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बार-बार चोटिल क्यों हो रहे हार्दिक? कमर से टखने, पैर तक समझें पूरी चोट का इतिहास, क्या है वजह, कब होगी वापसी

प्रक्रिया से साफ है कि हार्दिक न्यूजीलैंड दौरा, श्रीलंका श्रृंखला (13 दिसंबर), जिम्बाब्वे वनडे (3 जनवरी) और पूरे घरेलू सत्र से बाहर रहेंगे. इन सभी कारकों को मिलाकर पांड्या की वास्तविक मैच-फिटनेस के साथ प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में वापसी केवल आईपीएल 2027 के माध्यम से ही संभव दिख रही है

बार-बार चोटिल क्यों हो रहे हार्दिक? कमर से टखने, पैर तक समझें पूरी चोट का इतिहास, क्या है वजह, कब होगी वापसी
हार्दिक की चोट को लेकर और निराश करने वाली खबर सामने आ रही है
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चोट के कारण हाल ही में न्यूजीलैंड दौरे से बाहर होने वाले टीम इंडिया के ऑलराउडंर हार्दिक पांड्या को लेकर एक और झटका लगता दिख रहा है! ताजा रिपोर्ट के अनुसार हार्दिक पांड्या चोट के कारण आईपीएल से भी बाहर होने का खतरा मंडरा गया है. एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह स्टार ऑलराउंडर  वर्तमान में पांड्या पिंडली के अंदरूनी हिस्से में स्ट्रेस इंजरी के कारण बेंगलुरु के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में गहन पुनर्वास प्रक्रिया से गुजर रहे हैं.  CoE से आ रहे ताजा मेडिकल रिपोर्ट का आंकलन साफ कह रहा है कि ऑलराउंडर  को भविष्य में चोट को लेकर बहुत ही ज्यादा सावधानी बरतनी पड़ेगी. हार्दिक को हल्की जॉगिंग शुरू करने में भी अभी कम से कम तीन हफ्ते का समय लगेगा. और एक बार जब वह इस चरण को पार कर लेंगे, तो अगले आठ हफ्तों के दौरान उनके दौड़ने के भार को धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा. चलिए आप डिटेल से जानिए कि हार्दिक के बार-बार चोटिल होने के पीछे की बायोमैकेनिकल और तकनीकी वजह क्या है. उनकी चोट कितनी गंभीर और कितना संभावित समय उन्हें वापसी में लगेगा.

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इन वजहों से बार-बार चोटिल हो रहे हार्दिक

पांड्या साल 2023 में भारत में खेले गए विश्व कप से लेकर अभी तक नियमित अंतराल पर चोटिल हो रहे है. और उनकी चोट के पीछे की बड़ी वजह बायोमैकेनिकल बॉलिंग एक्शन, बैटिंग तकनीक और शारीरिक संरचना एक बड़ी वजह है, जिसने उन्हें बार-बार चोट पहुंचाई है.  खेल चिकित्सा और बायोमैकेनिक्स पंडितों के अनुसार, पांड्या का गेंदबाजी एक्शन 'मिश्रित' प्रकार का है. जब वे गेंद फेंकते हैं, तो उनकी बैक-फुट लैंडिंग के समय रीढ़ की हड्डी पर अत्यधिक झुकाव और रोटेशनल स्ट्रेस आता है. और 140 किमी/घंटा की रफ्तार पैदा करने के लिए जब खासा हार्दिक जोर लगाते हैं, उनकी दुबली-पतली काया पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है. इसके कारण उनके लुंबार स्पाइन और पार्स इंटरआर्टिकुलिस को बार-बार नुकसान पहुंचता है. इसकी वजह से पांड्या को साल 2018-2019 में गंभीर बैक स्ट्रेस फ्रैक्चर और फिर सर्जरी से गुजरना पड़ा था.

बैटिंग तकनीक भी परेशानी की वजह

बॉलिंग की मुसीबतों के अलावा बैटिंग तकनीक ने भी पांड्या को खासी चोट पहुंचाई है! पांड्या की बल्लेबाजी शैली भी उनके निचले हिस्से पर अत्यधिक दबाव डालती है.   हार्दिक क्रीज के काफी गहराई में खड़े होकर बिना पर्याप्त फॉरवर्ड मोमेंटम के पावरफुल शॉट लगाते  हैं. छक्के मारते समय उनकी रीढ़ की हड्डी अत्यधिक पीछे झुकती है, जो उनकी पीठ की मांसपेशियों और कोर स्टेबिलिटी को प्रभावित करती है. 

