- वर्ल्ड कप में पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने पहली बार 6 लेफ्ट-हैंड बैटर्स उतारकर अनोखा रिकॉर्ड बनाया.
- टीम रणनीति में लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन की सोच और कोचिंग फिलॉसफी ने इस ट्रेंड को बढ़ावा दिया.
- भारतीय क्रिकेट इतिहास में लेफ्ट-हैंड बैटर्स ने हर दौर में अपने दमदार प्रदर्शन से टीम को मजबूत किया है.
पाकिस्तान के खिलाफ टी20 वर्ल्ड कप के लीग मुकाबले में ईशान किशन ने जबरदस्त बल्लेबाजी की और पिच की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद अपने प्रदर्शन के बूते भारत को एक यादगार ऐतिहासिक जीत दिलाई. यह मैच न केवल इसलिए यादगार रहा कि भारत को अपने चिर प्रतिद्वंद्वी पर एक शानदार जीत मिली और कई रिकॉर्ड्स बने बल्कि यह एक ऐसा रिकॉर्ड बना गया जो भारतीय क्रिकेट में रोज-रोज नहीं गढ़े जाते. यह पहली बार था जब टीम इंडिया ने वर्ल्ड कप के मुकाबले में पाकिस्तान के खिलाफ 6 लेफ्ट हैंड बैटर उतारे. पिछले साल जब टेस्ट मैच में भारतीय टीम की तरफ से पांच लेफ्ट हैंडर्स खेले थे तब कई पूर्व खिलाड़ियों ने उसकी आलोचना की थी. पर पाकिस्तान के खिलाफ इस पर कोई चर्चा नहीं हुई क्योंकि टीम ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की.
93 साल के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के इतिहास में भारतीय क्रिकेट टीम ने बाएं हाथ के कई जोरदार बल्लेबाज दिए हैं पर बीते कुछ सालों के दौरान बाएं हाथ के बल्लेबाजों ने प्रदर्शन के बूते भारतीय टीम में अपने मजबूत कदम रखे हैं. पर बहुत कम ही मौका ऐसा आया है जब टीम इंडिया के प्लेइंग इलेवन में पांच या उससे भी अधिक बाएं हाथ के बल्लेबाज उतारे गए हैं. टी20 वर्ल्ड कप में रविवार को पाकिस्तान के खिलाफ भारत ने छह लेफ्ट हैंड बल्लेबाजों को उतारा. इसके साथ ही वह नायाब रिकॉर्ड बना गया जिसपर संभवतः किसी की नजर नहीं गई. दरअसल, यह पहला मौका था जब पाकिस्तान के खिलाफ मैच में भारत ने 6 लेफ्ट हैंड बैटर्स अपने प्लेइंग इलेवन में उतारे. भारत की ओर से पारी की शुरुआत अभिषेक शर्मा और ईशान किशन ने की. उसके बाद तिलक वर्मा, शिवम दुबे, रिंकू सिंह, अक्षर पटेल, सभी लेफ्ट हैंड बैटर्स हैं.
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गंभीर कनेक्शन
भारतीय क्रिकेट टीम के इतिहास में कभी सौरव गांगुली जैसे बाएं हाथ के बल्लेबाज ने टीम की पूरी दशा बदल दी थी, तो आज के युवा बल्लेबाजों में अभिषेक शर्मा, यशस्वी जायसवाल, ईशान किशन, तिलक वर्मा जैसे नाम भारतीय क्रिकेट में अलग पहचान बना रहे हैं. हाल के समय में टीम की रणनीति में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की भूमिका काफी स्पष्ट और महत्वपूर्ण होती जा रही है- खासकर टी20 फॉर्मेट में.
