- ऑडिट में सबसे अहम चिंता BHMS को लेकर सामने आई है.
- कई सेंसर खराब मिले, कुछ गायब थे और कुछ पैसिव मोड में थे.
- ऑडिट में ब्रिज की नदी की तरफ वाली नींव के आसपास सुरक्षा में कटाव और खराबी का भी जिक्र किया गया है.
नई दिल्ली: दिल्ली के सिग्नेचर ब्रिज को लेकर एक बड़ा खुलासा हुआ है. जुलाई 2026 में हुए ऑडिट में ब्रिज के कई हिस्सों में रखरखाव से जुड़ी खामियां सामने आई हैं. इनमें खराब और गायब सेंसर, स्टील के कुछ हिस्सों में जंग और नदी की तरफ बनी नींव की सुरक्षा में खराबी शामिल है. ऑडिट के बाद दिल्ली का लोक निर्माण विभाग (PWD) ब्रिज के रखरखाव और जरूरी सुधार के लिए योजना तैयार कर रहा है. ऑडिट में ब्रिज के कई अहम हिस्सों की जांच की गई. इनमें नींव, स्टील डेक, 154 मीटर ऊंचा पायलन, स्टे केबल, बेयरिंग, एक्सपेंशन जॉइंट, एप्रोच स्ट्रक्चर, स्काईवॉक रैंप और ब्रिज हेल्थ मॉनिटरिंग सिस्टम यानी BHMS शामिल हैं.
सेंसर सिस्टम काफी हद तक खराब
ऑडिट में सबसे अहम चिंता BHMS को लेकर सामने आई है. यह सेंसर और सॉफ्टवेयर की मदद से ब्रिज की स्थिति पर नजर रखने वाला सिस्टम है. दिल्ली सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, यह सिस्टम काफी हद तक काम नहीं कर रहा था. कई सेंसर खराब मिले, कुछ गायब थे और कुछ पैसिव मोड में थे. अब इस सिस्टम को दुरुस्त करने की योजना बनाई गई है. इसके तहत ब्रिज के तापमान, दबाव, हवा, हलचल, झुकाव, जंग, ट्रैफिक और उस पर पड़ने वाले दबाव की निगरानी के लिए सेंसर लगाए जाएंगे. इसके साथ ही नया डेटा सिस्टम और कंट्रोल रूम बनाने का भी प्रस्ताव है.
नींव के आसपास भी मिली खराबी
ऑडिट में ब्रिज की नदी की तरफ वाली नींव के आसपास सुरक्षा में कटाव और खराबी का भी जिक्र किया गया है. हालांकि, पानी के नीचे और जमीन के भीतर मौजूद हिस्सों की पूरी जांच नहीं हो सकी. पानी के बहाव और सुरक्षा कारणों से इन हिस्सों तक पहुंचना मुश्किल था. ऐसे में रिपोर्ट में इन हिस्सों की विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है. जरूरत पड़ने पर मलबा और गाद हटाई जाएगी, खराब सुरक्षात्मक कंक्रीट को ठीक किया जाएगा और कटाव रोकने के लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी.
स्काईवॉक के स्टील में गंभीर जंग
सिग्नेचर ब्रिज के स्काईवॉक रैंप का स्टीलवर्क भी ऑडिट में चिंता का विषय बना है. जांच में गंभीर जंग, स्टील की सतह पर परतें निकलने और सुरक्षात्मक कोटिंग खराब होने की बात सामने आई है.जोड़ों, स्प्लाइस और फास्टनर्स में भी जंग मिली है. प्रभावित हिस्सों की विस्तृत जांच के बाद जरूरी सुधार और मरम्मत की जाएगी. रिपोर्ट में स्टील डेक में जंग, पायलन की कोटिंग खराब होने, स्टे केबल के एंकरिंग हिस्सों की सुरक्षा, वैक्स लीकेज, एक्सपेंशन जॉइंट की सफाई, ड्रेनेज के रखरखाव और कुछ पेंडुलम बेयरिंग में कमियों का भी जिक्र किया गया है.
छिपी खामियों से भी इनकार नहीं
रिपोर्ट में यह भी साफ किया गया है कि मौजूदा जांच मुख्य रूप से विजुअल इंस्पेक्शन पर आधारित थी. यानी ब्रिज के अंदरूनी या ऐसे हिस्सों में मौजूद खामियों से इनकार नहीं किया जा सकता, जहां जांच टीम की पहुंच नहीं हो सकी.रिपोर्ट में कहा गया है कि जरूरत पड़ने पर किसी भी बड़े काम से पहले इन हिस्सों की विशेष जांच और टेस्ट किए जाएंगे. PWD मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि ब्रिज को कुछ महीने पहले ही विभाग को सौंपा गया है और अब इसके रखरखाव से जुड़ी जरूरतों पर काम किया जा रहा है. उन्होंने कहा, “ब्रिज का हर हिस्सा सुरक्षित, मजबूत और सही तरीके से मेंटेन रहना चाहिए. हम रखरखाव में पहले रही कमियों को भविष्य के लिए जोखिम नहीं बनने देंगे.”
रिपोर्ट में हर महीने सामान्य निरीक्षण और हर छह महीने में विस्तृत जांच की सिफारिश की गई है. इसके अलावा अत्यधिक बारिश, बाढ़, हादसे या किसी ऐसी घटना के बाद विशेष जांच का सुझाव दिया गया है, जिससे ब्रिज की संरचना प्रभावित हो सकती है.ब्रिज के रखरखाव और जरूरी सुधार के लिए पांच साल की एक योजना भी प्रस्तावित की गई है.
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