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Vaibhav Suryavanshi: आ रहा हूं मैं... हरारे में 167 दिन बाद लौटेगा वैभव सूर्यवंशी का तूफान, पलट देंगे इतिहास का पन्ना!

Vaibhav Suryavanshi Records in Harare, IND vs ZIM: 167 दिन पहले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ ऐसी बल्लेबाजी की थी, जिसने पूरी दुनिया को उनका फैन बना दिया था.

Vaibhav Suryavanshi: आ रहा हूं मैं... हरारे में 167 दिन बाद लौटेगा वैभव सूर्यवंशी का तूफान, पलट देंगे इतिहास का पन्ना!
Vaibhav Suryavanshi Records in Harare, IND vs ZIM:

Vaibhav Suryavanshi Records in Harare, IND vs ZIM: भारत और जिम्बाब्वे के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का आगाज 23 जुलाई से हरारे स्पोर्ट्स क्लब में होगा. भारतीय टीम के लिए यह सिर्फ एक और विदेशी दौरा नहीं है, बल्कि युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी के लिए खुद को साबित करने का बड़ा मंच भी है. इंग्लैंड दौरे पर उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाने के बाद अब सबकी निगाहें इस 15 वर्षीय बल्लेबाज पर टिकी होंगी. हर खिलाड़ी के करियर में एक ऐसा दौर आता है जब उसके रन नहीं, बल्कि उसकी प्रतिक्रिया चर्चा का विषय बन जाती है. वैभव सूर्यवंशी भी फिलहाल उसी मोड़ पर खड़े हैं.

वही हरारे... जहां दुनिया ने पहली बार देखा था वैभव का तूफान

अब किस्मत उन्हें फिर उसी मैदान पर लेकर आई है, जहां उन्होंने कुछ महीने पहले क्रिकेट इतिहास की सबसे यादगार पारियों में से एक खेली थी. 167 दिन पहले हरारे स्पोर्ट्स क्लब में खेले गए अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड के खिलाफ ऐसी बल्लेबाजी की थी, जिसने पूरी दुनिया को उनका मुरीद बना दिया था. उन्होंने महज 80 गेंदों पर 175 रन ठोक दिए थे. उनकी पारी में 15 चौके और 15 छक्के शामिल थे.

उस दिन हरारे की पिच पर सिर्फ रन नहीं बन रहे थे, बल्कि एक नए सितारे का जन्म हो रहा था. वैभव की उस ऐतिहासिक पारी के दम पर भारत ने अंडर-19 विश्व कप का खिताब अपने नाम किया था.

रिकॉर्ड जो आज भी हरारे की दीवारों पर गूंजते हैं

हरारे में वैभव का नाम सिर्फ एक शानदार पारी की वजह से नहीं, बल्कि कई रिकॉर्ड्स की वजह से दर्ज है. उन्होंने फाइनल में सिर्फ 55 गेंदों में शतक पूरा किया, जो टूर्नामेंट के इतिहास के सबसे तेज शतकों में शामिल है. वह अंडर-19 वर्ल्ड कप फाइनल में 150 से ज्यादा रन बनाने वाले पहले बल्लेबाज बने. पूरे टूर्नामेंट में उनके बल्ले से 30 छक्के निकले, जो उनकी आक्रामक बल्लेबाजी का सबसे बड़ा प्रमाण था.

अब नई कहानी लिखने का मौका

क्रिकेट में यादें ज्यादा दिन तक नहीं टिकतीं. हर मैच खिलाड़ी को खुद को फिर से साबित करने का मौका देता है. वैभव के सामने भी अब यही चुनौती है. अंडर-19 स्तर पर उन्होंने दुनिया जीत ली थी, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का स्तर अलग है. इंग्लैंड में मिले झटके ने उन्हें यह एहसास भी करा दिया कि यहां सिर्फ प्रतिभा नहीं, बल्कि लगातार सुधार और धैर्य की भी जरूरत होती है.

हरारे का मैदान एक बार फिर उनका इंतजार कर रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार सामने जूनियर नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की चुनौतियां होंगी. अगर वैभव सूर्यवंशी यहां बल्ले से जवाब देते हैं, तो यह सिर्फ रन नहीं होंगे. यह उस कहानी का नया अध्याय होगा, जिसकी शुरुआत इसी मैदान पर 167 दिन पहले हुई थी.

इंग्लैंड के खिलाफ अपने पहले अंतरराष्ट्रीय टी20 अभियान में वैभव तीन मैचों में सिर्फ 42 रन बना सके. कई मौकों पर उन्होंने अच्छी शुरुआत की, लेकिन उसे बड़ी पारी में नहीं बदल पाए. खास तौर पर शॉर्ट गेंदों के खिलाफ उनकी कमजोरी सामने आई, जिसका इंग्लैंड के गेंदबाजों ने भरपूर फायदा उठाया.

हालांकि वैभव ने आलोचनाओं से दूरी बनाकर मेहनत का रास्ता चुना. सीरीज खत्म होते ही उन्होंने आराम करने के बजाय राजस्थान रॉयल्स के ट्रेनिंग कैंप में जाकर अपने खेल पर काम करना शुरू कर दिया.

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