- ईडी ने गाजियाबाद की कंपनी से जुड़े ठिकानों पर विदेशी फंडिंग जांच में छापेमारी की
- कंपनी को विदेशी संस्थाओं से छह करोड़ रुपये से अधिक कंसल्टेंसी चार्ज के नाम पर फंडिंग मिली, जो संदिग्ध पाई गई
- जांच में पाया गया कि फंडिंग का उद्देश्य भारत में जीवाश्म ईंधन उत्पादन को रोकने वाले प्रस्ताव को बढ़ावा देना था
ईडी ने FEMAके तहत कार्रवाई करते हुए गाजियाबाद की एक कंपनी से जुड़े दिल्ली-एनसीआर के कई ठिकानों पर छापेमारी की है. यह कार्रवाई 5 जनवरी 2026 को की गई. जांच के दायरे में आई कंपनी का नाम है सतत संपदा प्राइवेट लिमिटेड (SSPL), जिसे पति-पत्नी हरजीत सिंह और ज्योति अवस्थी चला रहे हैं.
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कंपनी को मिली 6 करोड़ से ज्यादा की विदेशी फंडिंग
ईडी की जांच में सामने आया है कि साल 2021 से 2025 के बीच कंपनी को 6 करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी फंडिंग मिली. यह पैसा विदेश से कंसल्टेंसी चार्ज के नाम पर भेजा गया था. फंड भेजने वाली विदेशी संस्थाओं में क्लाइमेट एक्शन नेटवर्क (CAN) और STAND.EARTH जैसी संस्थाएं शामिल हैं, जिन्हें आगे चलकर Rockefeller Philanthropy Advisors जैसे बड़े विदेशी एनजीओ से पैसा मिला था.

लेकिन जब ईडी ने विदेश में की गई फाइलिंग और दस्तावेजों की जांच की, तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ. जांच में संकेत मिले कि यह पैसा असल में भारत में Fossil Fuel Non-Proliferation Treaty (FF-NPT) के समर्थन में माहौल बनाने के लिए भेजा गया था.
क्या है FF-NPT और क्यों है विवाद?
FF-NPT एक प्रस्तावित अंतरराष्ट्रीय समझौता है, जिसका मकसद जीवाश्म ईंधन यानी कोयला, तेल और गैस के उत्पादन को धीरे-धीरे खत्म करना बताया जाता है. भले ही इसे जलवायु परिवर्तन से जोड़कर पेश किया जाता हो, लेकिन ईडी का मानना है कि अगर इसे भारत में लागू करने की कोशिश की जाती है, तो इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक विकास को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है. इतना ही नहीं, भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों जैसे इंटरनेशनल कोर्ट ऑफ जस्टिस में कानूनी चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है.

ऑर्गेनिक खेती की आड़ में विदेशी एजेंडा?
कागजों में सतत संपदा प्राइवेट लिमिटेड खुद को एक एग्रो-बेस्ड कंपनी बताती है, जो ऑर्गेनिक खेती और ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स के प्रचार-प्रसार का काम करती है. लेकिन ईडी की जांच में शक है कि यह सब सिर्फ दिखावा था. जांच एजेंसी के मुताबिक, कंपनी का असली काम विदेशी फंडिंग लेकर भारत में FF-NPT से जुड़ा नैरेटिव फैलाना और विदेशी प्रभाव वाले संगठनों के एजेंडे को आगे बढ़ाना था.
फंड आते ही कंपनी कैसे हो गई मुनाफे में?
ईडी को यह भी पता चला है कि साल 2020-21 से पहले कंपनी को लगातार नुकसान हो रहा था और कंसल्टेंसी से नाममात्र की कमाई थी. लेकिन जैसे ही 2021 के बाद विदेशी फंडिंग आनी शुरू हुई, कंपनी अचानक मुनाफे में आ गई. इस विदेशी पैसे को कंपनी ने कंसल्टेंसी सर्विस और एग्रो प्रोडक्ट सेल के नाम पर अपनी कमाई दिखाई. जांच में यह भी सामने आया है कि कंपनी के डायरेक्टर्स हरजीत सिंह और ज्योति अवस्थी ने इस विदेशी फंड का एक हिस्सा अपने निजी खातों में भी ट्रांसफर किया.

छापे के दौरान शराब का जखीरा बरामद
ईडी की टीम ने जब गाजियाबाद में हरजीत सिंह के घर पर तलाशी ली, तो वहां से देशी और विदेशी शराब का बड़ा जखीरा बरामद हुआ, जो तय सीमा से कहीं ज्यादा था. ईडी ने तुरंत इस बारे में उत्तर प्रदेश आबकारी विभाग को सूचना दी. इसके बाद आबकारी विभाग ने अतिरिक्त शराब जब्त कर ली और हरजीत सिंह को यूपी एक्साइज कानून के तहत गिरफ्तार कर लिया.
विदेश यात्राएं भी जांच के घेरे में
ईडी अब कंपनी के डायरेक्टर्स की विदेशी यात्राओं की भी जांच कर रही है. जांच में सामने आया है कि हरजीत सिंह फरवरी 2025 में पाकिस्तान गए थे, जहां उन्होंने ‘Breathe Pakistan Summit' में हिस्सा लिया और कई लोगों से मुलाकात की. दिसंबर 2025 में बांग्लादेश गए, उस वक्त वहां भारत विरोधी प्रदर्शन चल रहे थे. आरोप है कि उन्होंने शेर-ए-बांग्ला यूनिवर्सिटी में बिना किसी आधिकारिक निमंत्रण के एक लेक्चर दिया और कई ऐसे लोगों से मिले, जिनका दौरे के घोषित मकसद से कोई लेना-देना नहीं था.
ईडी अब यह भी जांच कर रही है कि इन विदेशी यात्राओं का खर्च कहां से आया और क्या इसमें भी विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल हुआ. ईडी को शक है कि सतत संपदा प्राइवेट लिमिटेड ने विदेशी फंड के मकसद को गलत तरीके से बताया और FEMA कानून का उल्लंघन किया. एजेंसी यह भी जांच कर रही है कि क्या इन गतिविधियों से राष्ट्रीय हित, खासकर भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई. ईडी के मुताबिक, फंडिंग का पूरा नेटवर्क, विदेशी संस्थाओं की भूमिका और कंपनी के डायरेक्टर्स की गतिविधियों की गहराई से जांच जारी है.
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