युजवेंद्र चहल ने अपने फर्स्ट-क्लास करियर को अलविदा कह दिया है. इससे भारत के लिए टेस्ट क्रिकेट खेलने का उनका सपना तो खत्म हो गया है, लेकिन व्हाइट-बॉल क्रिकेट में नेशनल टीम में वापसी के रास्ते खुले हैं. 36 साल के इस लेग-स्पिनर ने भारत के लिए 72 वनडे और 80 टी20 मैच खेले हैं, लेकिन वे कभी टेस्ट टीम में जगह बनाने के करीब नहीं पहुंच पाए, क्योंकि भारत के पास रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की शानदार जोड़ी हमेशा मौजूद रही.
चहल ने इंस्टाग्राम पोस्ट में कहा, 'मेरे लिए रेड-बॉल क्रिकेट कभी भी सिर्फ एक और फॉर्मेट नहीं था. इसी फॉर्मेट में मैंने सब्र, चरित्र, मजबूती और घंटों तक मैदान पर डटे रहकर हर रन और हर विकेट के लिए संघर्ष करने की असली खुशी को समझा.'
चहल का फर्स्ट-क्लास करियर
चहल का फर्स्ट-क्लास करियर 2009 में हरियाणा के साथ शुरू हुआ था और उन्होंने 49 मैचों में 32.27 की औसत से 148 विकेट लिए. उन्होंने नॉर्थम्प्टनशायर के साथ काउंटी चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और डिवीज़न टू में 16.14 की औसत से 21 विकेट लिए. उनका आखिरी फर्स्ट-क्लास मैच मिडलसेक्स के खिलाफ़ था, जिसमें मिडलसेक्स ने सात विकेट से जीत हासिल की और नॉर्थम्प्टनशायर के प्रमोशन की उम्मीदों को खत्म कर दिया.
उन्होंने कहा कि, 'मैंने अपना आखिरी फर्स्ट-क्लास मैच लॉर्ड्स में खेला. यह कहते हुए भावुकता महसूस हो रही है क्योंकि टेस्ट कैप पहनना हमेशा से मेरा सपना रहा है, जिसे मैंने कई सालों तक संजोकर रखा था. भले ही यह सपना पूरा नहीं हो सका, लेकिन मैं अपने इस सफर से पूरी तरह संतुष्ट हूं और इस फॉर्मेट में मिले हर मौके के लिए बेहद आभारी हूं,'
व्हाइट-बॉल करियर पर भी दिया अपडेट
इस बीच, हरियाणा के लिए चहल का रेड-बॉल क्रिकेट खेलना बहुत कम हो गया था. रणजी ट्रॉफी में दो से ज्यादा मैचों वाला उनका आखिरी सीजन 2016-17 का था, जब उन्होंने सात मैचों में 22.60 की औसत से 33 विकेट लिए थे. हालांकि, उन्होंने कहा कि उनका व्हाइट-बॉल करियर अभी भी जारी है और अगस्त 2023 में आखिरी बार खेलने के बावजूद उन्हें भारत के लिए फिर से खेलने की उम्मीद है. वह IPL में भी एक अहम खिलाड़ी बने हुए हैं, जहां वह टूर्नामेंट में सबसे ज़्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज हैं और अभी पंजाब किंग्स के लिए खेलते हैं.
चहल ने कहा कि, 'मेरा सफर अभी खत्म नहीं हुआ है. देश के लिए खेलने की भूख अभी भी मुझमें बरकरार है. मुझे यकीन है कि मुझमें अभी भी क्रिकेट बाकी है, और वन-डे और T20 फॉर्मेट में एक और मौका पाने के लिए मैं अपनी पूरी जान लगा दूंगा. उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा, 'मेरे पूरे सफर में लगातार साथ देने, भरोसा और विश्वास बनाए रखने के लिए हरियाणा क्रिकेट एसोसिएशन, श्री रणबीर सिंह महिंद्रा सर और श्री अनिरुद्ध सिंह चौधरी सर का खास तौर पर शुक्रिया. '10 साल की उम्र में पहली बार रेड बॉल थामने से लेकर अपना आखिरी फर्स्ट-क्लास मैच खेलने तक, यह एक जबरदस्त सफर रहा है,'
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