हालांकि यह कहना कठिन है कि केवल गंभीर की मौजूदगी के कारण ही बाएं हाथ के बल्लेबाजों की संख्या बढ़ी, लेकिन कुछ स्पष्ट ट्रेंड्स हैं. आईपीएल और घरेलू प्रदर्शन को देखते हुए कई युवा बाएं हाथ के बल्लेबाजों को मौका मिला है, इनमें यशस्वी जायसवाल, तिलक वर्मा, रिंकू सिंह और ईशान किशन जैसे बल्लेबाज शामिल हैं जो पारंपरिक राइट हैंड बैटर्स को चुनौती दे रहे हैं. हालांकि टीम में लेफ्ट-राइट का कॉम्बिनेशन होना टीम की विरोधी गेंदबाजों को असंतुलित करने की रणनीति से जुड़ा हुआ माना जाता है. बाएं हाथ के बल्लेबाजों की टीम में भरमार का गंभीर कनेक्शन यह है कि वो बतौर कोच खुल कर लेफ्ट-राइट कॉम्बिनेशन को उतारने की बात कहते रहे हैं.
पिछले साल इंग्लैंड के खिलाफ उन्होंने टॉप ऑर्डर में अक्षर पटेल को भेजकर अपने इरादे स्पष्ट कर दिए थे. हालांकि उनका यह मानना जरूर है कि लेफ्ट राइट कॉम्बिनेशन होना चाहिए और शायद यही कारण है कि जब वो खुद कुछ समय के लिए कप्तान थे तब बतौर ओपनर दोनों लेफ्ट हैंड बैटर को उतारा था. अब आलम यह है कि पिछले साल के अंत से टी20 क्रिकेट में टीम इंडिया में लगातार बाएं हाथ के बल्लेबाजों का बोलबाला रहा है. अभिषेक शर्मा, तिलक वर्मा, शुभम दुबे, अक्षर पटेल और रिंकू सिंह लगातार टीम में बने हुए हैं और अब ईशान किशन के आने से दोनों ओपनर्स भी लेफ्ट हैंडर्स ही बन गए हैं, जो टीम इंडिया के लिए एक कभी कभार होने वाला कारनामा है.
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जब टेस्ट मैचों में दोनों ओपनर्स लेफ्ट हैंडर्स थे
भारत के लिए टेस्ट हो या वनडे या टी20 अमूमन पारी की शुरुआत दाएं हाथ के बल्लेबाज ही किया करते हैं या कई बार लेफ्ट राइट का कॉम्बिनेशन देखने को मिल जाता है. पर ऐसा विरले ही होता जब पारी की शुरुआत करने वाले दोनों क्रिकेटर्स बाएं हाथ के बल्लेबाज हों.
टेस्ट क्रिकेट में ऐसा पहली बार गौतम गंभीर और इरफान पठान ने श्रीलंका के खिलाफ 2005 में फिरोजशाह कोटला (अब अरुण जेटली स्टेडियम) में किया. तब दोनों ने दूसरी पारी में यह रिकॉर्ड बनाया था. गौतम गंभीर तो ओपनर थे ही पर यह इरफान पठान का बतौर ओपनर पहला मैच था और उन्होंने उस मैच में 93 रन बना डाले थे. यह टेस्ट मैचों में इरफान का दूसरा सबसे बड़ा व्यक्तिगत स्कोर था.
इसके बाद गौतम गंभीर के साथ बाएं हाथ के अभिनव मुकुंद ने 2011 के लॉर्ड्स टेस्ट मैच में भारत के लिए पारी की शुरुआत की थी. तो 2017 में अभिनव मुकुंद और शिखर धवन ने भी दो टेस्ट मैच में श्रीलंकाई पिच पर भारत के लिए पारी शुरू किया था. कुल मिलाकर केवल चार टेस्ट मैचों में भारत के लिए पारी की शुरुआत करने वाले दोनों ओपनर्स लेफ्ट हैंड बैटर थे. चलिए बताते हैं कि कब कब भारतीय टीम की पारी दोनों लेफ्ट हैंडर्स ने की है.
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वनडे में दोनों लेफ्ट हैंडर्स ओपनर
वनडे क्रिकेट में भारतीय टीम के लिए पहली बार दो लेफ्ट हैंडर्स ने पारी की शुरुआत 1999 में की. तब लेफ्ट हैंडर्स सौरव गांगुली और सद्गोपन रमेश ने यह रिकॉर्ड बनाया. यह रमेश का डेब्यू वनडे मैच भी था. यहां से दोनों ने 17 मैचों में भारतीय पारी की शुरुआत की.
