बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन आज हिंदी सिनेमा के सबसे बड़े सितारों में गिने जाते हैं. दशकों से फिल्मों और टेलीविजन की दुनिया में अपनी पहचान बनाए रखने वाले अमिताभ की जिंदगी में एक दौर ऐसा भी था, जब उन्हें एक्टर बनने के लिए संघर्ष करना पड़ा था. उस समय उनके पास न दौलत थी और न ही फिल्मी दुनिया में कोई पक्की जगह. बीबीसी के 1997 के 'हार्डटॉक' इंटरव्यू का एक पुराना अंश सोशल मीडिया पर चर्चा में है और उसमें अमिताभ बच्चन ने मुंबई आने को लेकर खुलकर बात की है. यही नहीं, उन्होंने इस इंटरव्यू में उस सवाल का भी जवाब दिया है जिसमें उनसे पूछा गया कि क्या संजय गांधी मुंबई के फिल्म प्रोड्यूसर्स को उन्हें काम दिलाने के लिए फोन करते थे?
'ड्राइविंग लाइसेंस लेकर मुंबई आया था'
इस वीडियो क्लिप में अमिताभ बच्चन अपने शुरुआती दिनों को याद कर रहे हैं. इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि जब वह मुंबई आए थे, तब अपने साथ ड्राइविंग लाइसेंस लेकर आए थे. उनका मानना था कि अगर वह अभिनेता नहीं बन पाए, तो कम से कम टैक्सी चलाकर अपना गुजारा कर सकते थे. इंटरव्यू के दौरान होस्ट निशा पिल्लई ने अमिताभ से उनके शुरुआती करियर में मिले रिजेक्शन के बारे में सवाल किया था. अमिताभ बच्चन ने बताया कि उन्हें यह कहकर रिजेक्ट किया जाता था कि वह लीड हीरो के लिए बहुत लंबे और पतले हैं और भारतीय सिनेमा के पारंपरिक हीरो जैसे नहीं दिखते. लेकिन अमिताभ बच्चन ने इन तानों को अपने पर हावी नहीं होने दिया.
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क्या फिल्म प्रोड्यूसर्स को फोन करते थे संजय गांधी?
अमिताभ बच्चन से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने इस बात को सरासर गलत बताया. उन्होंने यह भी बताया कि गांधी परिवार से वे कैसे नजदीक थे. उन्होंने बताया कि इसकी वजह इलाहाबाद थी. दोनों परिवार वहीं से थे. फिर आजादी के संग्राम की वजह से भी दोनों परिवार एक दूसरे को जानते थे. वैसे सरोजिनी नायडू ने उनके पिता हरिवंशराय बच्चन की मुलाकात पंडित जवाहरलाल नेहरू से करवाई थी. इस इंटरव्यू में अमिताभ बच्चन को बहुत ही सहजता के साथ सारे सवालों के जवाब देते हुए देखा जा सकता है.
“I came to Bombay with my driving license. I hoped that if I can't be an actor, at least I can be a taxi driver” - Amitabh Bachchan https://t.co/iWTwuesZwm
— Movies N Memories (@BombayBasanti) October 20, 2026
'जंजीर' ने बदल दी किस्मत
फिल्मों में आने से पहले अमिताभ कोलकाता में नौकरी कर चुके थे. उन्होंने 1969 में फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' से एक्टिंग करियर की शुरुआत की. हालांकि, पहली फिल्म के बाद सफलता तुरंत नहीं मिली और उन्हें कई फिल्मों में निराशा का सामना करना पड़ा. अमिताभ बच्चन के करियर में 1973 में रिलीज हुई 'जंजीर' एक अहम मोड़ साबित हुई. इस फिल्म ने उन्हें नई पहचान दिलाई और आगे चलकर वह हिंदी सिनेमा के 'एंग्री यंग मैन' कहलाए. इसके बाद दीवार, शोले और त्रिशूल जैसी यादगार फिल्मों से स्टारडम की बुलंदियों को छुआ.
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