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दिल्ली में PG के मनमाने किराए पर लगेगा ब्रेक! कमरा मालिकों को लेना होगा लाइसेंस... GovPG पोर्टल से रखी जाएगी नजर

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार PG के लिए ड्राफ्ट पॉलिसी लाएगी, जिसमें लाइसेंस, GovPG पोर्टल, किराया नियंत्रण, CCTV और सुरक्षा मानक तय होंगे.

दिल्ली में PG के मनमाने किराए पर लगेगा ब्रेक! कमरा मालिकों को लेना होगा लाइसेंस... GovPG पोर्टल से रखी जाएगी नजर
छात्रों के पीजी से संबंधित पॉलिसी पर काम कर रही दिल्ली सरकार. (Photo: IANS)
  • सत्य निकेतन हादसे के बाद एक्शन मोड में आई दिल्ली सरकार.
  • PG रेगुलेशन के लिए नई पॉलिसी लाने की हो रही तैयारी.
  • रेगुलेशन कमेटी एरिया वाइज किराया तय करेगी किराया.
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के सत्य निकेतन में एक पीजी की बिल्डिंग ढहने से शहर में छात्रों के रहने की जगह पर नई चर्चा शुरू हो गई है. प्राइवेट PG पर निर्भर हजारों छात्रों के लिए, इस हादसे ने सुरक्षा, किराए, बुनियादी सुविधाओं और जवाबदेही से जुड़े कई सवाल खड़े कर दिए हैं.  दिल्ली सरकार ने अब राजधानी में PG अकोमोडेशन को रेगुलेट करने के लिए एक ड्राफ्ट पॉलिसी तैयार की है. इस प्रस्तावित पॉलिसी में रजिस्ट्रेशन, सुरक्षा के मानक, किराया, सिक्योरिटी डिपॉजिट, बेदखली और छात्रों की शिकायतों जैसे मुद्दे शामिल होंगे.

दिल्ली सरकार में शहरी विकास मंत्री आशीष सूद ने कहा, "छात्रों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जाएगा. हम दिल्ली भर में कोचिंग संस्थानों और PG को रेगुलेट करने के लिए एक पॉलिसी बनाएंगे. इसमें PG में रहने वाले छात्रों की सुरक्षा पर खास ध्यान दिया जाएगा."

PG की सुरक्षा पर सवाल

सिविक अधिकारियों की जांच के मुताबिक, सत्य निकेतन में जो इमारत गिरी, उसका कोई मंजूरशुदा बिल्डिंग प्लान नहीं था, उसमें एक अनधिकृत बेसमेंट था, कोई फायर NOC नहीं थी और पांचवीं मंजिल भी नियमों के खिलाफ बनी थी.

इस हादसे ने छात्रों के रहने की जगहों से जुड़ी पुरानी घटनाओं की ओर भी लोगों का ध्यान खींचा है.

  • साल 2023 में मुखर्जी नगर में महिलाओं के एक PG में आग लगने के बाद, MCD के एक सर्वे में बिल्डिंग के नियमों का उल्लंघन करने वाले 104 PG यूनिट्स की पहचान की गई थीय
  • जुलाई 2024 में ओल्ड राजेंद्र नगर में एक कोचिंग सेंटर के बेसमेंट में बारिश का पानी भरने से UPSC की तैयारी कर रहे तीन छात्रों की मौत हो गई थी.
  • छात्रों की सुरक्षा और गोपनीयता से जुड़े मामले भी सामने आए हैं. 2024 में शकरपुर में, एक महिला यूपीएससी अभ्यर्थी को कथित तौर पर अपने बाथरूम और बेडरूम में छिपे हुए कैमरे मिले.
आशीष सूद ने कहा कि सरकार पहले से ही इस सेक्टर को रेगुलेट करने पर काम कर रही थी, लेकिन सत्य निकेतन त्रासदी ने इस प्रक्रिया को तेज कर दिया है.

उन्होंने कहा, "हम पहले से ही इस पर काम कर रहे थे लेकिन इस दुखद घटना ने हमें जस्टिस गुप्ता समिति की रिपोर्ट के कार्यान्वयन में तेजी लाने के लिए मजबूर कर दिया है."

