गया हूं - हैदराबाद और चेन्नई से लेकर राजस्थान और जयपुर तक. मुझे राजस्थान और जयपुर बहुत पसंद हैं. सच में, यहां कई अद्भुत जगहें हैं. भारत के बारे में मुझे जो बात सबसे अच्छी लगती है, वह यह है कि हर सौ किलोमीटर पर आपको एक बिल्कुल अलग इलाका देखने को मिलता है. हर इलाके का अपना अलग इतिहास और बैकग्राउंड होता है, अलग भाषाएं और बोलियां होती हैं. यहां की विविधता सच में अद्भुत और बेमिसाल है. बहुत कम देशों में ऐसी विविधता देखने को मिलती है.
  3. IANS: जब आप भारत आए थे, तब भारत-अमेरिका संबंधों की स्थिति को लेकर कुछ चिंताएं थीं. आज आप इन रिश्तों को कैसे देखते हैं?
    एम्बेसडर गोर: मुझे लगता है कि हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं और इस रिश्ते को मजबूत बनाने में राष्ट्रपति (डोनाल्ड ट्रंप) और प्रधानमंत्री (नरेंद्र मोदी) के बीच के संबंधों की बड़ी भूमिका है. यह रिश्ता हमेशा मजबूत रहा है. कभी-कभी मीडिया इसे ऐसे दिखाता है जैसे कोई समस्या हो गई हो, जबकि राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री बहुत अच्छे दोस्त हैं. उनकी दोस्ती बरसों पुरानी है और आगे भी बनी रहेगी. जब भी वे बात करते हैं, तो अच्छे नतीजे निकलते हैं. यहां आने के बाद से ही मेरा मकसद यह रहा है कि दोनों पक्ष नियमित रूप से बातचीत करते रहें और आगे बढ़ते रहें. हम दोनों देशों के लिए ऐसे फायदेमंद मौकों (win-win situations) की पहचान कर पा रहे हैं.
  4. IANS: जब फ्रांस में प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात हुई, तब आप वहां मौजूद थे. क्या आप हमें उस मुलाकात के बारे में कुछ बता सकते हैं?
    एम्बेसडर गोर: हां, मैं वहां था. हमारी मुलाकात बहुत शानदार रही. माहौल बहुत अच्छा था और वे एक घंटे से ज्यादा समय तक साथ रहे. उन्होंने कई मुद्दों पर बात की, जिनमें व्यापार और कुछ रक्षा से जुड़े मामले भी शामिल थे. यह मुलाकात बहुत कामयाब रही. हम कई मुद्दे उठा पाए और उम्मीद है कि आने वाले कुछ हफ्तों में उनमें से कुछ चीजों की घोषणा की जाएगी.
  5. IANS: आपने कहा है कि भारत-अमेरिका व्यापार समझौता आने वाले हफ्तों या महीनों में फाइनल हो सकता है. हाल ही में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि की भारत यात्रा के बाद, अब कौन सी चुनौतियां बची हैं?
    एम्बेसडर गोर: ज्यादातर काम तो समझौते की भाषा (शब्दावली) तय करने का है, है ना? तो, मैं 48 घंटे पहले दिल्ली में एम्बेसडर ग्रीर (यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव एंबेसडर जेमिसन ग्रीर) के साथ उन बैठकों में शामिल था और हमने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात की, जो मेरे बहुत अच्छे दोस्त हैं. हमारी मुलाकात बहुत कामयाब रही. कुछ ही मुद्दे बचे हैं. अब ज्यादातर काम उस भाषा पर है जिस पर आखिरकार दोनों पक्ष हस्ताक्षर करेंगे. इसलिए, हमें भरोसा है कि आने वाले कुछ हफ्तों या महीनों में यह काम पूरा हो जाएगा. देखिए, अगर सही नजरिए से देखें तो हम इस डील पर डेढ़ साल से काम कर रहे हैं. यूरोपियन यूनियन के साथ डील, जो अभी तक पूरी नहीं हुई है, उस पर 20 साल से काम चल रहा है. हर कोई पूछता है, 'इसमें इतना समय क्यों लग रहा है?' हम इसे पूरा करने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
  6. IANS: समझौता पक्का होने के बाद दोनों देशों को क्या उम्मीद करनी चाहिए?
    एम्बेसडर गोर: मैं बहुत ज्यादा जानकारी नहीं देना चाहता. आपको इंतजार करना होगा और देखना होगा, लेकिन दोनों पक्ष खुश होंगे. असल में, यह ऐसी ही चीजों में से एक है. जब कोई आम सहमति बनती है और हम ऐसी चीजों की पहचान कर पाते हैं जो दोनों पक्षों के लिए अच्छी हों, तभी डील होती है.
