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कौन हैं किसान की बेटी नीरू ढांडा? जिसने एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल, शूटिंग में रच दिया इतिहास

एक साधारण बैकग्राउंड से आने और अपने करियर के दौरान आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के बाद, नीरू का सफर हिम्मत और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक कहानी के तौर पर देखा जाता है. लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक साइकल के शुरू होने के साथ, उन्हें शॉटगन शूटिंग में भारत की सबसे मजबूत मेडल उम्मीदों में से एक माना जा रहा है.

कौन हैं किसान की बेटी नीरू ढांडा? जिसने एशियन गेम्स में भारत को दिलाया पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल, शूटिंग में रच दिया इतिहास
एशियन गेम्स में नीरू ने रचा इतिहास, भारत को दिलाया गोल्ड मेडल

भारत की नीरू ढांडा ने महिलाओं के ट्रैप शूटिंग इवेंट में गोल्ड मेडल जीतकर इतिहास रच दिया. एशियाई गेम्स 2026 में भारत के लिए यह पहला व्यक्तिगत गोल्ड मेडल है. इस मेडल के साथ ही भारत को पांचवां गोल्ड मेडल मिल चुका है.  भारतीय शूटर एशियाई गेम्स में महिलाओं के ट्रैप इवेंट में व्यक्तिगत गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बन गई हैं.  यह एक ऐसी पहली उपलब्धि है जो हमेशा के लिए रिकॉर्ड बुक्स में दर्ज रहेगी.आइची-नागोया के शूटिंग रेंज से लेकर भारतीय खेलों के इतिहास में एक नया पन्ना जोड़कर  नीरू ने ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है. 

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फाइनल स्टैंडिंग

  1. नीरू - 28
  2. सन युनोंग - 26
  3. हजर अब्दुलमलिक - 21
  4. रे बैसिल - 16
  5. झू जिंग्यु - 13
  6. लिन यी-चुन - 12
  7. लियू वान-यू - 6
  8. एलोनोरा इब्रागिमोवा - 6

नीरू धांडा अचीवमेंट

  • एशियन गेम्स 2026 - गोल्ड मेडल
  •  एशियन गेम्स 2026 विमेंस ट्रैप टीम - सिल्वर
  • 2025 एशियन शूटिंग चैंपियनशिप - गोल्ड 
  •  ISSF वर्ल्ड कप, लोनाटो 2026 - गोल्ड 
  • ट्रैप में इंडिविजुअल ISSF वर्ल्ड कप गोल्ड जीतने वाली पहली भारतीय महिला 🇮🇳
  •  ISSF वर्ल्ड कप मिक्स्ड टीम 2026 - ब्रॉन्ज मेडल
नीरू हरियाणा के जींद ज़िले की रहने वाली हैं और भारतीय सेना की कोर ऑफ़ मिलिट्री पुलिस में नायब सूबेदार के पद पर तैनात हैं. वह मध्य प्रदेश के महू में आर्मी मार्क्समैनशिप यूनिट में ट्रेनिंग लेती हैं.

नीरू ढांडा को टीम स्पर्धा में मिला सिल्वर

इससे पहले नीरू ढांडा ने टीम स्पर्धा में सिल्वर मेडल जीता, जबकि पुरुष टीम को निराशाजनक छठे स्थान से संतोष करना पड़ा. नीरू धांडा (118), आशिमा अहलावत (106) और मनीषा कीर (104) की भारतीय टीम ने कुल 328 अंक जुटाकर दूसरा स्थान हासिल किया. चीन की टीम 346 अंकों के साथ गोल्ड मेडल जीतकर टॉप पर रही. चीन की टीम में लियू शानशान, सुन युनोंग और झू जिंग्यू शामिल थीं. कुवैत की अलहवाल शाहद, अब्दुलमलिक हजर और अलहवाल सारा की टीम ने ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. नीरू ने व्यक्तिगत स्पर्धा के 8 निशानेबाजों वाले फाइनल में भी जगह बनाई.  उन्होंने कतर की रे बेसिल के साथ संयुक्त रूप से 118 अंक हासिल किए, जो एशियाई खेलों में क्वालीफिकेशन का नया रिकॉर्ड है. व्यक्तिगत स्पर्धा में आशिमा अहलावत 16वें और मनीषा कीर 23वें स्थान पर रहीं.

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कौन है नीरू धांडा

नीरू ढांडा एक भारतीय ट्रैप शूटर हैं जो देश की टॉप शॉटगन शूटिंग स्टार्स में से एक बनकर उभरी हैं. 26 साल की नीरू ने ISSF वर्ल्ड कप के विमेंस ट्रैप इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली पहली भारतीय महिला बनकर इतिहास रचने में सफलता हासिल की थी.  उन्होंने यह बड़ी कामयाबी इटली के लोनाटो में हुए ISSF शॉटगन वर्ल्ड कप में हासिल की, जो इंटरनेशनल शूटिंग के सबसे प्रतिष्ठित कॉम्पिटिशन में से एक है. नीरू ने क्वालिफिकेशन राउंड में टॉप किया और फिर फाइनल में अपना संयम बनाए रखते हुए फ्रांस की पूर्व वर्ल्ड चैंपियन और ओलंपियन कैरोल कॉर्मेनियर को हराया था.  वर्ल्ड कप में अपनी सफलता के अलावा, नीरू बड़े इंटरनेशनल इवेंट्स में भारत की शूटिंग टीम की अहम सदस्य भी रही हैं. एशियन गेम्स 2026 में, उन्होंने विमेंस ट्रैप टीम इवेंट में भारत को सिल्वर मेडल दिलाने में मदद की और 118 के स्कोर के साथ एशियन गेम्स क्वालिफिकेशन रिकॉर्ड की बराबरी करते हुए इंडिविजुअल फ़ाइनल के लिए क्वालिफाई किया.

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बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा

नीरू एक मिडिल-क्लास परिवार से है, उनके पिता किसान हैं और मां हाउसवाइफ हैं. घर के हालात ऐसे नहीं थे कि वो इस खेल को अपना पाती, एक इंटरव्यू में नीरू ने कहा,  "मेरे भाई लक्ष्य और मेरे कजिन ने मेरी बहुत मदद की.  वह खुद 2018 एशियन गेम्स में इंडिविजुअल सिल्वर मेडलिस्ट हैं. ट्रेनिंग के शुरुआती सालों में मेरी आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी, इसलिए यह मेरे सामने आई सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक थी.  मुझे और भी ज्यादा फोकस के साथ ट्रेनिंग करनी पड़ी थी. 

भाई को देखकर शूटिंग में बनाया करियर 

नीरू अपने भाई लक्ष्य और कजfन लक्षेश्वरन की वजह से शूटिंग में आईं.  ट्रेनिंग के दौरान नीरू पिछले 6-7 महीनों से उनके घर पर ही रह रहकर शूटिंग की ट्रेनिंग पूरी की थी.  उसके बाद, नीरू ने भोपाल शूटिंग एकेडमी में ट्रायल्स दिए और  सिलेक्शन हो गया. एक साधारण बैकग्राउंड से आने और अपने करियर के दौरान आर्थिक चुनौतियों का सामना करने के बाद, नीरू का सफर हिम्मत और दृढ़ संकल्प की एक प्रेरणादायक कहानी के तौर पर देखा जाता है. लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक साइकल के शुरू होने के साथ, उन्हें शॉटगन शूटिंग में भारत की सबसे मजबूत मेडल उम्मीदों में से एक माना जा रहा है.

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