दिल्ली से कोलकाता तक छह बड़े एक्सप्रेसवे के जुड़ने से सीधा सुपरफास्ट नेटवर्क तैयार हो रहा है. इससे दिल्ली एनसीआर, यूपी, बिहार, झारखंड से बंगाल तक सीधी कनेक्टिविटी मिलेगी. दरअसल, यूपी से वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे और विंध्य पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे का निर्माण हो रहा है. इससे दिल्ली से सीधे कोलकाता तक सुपरफास्ट सफर का रास्ता साफ होगा. ये दोनों एक्सप्रेसवे बन जाने से दिल्ली से कोलकाता तक एक्सप्रेसवे नेटवर्क तैयार होगा. इसमें दिल्ली डीएनडी से यमुना एक्सप्रेसवे, वहां से आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे, विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे और वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे जुड़ जाएंगे. इससे दिल्ली से कोलकाता का सफर लगभग 12 से 13 घंटे होगी, जो NH-19, जीटी रोड से 22 से 24 घंटे लगता है. दिल्ली से वाराणसी पहुंचने में 6.5 से 7 घंटे, वाराणसी से कोलकाता तक 6 घंटे लगेगा. राजधानी, दुरंतो ट्रेन से भी दिल्ली से कोलकाता यात्रा में 17-18 घंटे लगते हैं.
विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे को भी मंजूरी
उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बुधवार को विंध्य एक्सप्रेसवे और विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे को मंजूरी दी है.साथ ही प्रदेश के बड़े एक्सप्रेसवे को मिलाकर एक ग्रिड बनाने का ऐलान किया है. इसके लिए विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए निर्माणाधीन वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के साथ एक बड़ा इंटरचेंज बनाया जाएगा. सरकार ने प्रयागराज, भदोही, मिर्जापुर और सोनभद्र समेत छह जिलों को जोड़ने वाले 6 लेन के विंध्य एक्सप्रेसवे का ऐलान किया है.इस पर 26315 करोड़ रुपये खर्च होंगे. वहीं विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे 9039 करोड़ रुपये से बनेगा. यह प्रोजेक्ट गाजीपुर, मिर्जापुर और चंदौली को जोड़ेगा.
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे 6 से 7 घंटे में
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे (NH-319B) की लंबाई 610 किमी है.इस पर 35 हजार करोड़ का खर्च आएगा. 6 लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनने से वाराणसी से कोलकाता के बीच यात्रा का समय 13-14 घंटे से घटकर 6 से 7 घंटे रह जाएगा. NHAI ने 2027–2028 तक इसे बनाने का लक्ष्य रखा है. यह यूपी में चंदौली, बिहार में कैमूर-गया, झारखंड में रांची-बोकारो और पश्चिम बंगाल में हावड़ा, कोलकाता से कनेक्ट होगा.
- 610 किमी लंबे वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे पर 35 हजार करोड़ खर्च
- 26315 करोड़ खर्च विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे पर
- यूपी के 6 बड़े एक्सप्रेसवे को मिलाकर बड़ा रोड नेटवर्क ग्रिड बनेगा
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे: यूपी, बिहार, झारखंड भी जुड़ेंगे
उत्तर प्रदेश के 22 किमी के एक्सप्रेसवे की शुरुआत चंदौली जिले में वाराणसी रिंग रोड (बारहुली गांव, रेवासा) के पास NH-19 के इंटरचेंज से होगी. बिहार में यह एक्सप्रेसवे 159 किमी का होगा. कैमूर,रोहतास (सोन नदी क्रॉसिंग), औरंगाबाद और गया जिलों से गुजरेगा. कैमूर की पहाड़ी के पास 5 किमी लंबी सुरंग बन रही है. झारखंड में इस एक्सप्रेसवे की लंबाई 187 किमी रहेगी. झारखंड के चतरा, हजारीबाग, रामगढ़, पेटरवार और रांची के पास बोकारो निकलेगा. पश्चिम बंगाल में 242 किमी की लंबाई होगी. झारखंड बॉर्डर से आगे ये पुरुलिया, बांकुरा, आरामबाग, हुगली होते हुए हावड़ा (उलुबेड़िया NH-16) पर खत्म होगा.
𝐕𝐚𝐫𝐚𝐧𝐚𝐬𝐢-𝐊𝐨𝐥𝐤𝐚𝐭𝐚 𝐄𝐱𝐩𝐫𝐞𝐬𝐬𝐰𝐚𝐲 𝐚𝐧𝐝 𝐕𝐢𝐧𝐝𝐡𝐲𝐚-𝐏𝐮𝐫𝐯𝐚𝐧𝐜𝐡𝐚𝐥 𝐋𝐢𝐧𝐤 𝐄𝐱𝐩𝐫𝐞𝐬𝐬𝐰𝐚𝐲 𝐮𝐩𝐝𝐚𝐭𝐞 𝐟𝐫𝐨𝐦 𝐔𝐭𝐭𝐚𝐫 𝐏𝐫𝐚𝐝𝐞𝐬𝐡.
— Infra News India (INI) (@TheINIofficial) July 21, 2026
▪️The upcoming Vindhya-Purvanchal Link Expressway will have a huge cloverleaf interchange with the under… pic.twitter.com/PppvtGRj0p
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे भी पूर्वांचल से जुड़ेगा
यूपी सरकार ने आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिए 12264 करोड़ रुपये की परियोजनाओं को भी हरी झंडी दिखाई है. प्रयागराज से गाजीपुर तक 26315 करोड़ का विंध्य एक्सप्रेसवे और 9039 करोड़ की लागत से विंध्य-पूर्वांचल लिंक एक्सप्रेसवे बनेगा.सरकार ने पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे को आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से जोड़ने के लिंक एक्सप्रेसवे का भी फैसला लिया गया है.
गंगा एक्सप्रेसवे से भी जुड़ेगा आगरा-लखनऊ
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तक 50.98 किलोमीटर लंबे छह लेन के ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे पर 4776 करोड़ रुपये खर्च होंगे. आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे को फर्रुखाबाद के जरिये गंगा एक्सप्रेसवे से जोड़ने के 90.84 किमी लंबे छह लेन का ग्रीनफील्ड लिंक एक्सप्रेसवे 7488 करोड़ से शुरू होगा. ये परियोजनाएं 3 साल में पूरी होंगी.वहीं वाराणसी रांची कोलकाता एक्सप्रेसवे (Varanasi-Kolkata Expressway) भी ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना है. इस एक्सप्रेसवे दिल्ली यूपी समेत उत्तर भारत को सीधे पूर्वी भारत और कोलकाता बंदरगाह से जोड़ेगा.
माल ढुलाई का समय आधा होगा
वाराणसी-कोलकाता एक्सप्रेसवे के बाद दिल्ली से कोलकाता के बीच लॉजिस्टिक्स और माल ढुलाई का समय आधा हो जाएगा. इससे उत्तर भारत से पूर्वी भारत के बंदरगाह तक पहुंच बेहद तेज हो जाएगी. वहीं आगरा-लखनऊ, पूर्वांचल और गंगा एक्सप्रेसवे के आपस में जुड़ने से यूपी में मजबूत एक्सप्रेसवे ग्रिड तैयार होगी. इससे उत्तर प्रदेश के सभी जिलों के बीच एक्सप्रेसवे की इंटरकनेक्टिविटी होगी.
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