  7. IANS: राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत आने की बात कही है, क्या इस दौरे के लिए कोई समय-सीमा तय है?
    एम्बेसडर गोर: मेरे पास अभी सटीक तारीखें नहीं हैं, लेकिन मैं अभी-अभी राष्ट्रपति से मिलकर आ रहा हूं; मैं ओवल ऑफिस में कई घंटों तक उनके साथ था, जो शायद यहां से 20 मीटर की दूरी पर है जहां हम और आप बैठे हैं. और राष्ट्रपति ने जिन चीजों के बारे में पूछा, उनमें से एक यह थी कि मैं कब आ रहा हूं? तो, वह आने के लिए बहुत उत्सुक हैं. प्रधानमंत्री ने उन्हें आमंत्रित किया है, और इसलिए मुझे लगता है कि ऐसा कभी न कभी जरूर होगा.
  8. IANS: क्या आपको उम्मीद है कि यह दौरा इस साल होगा या अगले साल?
    एम्बेसडर गोर: मैं अभी आपको तारीखें नहीं बता सकता. जैसा कि आप जानते हैं, यहां अमेरिका में मध्यावधि चुनाव (midterm elections) होने वाले हैं. इसलिए राष्ट्रपति का शेड्यूल बहुत व्यस्त है और वे देश के भीतर यात्राओं पर ध्यान दे रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद, भारत उन जगहों की सूची में सबसे ऊपर है जहां वे जल्द ही दौरा करेंगे.
  9. IANS: भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काम को करीब से देखने के बाद, उनकी लीडरशिप के बारे में आपकी क्या राय है?
    एम्बेसडर गोर: वे बहुत ही डायनामिक हैं, हर काम में खुद शामिल रहते हैं और नतीजों पर ध्यान देते हैं. एक तरह से, मुझे उनमें और राष्ट्रपति ट्रंप में काफी समानताएं दिखती हैं क्योंकि दोनों ही काम में खुद शामिल रहना और चीजों को तेजी से पूरा करना पसंद करते हैं. प्रधानमंत्री जब कोई काम करना चाहते हैं, तो उस पर तुरंत आगे बढ़ते हैं. राष्ट्रपति भी ऐसे ही हैं. तो कुल मिलाकर, मुझे लगता है कि उनके रिश्ते की एक मुख्य बात यह है कि वे एक जैसा सोचते हैं. वे नतीजे देना चाहते हैं, और मुझे लगता है कि यह दोनों पक्षों के लिए बहुत अच्छी बात है.
  10. IANS: इस इंटरव्यू से ठीक पहले आप राष्ट्रपति ट्रंप से मिले. भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर उनका क्या नजरिया है?
    एम्बेसडर गोर: राष्ट्रपति भारत को लेकर बहुत सकारात्मक हैं. आपने पिछले हफ्ते भी सुना होगा, जब हम प्रधानमंत्री के साथ फ्रांस में थे, तब उन्होंने भारत की बहुत तारीफ की थी. भारत के साथ हमारे संबंध बहुत गहरे और पुराने हैं. राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और भारत का बहुत सम्मान करते हैं. उन्होंने हमेशा प्रधानमंत्री को अपना अच्छा दोस्त बताया है और वे अक्सर मुझे भारत की अपनी पहली यात्रा और वहां देखी गई जीवंतता के बारे में याद दिलाते हैं. यह ऐसी बात है जिसे वे कभी नहीं भूले हैं.