बाद में जब गांगुली कप्तान थे तब उन्होंने जुलाई 2001 में युवराज सिंह को भी दो वनडे मैच में बतौर ओपनर आजमाया. एक बार खुद के साथ और दूसरी बार अमय खुर्सिया के साथ. खुर्सिया भी बाएं हाथ के ही बल्लेबाज थे. पर जब युवराज दोनों ही मौके पर नहीं चले तो उन्होंने आगे इसे जारी नहीं रखा. गांगुली दोनों ओपनर्स लेफ्ट हैंडर्स चाहते थे लिहाजा उन्होंने यह आजमाइश जारी रखी. एक साल बाद ही उन्होंने दिनेश मोंगिया के साथ पारी की शुरुआत की और यह कोशिश अगले पांच मैचों तक जारी रखी. तब मोंगिया ने अपने वनडे करियर का सबसे बड़ा स्कोर नाबाद 159 रन भी बना डाला. गांगुली ने इसके बाद अगले साल (2004) फिर पार्थिव पटेल के साथ भी पारी की शुरुआत की.
2005 में गौतम गंभीर और इरफान पठान टेस्ट के अलावा वनडे में भी पारी की शुरुआत करने वाले लेफ्ट हैंड बैटर्स की जोड़ी बने. दो साल बाद राहुल द्रविड़ ने अपनी कप्तानी में गांगुली के साथ गौतम गंभीर को बल्लेबाजी की शुरुआत करने उतारा. पहले ही मैच में दोनों बल्लेबाजों ने 144 रनों की साझेदारी निभा दी.
तीन साल बाद जब गंभीर ने टीम इंडिया की बागडोर संभाली तो उन्होंने अपने साथ बाएं हाथ के बल्लेबाज पार्थिव पटेल को पारी की शुरुआत के लिए बुलाया. उसके बाद 2011 में सुरेश रैना की कप्तानी में शिखर धवन और पार्थिव पटेल ने भी कुछ पारियों में टीम इंडिया की बल्लेबाजी की शुरुआत की.
इन 12 सालों के दरम्यान वनडे में कई बार भारतीय टीम की पारी दो लेफ्ट हैंडर्स ने की. फिर करीब दशक के बाद ही ऐसा देखने को मिला, तब शिखर धवन के साथ ईशान किशन उतरे और 210 रनों की ऐसी यादगार पारी खेली कि कई रिकॉर्ड्स अपने नाम कर लिए. लेकिन उस मैच के बाद से अब तक, वनडे में दो लेफ्ट हैंडर्स ने भारतीय पारी की शुरुआत नहीं की है.
टी20 में लेफ्ट हैंडर्स ओपनर
टी20 क्रिकेट में पहली बार दो लेफ्ट हैंडर्स ने 2011 में भारतीय पारी की शुरुआत की थी, तब ये जोड़ी पार्थिव पटेल और शिखर धवन की थी. एक साल बाद गौतम गंभीर और इरफान पठान ने भी इस फेहरिस्त में अपना नाम दर्ज कराया. फिर आया 11 साल का सूना और इसे तोड़ा ईशान किशन और ऋषभ पंत की जोड़ी ने 2022 में न्यूजीलैंड के खिलाफ, तब कप्तान हार्दिक पंड्या थे. और अब टी20 वर्ल्ड कप में ईशान किशन और अभिषेक शर्मा की जोड़ी टी20 में पारी की शुरुआत करने वाली लेफ्ट हैंडर्स बल्लेबाजों की जोड़ी बनी है.
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बाएं हाथ के नामची बल्लेबाज
बाएं हाथ का बल्लेबाज दुनिया के क्रिकेट में कभी-कभी अतिरिक्त हथियार जैसा माना जाता है, क्योंकि इस तरह के बल्लेबाज पिच पर हों तो विरोधी टीम को उनके लिए अलग योजना बनानी पड़ती है. खास कर तब जब पिच पर लेफ्ट राइट कॉम्बिनेशन बल्लेबाजी कर रहा हो.
