एनडीटीवी और डेटॉल के लोकप्रिय अभियान ‘बनेगा स्वस्थ इंडिया' का 13वां सीजन शुरू हो गया है. शुक्रवार को हुए लॉन्च इवेंट में बॉलीवुड के मशहूर एक्टर और सोशल वर्कर सोनू सूद पहुंचे. यहां उन्होंने बताया है कि वह कैसे लोगों की मदद करते हैं. साथ ही मदद करते वक्त वह क्या-क्या सोचते हैं. सोनू सूद ने यह भी बताया है कि वह किसकी मदद करते हैं और किसकी नहीं, यह फैसला कैसे लेते हैं.
क्या बोले सोनू सूद
सोनू सूद ने कहा, 'इतने सालों में मेरे अंदर जैसे एक एक्स-रे मशीन लग गई है. जैसे ही कोई बात शुरू करता है, मुझे पता चल जाता है कि केस कितना असली है.' उनके घर या ऑफिस के सामने रोज 200-300 लोग पहुंचते हैं. किसी को मेडिकल इमरजेंसी होती है, किसी को पढ़ाई की जरूरत. पिछले छह-सात सालों में पूरे देश में एक नेटवर्क बन गया है. छोटे जिलों में भी अगर किसी को इलाज या पढ़ाई के लिए मदद चाहिए तो फोन पर संपर्क हो जाता है.
कोविड के दौरान सोनू सूद ने साढ़े सात लाख लोगों को घर भेजा था. आज वे सभी उनके वॉलंटियर की तरह काम करते हैं. यूपी के गोंडा या बिहार में किसी को मदद चाहिए तो स्थानीय संपर्क तुरंत जुड़ जाते हैं. उन्होंने एक मिसाल दी. बाढ़ से घर तबाह होने वाले परिवार को भैंस और बछड़ा दिलवाया जाता है, ताकि रोजी-रोटी चल सके.
ऐसे की मदद
आज सुबह की एक घटना का जिक्र करते हुए सोनू ने बताया कि साढ़े पांच बजे फोन आया. पीजीआई लखनऊ के बाहर एक बच्चे का एडमिशन नहीं हो पा रहा था. उन्होंने डॉक्टरों को मैसेज किया. सवा छह बजे एडमिशन हो गया और इलाज शुरू हो गया. सोनू ने कहा, 'शायद ऊपरवाला चुन लेता है कि ये काम कर दो. फिर सब अपने आप हो जाता है.'
सोनू सूद ने सबसे बड़ा सबक भी बताया कि मदद मांगने में झिझकना नहीं चाहिए. अगर कोई योग्य है तो डॉट्स खुद जुड़ जाते हैं और इंसान अपने लक्ष्य तक पहुंच जाता है. सोनू ने एक पुरानी लाइन भी दोहराई, 'मदद करो तो लोग भूल जाते हैं, न करो तो याद रखते हैं. लेकिन रुकना नहीं चाहिए.' आपको बता दें कि ‘बनेगा स्वस्थ इंडिया' अभियान स्वास्थ्य और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का काम करता है. इस सीजन में भी बच्चों और परिवारों को बेहतर स्वास्थ्य की दिशा में आगे बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है.
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