साल  2023 के वनडे विश्व कप में उन्हें लगे एंकल लिगामेंट टियर के बाद, उनके चलने और दौड़ने की बायोमैकेनिकल सीरीज  में असंतुलन आ गया. जब शरीर का एक हिस्सा सही तरीके से भार सहन नहीं कर पाता, तो भार अन्य मांसपेशियों जैसे जांघ,  काफ और शिन  पर स्थानांतरित हो जाता है. और  किशोरावस्था से लगातार तेज गेंदबाजी का आधार न होने के कारण उनकी मांसपेशियां इस निरंतर भारी वजह को सहने में विफल रहती हैं.  यही वजह है कि हार्दिक मांसपेशियों के खिंचाव और स्ट्रेस इंजरी से बार-बार चोटिल हो रहे हैं. 

चोट की गंभीरता को समझें आप

हार्दिक पांड्या की हालिया चोट की प्रकृति 'शिन स्ट्रेस इंजरी'  है, जो टिया  हड्डी के अंदरूनी हिस्से में तनाव के कारण होती है. यह कोई साधारण मांसपेशियों का खिंचाव नहीं है, बल्कि यह बार-बार पड़ने वाले अत्यधिक झटकों और ओवेरयूज के कारण हड्डी में  पैदा होने वाला सूक्ष्म तनाव है. तेज गेंदबाजी के दौरान रन-अप और लैंडिंग के समय पैर पर शरीर के वजन से कई गुना अधिक असर पड़ता है. यदि इस चरण में हड्डी के ऊतकों को ठीक होने का पर्याप्त समय न मिले, तो यह चोट 'टिबियल स्ट्रेस फ्रैक्चर' ) में बदल सकती है, जो एक खिलाड़ी के करियर को समाप्त करने की क्षमता रखती है. 

हार्दिक को बरतनी होगी यह सावधानी

यह चोट पांड्या के लिए अत्यधिक खतरनाक इसलिए है क्योंकि उनके शरीर में पहले से ही पीठ के निचले हिस्से और टखने की चोटों के कारण बायोमैकेनिकल असंतुलन बना हुआ है.  शिन स्ट्रेस इंजरी का उपचार केवल बर्फ लगाने या फिजियोथेरेपी से संभव नहीं है. इसके लिए हड्डी को पूरी तरह से विश्राम देना पड़ता है. यदि पांड्या पूर्ण रूप से स्वस्थ हुए बिना मैदान पर वापसी करते हैं, तो लैंडिंग इंपैक्ट के कारण हड्डी में स्थायी फ्रैक्चर हो सकता है, जिसके लिए सर्जिकल पिनिंग की आवश्यकता पड़ सकती है. यही कारण है कि बीसीसीआई की मेडिकल टीम इस चोट को बेहद गंभीरता से ले रही है और इसमें कोई जल्दबाजी नहीं दिखा रही है.

इतना समय लगेगा पांड्या को सही होने में

सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (CoE) द्वारा तैयार किए गए रिकवरी रोडमैप के अनुसार, हार्दिक पांड्या को मैदान पर प्रतिस्पर्धी क्रिकेट में लौटने में कई महीने लग जाएंगे. और इन महीनों के दौरान पांड्या को 'बहुत ही व्यवस्थित' तरीके से खुद पर काम करना होगा. चलिए प्वाइंट दर प्वाइंट इसे समझिए;-

-पुनर्वास प्रक्रिया के पहले चरण में उन्हें अभी हल्की जॉगिंग शुरू करने में कम से कम 3 सप्ताह का समय लगेगा.

- दूसरे चरण में उनकी दौड़ने की क्षमता और पैरों पर भार उठाने की सीमा को धीरे-धीरे बढ़ाने के लिए 8 सप्ताह का समय तय किया गया है. इस प्रकार, केवल बुनियादी शारीरिक दौड़ और कार्डियोवस्कुलर फिटनेस हासिल करने में ही उन्हें कुल 11 सप्ताह (लगभग तीन महीने) लग जाएंगे.

-11 सप्ताह के इस बुनियादी चरण के पूरा होने के पश्चात ही तीसरे चरण में उनकी गेंदबाजी का अभ्यास  शुरू किया जाएगा. इसमें बायोमैकेनिकल विशेषज्ञों की देखरेख में 1 से 2 ओवर से शुरुआत करके धीरे-धीरे 4 से 10 ओवर फेंकने की क्षमता विकसित की जाएगी.  CoE की चिकित्सा टीम ने पांड्या की वापसी के लिए कोई निश्चित तारीख या 'डेडलाइन' तय नहीं करने का सचेत निर्णय लिया है, जिससेअनुचित दबाव में कोई नई चोट न उभरे.

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Hardik Himanshu Pandya, India, New Zealand, Board Of Control For Cricket In India, Cricket
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