दुनिया के कई नामची बल्लेबाज लेफ्ट हैंडर्स हैं. इनमें सर डॉन ब्रैडमैन के जमाने के बिल लॉरी, ग्रीम पोलाक और नील हार्वे; 1960-70 के दशक में सर गारफील्ड सोबर्स, ग्रीम पोलाक, क्लाइव लॉयड; 1980 के दशक में डेविड गॉवर, एलेन बॉर्डर; और बाद के दशकों के दौरान सनथ जयसूर्या, क्रिस गेल, कुमार संगकारा, सरीखे बल्लेबाजों ने क्रिकेट के अंतरराष्ट्रीय पिच पर धूम मचाया है.
भारत में भी अलग-अलग समय में कई ऐसे लेफ्ट-हैंड बल्लेबाज हुए हैं जिन्होंने अपने युग में टीम के लिए बड़े कारनामे किए हैं. इन खिलाड़ियों में नारी कॉन्ट्रैक्टर, अजित वाडेकर, सलीम दुर्रानी, डब्ल्यू वी रमण, विनोद कांबली, सौरव गांगुली, युवराज सिंह, गौतम गंभीर, सुरेश रैना, इरफान पठान, शिखर धवन, रवींद्र जडेजा, ऋषभ पंत, अभिषेक शर्मा, ईशान किशन, तिलक वर्मा समेत कई अन्य नाम शामिल हैं. इनके अलावा सद्गोपन रमेश और अतुल बेदादे जैसे बल्लेबाजों ने भी अपनी प्रतिभा की छाप भारतीय क्रिकेट पर छोड़ी है.

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लेफ्ट हैंड बैटर्स के अजूबे कारनामे
गांगुली ने बैटिंग को डायनामिक बनाया, कई मैच जिताए. 1999 के वर्ल्ड कप में उनका बनाया गया स्कोर आज भी वनडे वर्ल्ड कप में किसी लेफ्ट हैंड बैटर का सबसे बड़ा भारतीय स्कोर है. युवराज अपनी पावर हिटिंग से पासा पलटने के माहिर थे. एक ओवर की छह गेंदों पर युवराज के लगातार छह छक्के तो किवदंती बन ही गए हैं. टीम इंडिया के वर्तमान कोच गौतम गंभीर भी अपने समय के एक जबरदस्त बाएं हाथ के बल्लेबाज रहे हैं. फिर चाहे 2007 का टी20 वर्ल्ड कप जीतना हो या 2011 में वनडे वर्ल्ड कप में मिली जीत. दोनों ही मौके पर गंभीर ने ही सबसे बड़ा स्कोर किया था.
ऐसे ही सुरेश रैना का किरदार रहा जिनके नाम आईपीएल में सबसे अधिक रन बनाने का रिकॉर्ड लंबे समय तक कायम रहा. वहीं टेस्ट मैचों में इंग्लैंड में डेब्यू सेंचुरी जड़ने का कारनामा करने वालों में गांगुली के साथ यशस्वी जायसवाल का नाम जुड़ना हो या एक साथ पांच बाएं हाथ के बल्लेबाजों को टेस्ट टीम में शामिल करना हो. ये कारनामा पिछले साल ही इंग्लैंड की धरती पर हुआ, तब भी कोच गंभीर ही थे.
इनके अलावा विनोद कांबली, शिखर धवन, रवींद्र जडेजा, ईशान किशन, यशस्वी जायसवाल, रिंकू सिंह, तिलक वर्मा जैसे खिलाड़ियों ने भी आधुनिक भारतीय क्रिकेट में अपनी बल्लेबाजी का लोहा मनवाया है. आज अभिषेक शर्मा और ईशान किशन क्रिकेट में ताबड़तोड़ रन बनाने के सारे रिकॉर्ड्स को ध्वस्त कर रहे हैं, ये दोनों भी लेफ्ट हैंडर्स ही हैं.
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