
दिल्ली एंटी करप्शन ब्रांच ने एक बड़े फर्जी फार्मेसी पंजीकरण रैकेट का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में पूर्व रजिस्ट्रार और क्लर्क सहित कुल 47 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. जांच में पता चला है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर हजारों फार्मासिस्टों का अवैध पंजीकरण किया गया था.
इसके अलावा, बिना उचित टेंडर प्रक्रिया के VMC नामक निजी फर्म को ऑनलाइन पंजीकरण काम सौंपा गया था. इस घोटाले में कई दलाल, कॉलेज कर्मचारी और प्रिंटिंग शॉप मालिक शामिल थे, जो फर्जी डिप्लोमा और प्रमाण पत्र तैयार कर अवैध रूप से पंजीकरण कराते थे.
जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए
- फर्जी प्रमाण पत्रों की प्रिंटिंग: दिल्ली के शाहबाद निवासी नीरज फर्जी प्रमाण पत्रों की प्रिंटिंग करता था, जांच में उसके कंप्यूटर से कई फर्जी दस्तावेज मिले
- फर्जी ईमेल आईडी का उपयोग: फर्जी ईमेल आईडी से प्रमाणपत्रों की पुष्टि कराई गई
- रिश्वत लेने के आरोप: पूर्व रजिस्ट्रार कुलदीप सिंह पर दलाल संजय के जरिए रिश्वत लेने के आरोप हैं
- फर्जी पंजीकरण की बड़ी संख्या: कुल 4928 फर्जी पंजीकरण हुए हैं, जो एक बड़े पैमाने पर चल रहे रैकेट को दर्शाता है
गिरफ्तार किए गए मुख्य आरोपी
• कुलदीप सिंह (पूर्व रजिस्ट्रार, दिल्ली फार्मेसी काउंसिल)
• मुकेश कुमार शर्मा (क्लर्क, दिल्ली फार्मेसी काउंसिल)
• संजय कुमार (मुख्य दलाल)
• धर्मेंद्र, अजय सैनी, जय किशोर पोद्दार, नीरज, अजय कुमार (सब-टाउट)
• नीरज (प्रिंटिंग शॉप मालिक)
• गुरुशरण, हरिओम, ज़फर हयात (फार्मेसी कॉलेज कर्मचारी)
• 35 अवैध फार्मासिस्ट/केमिस्ट गिरफ्तार (सूची संलग्न)
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