  11. IANS: भारत-अमेरिका पार्टनरशिप के भविष्य के लिए आपका क्या विजन है?
    एम्बेसडर गोर: देखिए, मेरा मानना ​​है कि अगर हम उन ठोस चीजों पर नजर डालें जिन पर हम मिलकर काम कर सकते हैं - जैसे IT या डेटा सेंटर - तो दोनों तरफ बहुत जबरदस्त काम हो रहा है, है ना? जैसे, इस हफ्ते Amazon ने भारत में 40 अरब डॉलर से ज्यादा की डील का ऐलान किया. Microsoft हो या Google, हर कोई वहां जा रहा है. साथ ही, कई भारतीय कंपनियां भी अमेरिका आ रही हैं. तो, जहां तक हमारी कमर्शियल डिप्लोमेसी की बात है, हम अभी बहुत अच्छी स्थिति में हैं. दुनिया भर में सभी एम्बेसी अमेरिका में इन्वेस्टमेंट लाने के लिए होड़ करती हैं. हमें बहुत गर्व है कि भारत में हमारी एम्बेसी पहले नंबर पर रही. आप जानते हैं, कुछ एम्बेसी 300 मिलियन या 500 मिलियन का ऐलान करती हैं. हमने एक साल में 20 अरब डॉलर से ज्यादा के नए इन्वेस्टमेंट का ऐलान किया, जिसमें हमारी एम्बेसी शामिल थी. तो इन चीजों को और ऊंचे स्तर पर ले जाने के लिए हमारे पास अपार संभावनाएं हैं.
  12. IANS: लोगों के बीच आपसी संबंध हमेशा से भारत-अमेरिका रिश्तों का एक मजबूत आधार रहे हैं. आप इन संबंधों को कैसे विकसित होते हुए देखते हैं?
    एम्बेसडर गोर: बिल्कुल. मुझे लगता है कि यह लंबे समय से चला आ रहा है. यह सिलसिला जारी है... चाहे लोग भारत यात्रा कर रहे हों या यहां आ रहे हों, यह बहुत अच्छी बात है. लोग अमेरिकी संस्कृति को पसंद करते हैं और अमेरिकी भारतीय संस्कृति को पसंद करते हैं.
  13. IANS: H-1B वीजा और अमेरिका में नफरत से प्रेरित अपराधों (हेट क्राइम्स) के बढ़ने की खबरों को लेकर चिंताएं रही हैं. आप इन चिंताओं पर क्या कहेंगे?
    एम्बेसडर गोर: यह भारत को निशाना बनाकर नहीं किया गया है. असल में, अमेरिका में हमें पूरे इमिग्रेशन सिस्टम (प्रवास प्रणाली) पर ध्यान देना पड़ा. हर तरह के वीजा पर. दुर्भाग्य से, पिछली सरकारों के समय हमारी सीमाएं पूरी तरह खुली हुई थीं. राष्ट्रपति इसे पहले ही दिन से ठीक करना चाहते थे. असल में, प्रधानमंत्री भी इस बात से सहमत हैं. जब मैं प्रधानमंत्री को भारत में बोलते हुए सुनता हूं, तो वे अवैध प्रवासियों के भारत में होने पर सवाल उठाते हैं. हम इससे 100 प्रतिशत सहमत हैं. इसलिए, इनमें से कोई भी चीज जरूरी नहीं कि भारत को निशाना बनाकर की गई हो. यह उन चीजों में से एक है जिन पर हमें ध्यान देने की जरूरत थी; हम जानना चाहते हैं कि दुनिया भर से यहां कौन आ रहा है. बेशक, भारत की आबादी बहुत बड़ी है, इसलिए आप पर इसका असर पड़ता है, लेकिन चीजें चलती रहती हैं. मैं आपको बता दूं: जैसा कि आप जानते हैं, वीजा के मामले में हमारी एम्बेसी दुनिया की सबसे व्यस्त एम्बेसी में से एक है. इसलिए, लोगों के बीच आपसी संबंध बने रहेंगे, व्यापार और वाणिज्य जारी रहेगा. भारत दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका को ज्यादा निर्यात करता है. भारत दुनिया के किसी भी अन्य देश की तुलना में अमेरिका के साथ ज्यादा रक्षा अभ्यास करता है. तो, हमारे बीच बहुत कुछ शानदार हो रहा है, और हम इसे आगे भी बढ़ाते रहेंगे.
