एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने वाली साइखोम मीराबाई चानू गुरुवार दोपहर मणिपुर में अपने घर लौटीं, जहां उनका भावुक स्वागत हुआ. उन्होंने वेटलिफ्टिंग की शुरुआत से लेकर इंटरनेशनल पोडियम तक के सफर में अपनी मां को सबसे मज़बूत सहारा बताया. एशियन गेम्स में मेडल जीतने के बाद इम्फाल इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर चानू का स्वागत उनकी मां और पिता, मणिपुर पुलिस और युवा मामले और खेल (YAS) विभाग के अधिकारियों और शुभचिंतकों ने किया.
अपनी सफलता के पीछे के लोगों के बारे में बात करते हुए, चानू ने इतने सालों तक साथ देने के लिए अपनी मां का खास तौर पर जिक्र किया. चानू ने कहा, 'मेरी मां ने शुरुआत से लेकर आज तक मेरे सफर में मेरा बहुत साथ दिया है.' ओलंपिक मेडल जीतने वाली चानू के लिए घर वापसी का पल बहुत भावुक था, क्योंकि वह लंबे समय से मणिपुर से दूर थीं. उन्होंने कहा,'घर आए हुए मुझे बहुत समय हो गया था. मुझे घर की बहुत याद आ रही थी.'
मेरा और मेरे कोच का सपना पूरा हो गया
चानू ने कहा कि एशियन गेम्स में सिल्वर मेडल जीतने से उनका और उनके कोच का लंबे समय से देखा गया सपना पूरा हुआ. उन्होंने एशियन गेम्स में भारतीय वेटलिफ्टिंग के लिए 28 साल के इंतजार के बाद मेडल लाने की अहमियत पर जोर दिया. उन्होंने कहा, '28 साल बाद मैंने यह सिल्वर मेडल जीता है. यह बहुत खुशी का पल है क्योंकि मेरा और मेरे कोच का सपना आखिरकार पूरा हो गया है.'
ओलंपिक पर मीराबाई की नजर
इस बड़ी कामयाबी का जश्न मनाने के साथ ही, चानू ने संकेत दिया कि उनका ध्यान अब अगले ओलंपिक अभियान की ओर है. उन्होंने कहा कि लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए क्वालिफ़िकेशन प्रक्रिया दिसंबर में शुरू होने की उम्मीद है और उन्होंने खेलों में हिस्सा लेने के लिए पूरी कोशिश करने का संकल्प लिया.
कोच को भी दिया जीत का श्रेय
उन्होंने कहा, 'मैं LA ओलंपिक में हिस्सा लेने की पूरी कोशिश करूंगी.' चानू ने उन कोचों का भी आभार जताया जिन्होंने उन्हें वेटलिफ़्टिंग से परिचित कराया और उनके करियर के अलग-अलग पड़ावों पर उनका मार्गदर्शन किया. उन्होंने अपनी ट्रेनिंग को बेहतर बनाने और बड़े इंटरनेशनल कॉम्पिटिशन की तैयारी में मदद करने के लिए अपने मौजूदा कोच, शर्मा को श्रेय दिया.
उन्होंने विदेश में ट्रेनिंग की सुविधा देने और तैयारी के दौरान मदद करने के लिए वेटलिफ्टिंग फेडरेशन का भी शुक्रिया अदा किया. एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों में मणिपुर पुलिस की SP (स्पोर्ट्स) एल. सरिता देवी भी शामिल थीं. उन्होंने कहा कि चानू का एशियन गेम्स मेडल उस सपने का नतीजा है, जिसके बारे में उन्होंने कई सालों से बात की थी. सरिता ने कहा, 'एशियन गेम्स में मेडल जीतना उनका सपना था. हम सालों से इस बारे में बात कर रहे थे, कॉम्पिटिशन के लिए रवाना होने से पहले भी. इतनी लंबी मेहनत के बाद, आखिरकार उनका सपना सच हो गया है.'
गोल्ड मेडल जीतना था लक्ष्य
उन्होंने कहा कि हालांकि लक्ष्य गोल्ड मेडल जीतना था, लेकिन सिल्वर मेडल भी एक बड़ी उपलब्धि है. खुद एक मशहूर पूर्व इंटरनेशनल बॉक्सर रहीं सरिता ने उन मानसिक चुनौतियों के बारे में भी बात की जिनका सामना टॉप लेवल के एथलीट करते हैं, खासकर चोट लगने और ट्रेनिंग के मुश्किल दौर में. उन्होंने कहा कि ऐसे समय में लगातार हौसला बढ़ाना और इमोशनल सपोर्ट मिलना एथलीटों के लिए बहुत ज़रूरी होता है.
SP (स्पोर्ट्स) ने बताया कि मणिपुर पुलिस के DGP ने उन्हें एयरपोर्ट पर चानू का स्वागत करने के लिए भेजा था. पुलिस विभाग दोपहर बाद वेटलिफ्टर के लिए एक अलग स्वागत समारोह भी आयोजित करने वाला था. YAS विभाग के अधिकारी, जिनकी अगुवाई डायरेक्टर एम. वेटो सिंह कर रहे थे, भी वहां मौजूद थे और उन्होंने गुलदस्ते देकर चानू का स्वागत किया. इस उपलब्धि के बड़े महत्व पर ज़ोर देते हुए सरिता ने कहा कि मणिपुर की महिलाओं ने लगातार नेशनल और इंटरनेशनल स्पोर्ट्स में अपनी पहचान बनाई है. उन्होंने ऐसे सामाजिक माहौल का ज़िक्र किया जहां परिवार बेटियों और बेटों, दोनों को ही अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं.
चानू के लिए, गुरुवार को घर वापसी उनके स्पोर्ट्स सफ़र के दो अहम पहलुओं को एक साथ ले आई. वह परिवार जिसने शुरू से ही उनका साथ दिया और लंबे समय से प्रतीक्षित एशियन गेम्स मेडल. उस सपने को पूरा करने के बाद, अब उनका ध्यान एक और बड़े लक्ष्य पर है.
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