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छात्रों को क्या मिलेगा?

  • प्रस्तावित नीति के तहत, पीजी संचालकों को पीजी ऑपरेटिंग लाइसेंस हासिल करना होगा. पुलिस और नगरपालिका वेरिफिकेशन से गुजरना होगा. हर रजिस्टर्ड संपत्ति को एक .
  • रजिस्ट्रेशन नंबर मिलेगा. 
  • एक प्रस्तावित डिजिटल प्लेटफॉर्म, GovPG वेरिफाइड पीजी को लिस्ट करेगा और कब्जा, किराए में बदलाव, जांच की तारीख और नियमों के पालन से जुड़ी जानकारी देगा.
  • इसके जरिए स्टूडेंट्स बिना नाम जाहिर किए शिकायतें भी दर्ज करा सकेंगे. 
  • प्रस्तावित सिस्टम छात्रों को यह फैसला लेने से पहले पीजी के अनुपालन रिकॉर्ड की जांच करने की अनुमति देगा कि उन्हें कहां रहना है.
  • ड्राफ्ट में कड़े सुरक्षा नियमों का भी प्रस्ताव है.
  • एंट्री गेट्स और सामान्य क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे अनिवार्य होंगे, जिनकी फुटेज 30 दिनों तक रखी जाएगी.
  • 15 या इससे ज्यादा छात्रों वाले पीजी को रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच एक लाइसेंस प्राप्त नाइट गार्ड उपलब्ध कराना होगा.
  • विजिटर रजिस्टर रखना भी जरूरी होगा और प्रस्तावित नियमों के तहत बाहरी लोगों (जो वहां नहीं रहते) को सुबह 8 बजे से रात 9 बजे के बीच आने की इजाजत होगी.
  • वार्डन को PG के 500 मीटर के दायरे में रहना होगा या वहां अपना ऑफिस रखना होगा और इमरजेंसी में 15 मिनट के अंदर मौके पर पहुंचना होगा.
आशीष सूद ने कहा, "हम PG को रेगुलेट करेंगे और उनके लिए सुरक्षा के सही मानक तय करेंगे."

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किराए का भी होगा रेगुलेशन...

प्रस्तावित पॉलिसी में छात्रों द्वारा दिए जाने वाले किराए को भी रेगुलेट करने की कोशिश की जाएगी. एक किराया रेगुलेशन कमेटी अलग-अलग इलाकों के लिए किराए की रेंज तय करेगी. यह तय करने के लिए ऑक्यूपेंसी, सुविधाओं, मार्केट रेट और कॉलेजों व ट्रांसपोर्ट से दूरी जैसी बातों को ध्यान में रखा जाएगा.

सिक्योरिटी डिपॉजिट ज्यादा से ज्यादा तीन महीने के किराए के बराबर हो सकता है और छात्र के जाने के 30 दिनों के अंदर इसे वापस करना होगा. PG चलाने वालों को तीन महीने से ज्यादा का किराया एडवांस में मांगने की इजाजत नहीं होगी.

आम तौर पर, किसी छात्र को घर से निकाले जाने से पहले 30 दिन का लिखित नोटिस दिया जाना चाहिए, सिवाय उन मामलों के जिनमें गलत व्यवहार का लिखित सबूत हो. इस ड्राफ्ट में लिंग, जाति, धर्म या मूल राज्य के आधार पर भेदभावपूर्ण कीमत तय करने पर रोक लगाने का भी प्रस्ताव है.

सरकार ने छात्रों से इस बारे में बात करना भी शुरू कर दिया है कि प्राइवेट घरों में रहने के दौरान उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

'स्टूटेंड्स से समस्याएं समझने की कोशिश...'

दिल्ली सरकार में मंत्री आशीष सूद ने कहा, "मैंने अलग-अलग कॉलेजों के कुछ छात्रों को बुलाया, जिससे यह समझ सकूं कि उन्हें किन दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है." उन्होंने आगे कहा, "छात्रों ने हमारे साथ अपनी चिंताएं साझा कीं. जैसे किराया, मिलने वाली सुविधाएं, साइन करने के लिए कहे जाने वाले एग्रीमेंट, उन एग्रीमेंट का पालन, जवाबदेही और अपनी सुरक्षा से जुड़े मुद्दे."

