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This Article is From Nov 05, 2025

ऐसे रची न्यूक्लियर रहस्य बेचने की साजिश... पकड़े गए ISI जासूसों की एक और करतूत का खुलासा

दोनों ISI जासूसों ने मुंबई स्थित ईरानी डिप्लोमैट को खुद तो BARC के वरिष्ठ वैज्ञानिक बताकर झांसा दिया. डिप्लोमैट को जब उन्होंने फर्जी क्रेडेंशियल्स, चार्ट्स और रिएक्टर ब्लूप्रिंट दिखाए, तो वह उनके झांसे में आ गया और उन्हें ईरान के सरकारी न्यूक्लियर रिसर्च कंसोर्टियम से मिलवा दिया.

ऐसे रची न्यूक्लियर रहस्य बेचने की साजिश... पकड़े गए ISI जासूसों की एक और करतूत का खुलासा
फर्जी BARC वैज्ञानिक मामले में बड़ा खुलासा.
  • फर्जी BARC वैज्ञानिकों द्वारा न्यूक्लियर रहस्य अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचने की साजिश का खुलासा हुआ है.
  • आरोपियों ने VPN और एन्क्रिप्टेड नेटवर्क के जरिए लिथियम-6 फ्यूज़न रिएक्टर के ब्लूप्रिंट ईरान के साथ साझा किए.
  • दोनों भाइयों ने मार्च-अप्रैल 2025 में तेहरान की यात्रा की. उन्होंने ईरान के अधिकारियों को झांसे में लिया था.
मुंबई:

मुंबई क्राइम ब्रांच द्वारा पकड़े गए फर्जी BARC (भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर) वैज्ञानिकों मामले में एक हर दिन नए-नए खुलासे हो रहे हैं. अब पता चला है कि दोनों ISI एजेंट अख्तर हुसैनी कुतुबुद्दीन अहमद और आदिल हुसैनी  न्यूक्लियर रहस्य बेचने की साजिश रच रहे थे. वे VPN और एन्क्रिप्टेड नेटवर्क का इस्तेमाल करके, लिथियम-6 फ्यूज़न रिएक्टर के कथित डिज़ाइन और ब्लूप्रिंट को अंतरराष्ट्रीय ग्रे मार्केट में बेचने की कोशिश कर रहे थे.पूछताछ में ये भी पता चला है कि दोनों भाइयों ने इस तकनीक का कुछ हिस्सा ईरान से जुड़े न्यूक्लियर पैनल्स के साथ साझा किया था.

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तो इसलिए तेहरान गए थे दोनों जासूस

अख्तर हुसैनी और आदिल हुसैनी ईरानी दूतावासों के अधिकारियों से मिले थे. उन्होंने मार्च-अप्रैल 2025 में तेहरान की यात्रा भी की थी. आरोपियों ने ईरान में लिथियम-6 बेस्ड फ्यूज़न रिएक्टर प्रोटोटाइप बनाने का झूठा दावा किया था, जिसे सुरक्षा एजेंसियों के वैज्ञानिकों ने मनगढ़ंत और बिना प्रयोगात्मक प्रमाण वाला बताया. दोनों ने सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित करने के लिए जटिल वैज्ञानिक शब्दावली का जाल बुना था.

बताया जा रहा है कि मुंबई स्थित ईरानी डिप्लोमैट को उन्होंने खुद तो BARC के वरिष्ठ वैज्ञानिक बताकर झांसा दिया. डिप्लोमैट को जब उन्होंने फर्जी क्रेडेंशियल्स, चार्ट्स और रिएक्टर ब्लूप्रिंट दिखाए, तो वह उनके झांसे में आ गया और उन्हें ईरान के सरकारी न्यूक्लियर रिसर्च कंसोर्टियम से मिलवाया.वहीं दोनों ने अपने “रिएक्टर प्रोटोटाइप” का दावा पेश किया.

'फ्यूज़न ब्रेकथ्रू' का झूठा दावा

दोनों ने ईरान में दावा किया कि उन्होंने लिथियम-6 बेस्ड फ्यूज़न रिएक्टर प्रोटोटाइप तैयार कर लिया है, एक ऐसी मशीन जो खुद प्लाज़्मा का तापमान और वॉल प्रेशर कंट्रोल कर सकती है.उन्होंने बताया कि यह ट्रिटियम ब्रीडिंग और न्यूट्रॉन एब्ज़ॉर्प्शन तकनीक पर आधारित है, जिससे ड्यूटेरियम-ट्रिटियम फ्यूज़न रिएक्शन लगातार चलता रहता है.

लेकिन जांच एजेंसियों के वैज्ञानिकों ने इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया. उनका कहना है कि दुनिया में अभी कोई भी प्रयोगशाला ऐसी तकनीक विकसित नहीं कर पाई है, और जो डिजाइन आरोपी बता रहे थे, वह सिर्फ थ्योरी पर आधारित और बिना किसी प्रयोगात्मक प्रमाण के था.

'लिथियम-7' वाला दूसरा झांसा

दोनों आरोपियों ने यह भी कहा कि उन्होंने लिथियम-7 पर आधारित रिएक्टर का ट्रायल किया था, जो “प्लाज़्मा हीटिंग फेल्योर” की वजह से असफल रहा. दरअसल, वैज्ञानिकों के मुताबिक लिथियम-7 में न्यूट्रॉन सोखने की क्षमता कम होती है, इसलिए वह फ्यूज़न के लिए उपयुक्त नहीं है.यह दावा भी पूरी तरह मनगढ़ंत पाया गया

संवेदनशील परमाणु जानकारी लीक करने का आरोप

 इससे पहले जांच एजेंसियों ने दावा किया था कि खुद को BARC वैज्ञानिक बताने वाले दोनों भाइयों ने संवेदनशील परमाणु जानकारी के बदले विदेशों से करोड़ों रुपये की फंडिंग ली थी. शक ये भी था कि ये रकम BARC और दूसरे न्यूक्लियर प्लांट्स से जुड़ी गुप्त ब्लूप्रिंट्स देने के बदले में उनको दी गई थी. इसके साथ ही फर्जी पासपोर्ट समेत अन्य जानकारियां भी सामने आई थीं. 

दिल्ली-मुंबई से ISI जासूस हुए थे गिरफ्तार

पुलिस ने आदिल को दिल्ली से वहीं अख्तर को मुंबई के यारी रोड, वर्सोवा इलाके से गिरफ्तार किया था. अख्तर के पास से पुलिस को कई फर्जी पासपोर्ट, आधार कार्ड, पैन कार्ड और BARC का नकली आईडी कार्ड मिला था. इस आईडी कार्ड पर  अली रज़ा हुसैन लिखा हुआ था. 
 

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