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This Article is From Sep 18, 2017

रयान स्‍कूल में बच्‍चे की हत्‍या का मामला: गुरुग्राम में ही होगी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने कहा किसी भी बार एसोसिएशन का ये अधिकार नहीं कि वो इस तरह का कोई प्रस्ताव पास करे कि आरोपी के लिए कोई वकील पेश नहीं होगा.

रयान स्‍कूल में बच्‍चे की हत्‍या का मामला: गुरुग्राम में ही होगी आरोपियों के खिलाफ सुनवाई
भारतीय सुप्रीम कोर्ट (फाइल फोटो)
नई दिल्‍ली: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुग्राम स्थित रयान इंटरनेशनल स्कूल में एक छात्र प्रद्युम्‍न की हत्या के मामले में वकीलों द्वारा आरोपियों का प्रतिनिधित्व करने के रास्ते में आ रही बाधा दूर करते हुये वकीलों के संगठन को निर्देश दिया कि वे निचली अदालत में चल रही कार्यवाही में किसी भी प्रकार का व्यवधान नहीं डालें. प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड़ की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इस मामले में गिरफ्तार रयान समूह के एक वरिष्ठ अधिकारी फ्रांसिस थॉमस की याचिका पर सुनवाई के दौरान टिप्पणी की कि गुरुग्राम जिला बार एसोसिएशन ने इस मामले में वकीलों द्वारा आरोपियों का प्रतिनिधित्व नहीं करने के लिये पारित प्रस्ताव ‘पूरी तरह गलत था’ और इसे वापस ले लिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि किसी भी आरोपी का अधिकार है कि उसके लिए कोई वक़ील अदालत में पेश हो. सुप्रीम कोर्ट ने कहा किसी भी बार एसोसिएशन का ये अधिकार नहीं कि वो इस तरह का कोई प्रस्ताव पास करे कि आरोपी के लिए कोई वकील पेश नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने गुड़गांव बार एसोसशन को कहा कि वो इस बात का ध्‍यान रखेंगे कि आरोपी की तरफ से कोई वकील या परिवार वाला अदालत में आता है तो उसमें कोई व्यावधान पैदा नहीं करेगा. मामले की सुनवाई के दौरान गुरुग्राम बार एसोसशन ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि हमनें वह प्रस्ताव वापस ले लिया है जिसमें कहा गया था कि कोई भी वकील आरोपी की तरफ से पेश नहीं होगा.

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गौरतलब है कि फ्रांसिस थॉमस ने याचिका दाखिल कर पूरे मामले की सुनवाई हरियाणा से बाहर दिल्ली में करने की मांग की थी. छात्र की हत्या के मामले में फ्रांसिस थॉमस को पुलिस ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत गिरफ़्तार किया है. उनपर बच्चे की सुरक्षा को लेकर लापरवाही के तहत जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है.

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फ्रांसिस थॉमस ने अपनी याचिका में कहा है कि गुड़गांव और सोहना बार एसोसिएशन ने कहा है कि मामले में आरोपियों की तरफ से कोई भी वकील केस नहीं लड़ेगा. अगर कोई वक़ील केस नही लड़ेगा तो ये फ्री एंड फेयर ट्रायल के अधिकार का उल्लंघन होगा. फ्रांसिस थॉमस ने अपनी याचिका में कहा था कि कस्टडी में उनके वकीलों को भी उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा है.
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