बिजली के खर्चों को लेकर भी शिकायतें की गईं, जिनमें यह आरोप भी शामिल था कि छात्रों से प्रति यूनिट 24 रुपये तक वसूले जा रहे थे. उम्मीद है कि प्रस्तावित ढांचे में पानी, बिजली और दूसरी नागरिक सुविधाओं को भी शामिल किया जाएगा.

इस ड्राफ्ट में एक 'इंस्टीट्यूशनल अकोमोडेशन कमेटी' बनाने का प्रस्ताव है, जिसमें कॉलेज के अधिकारी, छात्र प्रतिनिधि, नगर पालिका के प्रतिनिधि और पुलिस के संपर्क अधिकारी शामिल होंगे.

यह कमेटी हर तीन महीने में जांच करेगी, नियमों का पालन न करने वाले PG को नोटिस जारी करेगी और नियमों के पालन से जुड़ी रिपोर्ट पब्लिश करेगी.

यह छात्रों और PG संचालकों के बीच विवादों को सुलझाने में भी मदद करेगी, जिसके लिए 15 कामकाजी दिनों की समय-सीमा तय करने का प्रस्ताव है.

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ज्यादा हॉस्टल, नए नियम...

सरकार इस समस्या के दूसरे पहलू पर भी ध्यान दे रही है. सरकार की कोशिश है कि छात्रों के रहने के लिए किफायती जगह मिल सके. आशीष सूद ने कहा, "सरकार छात्रों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए हॉस्टल की क्षमता बढ़ाने को तैयार है."

हालांकि, उन्होंने माना कि प्राइवेट आवास की जरूरत बनी रहेगी. मंत्री ने कहा, "दिल्ली में छात्रों के रहने की जगह की भारी मांग को पूरा करने के लिए प्राइवेट प्लेयर्स की जरूरत बनी रहेगी."

सरकार ऐसे समाधानों पर विचार कर रही है, जिन्हें उन्होंने 'आउट-ऑफ-द-बॉक्स सॉल्यूशन' कहा. इसमें नरेला में मौजूद इमारतों का इस्तेमाल करना और बस सेवाएं देना शामिल है. प्रस्तावित पॉलिसी में उन PG ऑपरेटरों के लिए इंसेंटिव भी शामिल हैं, जो नियमों का ठीक से पालन करते हैं.

जो PG लगातार दो साल तक नियमों का पालन करते हैं, वे प्रॉपर्टी-टैक्स में छूट, सुरक्षा अपग्रेड के लिए आसान लोन और 'सर्टिफाइड स्टूडेंट-फ्रेंडली PG' की मान्यता पाने के हकदार हो सकते हैं. उन्हें GovPG और कॉलेज द्वारा सुझाई गई आवास सूचियों में प्राथमिकता वाली लिस्टिंग भी मिल सकती है. 

प्रस्तावित ढांचा अभी कानून नहीं बना है.

सूद ने कहा कि पॉलिसी को अंतिम रूप देने से पहले सरकार छात्रों और अन्य स्टेकहोल्डर्स से सलाह-मशविरा करेगी. उन्होंने कहा, "हम चाहते हैं कि इन सभी चिंताओं को एक ही ढांचे के तहत लाया जाए. शहरी विकास विभाग इसके लिए एक पॉलिसी पर काम करेगा."

सूद ने आगे कहा, "हम इस मामले को आगे बढ़ाएंगे, मुख्यमंत्री और उपराज्यपाल के साथ चर्चा करेंगे, कैबिनेट में विचार-विमर्श करेंगे और बहुत जल्द सभी स्टेकहोल्डर्स से सलाह लेने के बाद एक व्यापक पॉलिसी लेकर आएंगे."

अधिकारियों ने बताया कि करीब 45 दिनों में ड्राफ्ट बिल को लाए जाने की संभावना है.

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