  14. IANS: भारत की ऊर्जा जरूरतें बहुत ज़्यादा हैं और पश्चिम एशिया में हाल की घटनाओं ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट पर असर डाला है. आप ऊर्जा के क्षेत्र में भारत-अमेरिका सहयोग को कैसे देखते हैं?
    एम्बेसडर गोर: मुझे लगता है कि हमने अमेरिका से आने वाली ऊर्जा में जबरदस्त बढ़ोतरी देखी है. और भारत के लिए यह अच्छी बात है. आप चाहते हैं कि आपके पास अलग-अलग स्रोत हों. आपकी सारी ऊर्जा आपूर्ति एक ही जगह से नहीं आनी चाहिए. और इसलिए, हम निश्चित रूप से इसका स्वागत करते हैं. दुर्भाग्य से, जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को बंद करने का फैसला किया, जो एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है, तो पूरी दुनिया पर इसका असर पड़ा. इसलिए हर देश के लिए अलग-अलग स्रोत होना अच्छी बात है.
  15. IANS: नई दिल्ली में अमेरिकी स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान, राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा था, 'मुझसे कुछ भी पूछो, मैं तुम्हें दूंगा'... क्या तब से भारत ने अमेरिका से कोई खास अनुरोध किया है?
    एम्बेसडर गोर: हां, ऐसी चीजें हैं जिनके बारे में भारत ने पूछा है. उनमें से कुछ सार्वजनिक नहीं हैं, लेकिन मुझे लगता है कि मैं उनके बारे में उत्साहित हूं क्योंकि हम वास्तव में भारत के साथ काम करना चाहते हैं. हम भारत के साथ बहुत कुछ करते हैं; हम ऐसा करना जारी रखेंगे, और यह सब भरोसे पर टिका है. अमेरिका भारत पर भरोसा करता है; राष्ट्रपति ट्रंप प्रधानमंत्री मोदी पर भरोसा करते हैं. ऐसी बहुत सी चीजें हैं जो हम मिलकर कर सकते हैं, और हम उन्हें आगे बढ़ाना जारी रखेंगे. यह हर जगह है. मेरा मतलब है, आप देख सकते हैं कि चाहे वह पैक्स सिलिका (Pax Silica) हो या AI... इनमें से कुछ सार्वजनिक हैं और मैं आपको कोई गुप्त जानकारी नहीं दे रहा हूं. लेकिन, आप भारतीय समाचार देख सकते हैं; इस हफ्ते भारतीय प्रतिनिधिमंडल यहां हैं, जो इनमें से कुछ मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं.
  16. IANS: जाते-जाते, क्या आप कुछ आखिरी बातें बताना चाहेंगे?
    एम्बेसडर गोर: छह महीने बहुत तेजी से बीत गए. सच में, ये छह महीने बहुत शानदार रहे. मैं नतीजों पर ध्यान देने वाला इंसान हूं; हम नतीजे चाहते थे और काम को आगे बढ़ाना चाहते थे, चाहे वो 'पैक्स सिलिका' हो, ट्रेड डील को अंतिम रूप देना हो या डिफेंस सहयोग बढ़ाना हो. हर हफ्ते, मैं अपनी टीम को बताता हूं कि हमें उस हफ्ते क्या हासिल करना है और उसे पूरा करना है. तो, मैं इसी तरह आगे भी काम करता रहूंगा, और अगले हफ्ते भारत लौटने का बेसब्री से इंतजार कर रहा हूं.
  17. IANS: व्हाइट हाउस में कई लोग आपको हाल के समय के सबसे प्रभावशाली अमेरिकी राजदूतों में से एक मानते हैं. इस पर आप क्या कहेंगे?
    एम्बेसडर गोर: मैं सुनता हूं; ये बहुत अच्छी बातें हैं. मैं बस इतना कहूंगा कि मैं अपनी पूरी कोशिश कर रहा हूं. मुझे इस रिश्ते की परवाह है, मैं भारत में रहना चाहता हूं और हमारे पास यहां एक शानदार राष्ट्रपति हैं जो बहुत खुले विचारों वाले और बात सुनने वाले हैं, और इससे मेरा काम आसान हो जाता है. बहुत-बहुत धन्यवाद.

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