प्रतीकात्मक फोटो
- दिल्ली की वायु गुणवत्ता बेहद खराब स्थित में पहुंची
- बारिश से मिली थी कुछ राहत
- दिल्ली में समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया
दिल्ली:
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हुई बारिश के बाद प्रदूषण से कुछ राहत मिली थी. लेकिन अब खबर है कि दिल्ली की वायु गणवत्ता शुक्रवार को फिर से बिगड़कर ‘अत्यंत खराब' की श्रेणी में पहुंच गई. अधिकारियों ने बताया कि प्रदूषक तत्वों का बिखराव धीमा होने के कारण वायु की गुणवत्ता बिगड़ी. केंद्र संचालित वायु गुणवत्ता एवं मौसम पूर्वानुमान प्रणाली (सफर) के मुताबिक, समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक 315 दर्ज किया गया जो ‘अत्यंत खराब' की श्रेणी में आता है. केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के डेटा के मुताबिक, दिल्ली के 16 इलाकों में वायु गुणवत्ता ‘अत्यंत खराब' दर्ज की गई तथा 22 इलाकों में यह ‘खराब' की श्रेणी में रही. शुक्रवार को शहर में हवा में अति सूक्ष्म कणों -पीएम 2.5 का स्तर 139 दर्ज किया गया जबकि पीएम 10 का स्तर 210 रहा.
बारिश ने दिल्लीवासियों को दी राहत: प्रदूषण का स्तर गिरा, हवा की गुणवत्ता सुधरी
वायु गुणवत्ता सूचकांक में शून्य से 50 अंक तक हवा की गुणवत्ता को ‘‘अच्छा'', 51 से 100 तक ‘‘संतोषजनक'', 101 से 200 तक ‘‘सामान्य'', 201 से 300 के स्तर को ‘‘खराब'', 301 से 400 के स्तर को ‘‘अत्यंत खराब'' और 401 से 500 के स्तर को ‘‘गंभीर'' श्रेणी में रखा जाता है. अधिकारियों ने बताया कि बारिश में प्रदूषक तत्वों के बह जाने से पिछले दो दिनों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार देखा गया. लेकिन बारिश खत्म होते ही शुक्रवार को प्रदूषण स्तर फिर से बढ़ गया. भारतीय उष्णकटिबंधी मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक पिछले 24 घंटों में भारत के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में पराली जलाए जाने की घटनाएं बहुत कम देखी गईं.
दिल्ली में बारिश की फुहारों ने दिलाई प्रदूषण से राहत, अगले दो दिनों में और सुधर सकते हैं हालात
संस्थान ने कहा, “पश्चिमोत्तर भारत में पराली जलाए जाने का दिल्ली पर कोई खास प्रभाव नहीं है.” आईआईटीएम ने कहा,‘‘ दिल्ली-एनसीआर में अगले दो दिन में वायु की गुणवत्ता सुधरने की संभावना है लेकिन यह ‘खराब' और ‘अत्यंत खराब' के बीच रहेगी. उत्तर पश्चिमी भारत में पराली जलाने का प्रभाव दिल्ली में आंशिक है.''
VIDEO: सिंपल समाचार : दिल्ली की हवा में जहर
(इनपुट भाषा से)
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वायु गुणवत्ता सूचकांक में शून्य से 50 अंक तक हवा की गुणवत्ता को ‘‘अच्छा'', 51 से 100 तक ‘‘संतोषजनक'', 101 से 200 तक ‘‘सामान्य'', 201 से 300 के स्तर को ‘‘खराब'', 301 से 400 के स्तर को ‘‘अत्यंत खराब'' और 401 से 500 के स्तर को ‘‘गंभीर'' श्रेणी में रखा जाता है. अधिकारियों ने बताया कि बारिश में प्रदूषक तत्वों के बह जाने से पिछले दो दिनों में दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार देखा गया. लेकिन बारिश खत्म होते ही शुक्रवार को प्रदूषण स्तर फिर से बढ़ गया. भारतीय उष्णकटिबंधी मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के मुताबिक पिछले 24 घंटों में भारत के उत्तर पश्चिमी क्षेत्र में पराली जलाए जाने की घटनाएं बहुत कम देखी गईं.
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संस्थान ने कहा, “पश्चिमोत्तर भारत में पराली जलाए जाने का दिल्ली पर कोई खास प्रभाव नहीं है.” आईआईटीएम ने कहा,‘‘ दिल्ली-एनसीआर में अगले दो दिन में वायु की गुणवत्ता सुधरने की संभावना है लेकिन यह ‘खराब' और ‘अत्यंत खराब' के बीच रहेगी. उत्तर पश्चिमी भारत में पराली जलाने का प्रभाव दिल्ली में आंशिक है.''
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(इनपुट भाषा से)
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