विज्ञापन

फिलहाल वैभव सूर्यवंशी के लिए वनडे में "मध्यमार्गी रास्ता" ही सर्वश्रेष्ठ

श्रीलंका 'A' दौरे में वैभव सूर्यवंशी से जितनी उम्मीदें थीं, या जितना उन्हें करना चाहिए था, या वह कर सकते थे, उसकी तुलना में अभी तक उनके हाथ कुछ भी नहीं आया

फिलहाल वैभव सूर्यवंशी के लिए वनडे में "मध्यमार्गी रास्ता" ही सर्वश्रेष्ठ
ट्राई सीरीज के फाइनल में वैभव पर सभी की नजर रहेगी
Source: scocial media

श्रीलंका में तीन A देशों के बीच खेली जा रही ट्राई सीरीज से पहले वैभव सूर्यवंशी (Vaibahv Sooryavanshi) को लेकर उम्मीदें बहुत ही ज्यादा थीं.  एकदम से ही सीरीज का सीधा प्रसारण करने का फैसला लेने वाले सोनी टीवी की भी और चंद महीनों के भीतर बन चुके सूर्यवंशी के करोड़ों फैंस की भी.  लेकिन इक्का-दुक्का मौके को छोड़ दें, तो ये उम्मीदें एकदम धराशायी हो गई हैं. और सबसे ऊपर अहम बात यह है कि चार मैच होने के बाद सूर्यवंशी एप्रोच के संदर्भ में एकदम दोराहे पर खड़े हैं कि किस गीयर के साथ बैटिंग करें, किस एप्रोच के साथ खेलें.  इन सभी के बीच वैभव ने श्रीलंका के खिलाफ दूसरे मैच में 44 रन की एक उम्दा पारी भी खेली, जो उन्हें बताने, समझाने और कॉन्फिंडस देने के लिए कहीं ज्यादा थी कि उन्हें आगे के मैचों मे किस एप्रोच के साथ बढ़ना है, लेकिन अगले ही दोनों मैचों में एप्रोच के संदर्भ में वैभव ने गलती कर दी. 

 दोराहे पर खड़े दिखते हैं वैभव!

वैभव के इर्द-गिर्द दिग्गज कोच बन चुके पूर्व क्रिकेटरों सहित सपोर्ट स्टॉफ का अच्छा-खासा कुनबा है. ये विद्धान लोग निश्चित तौर पर कई तरीके सूर्यवंशी को बताते होंगे. कई सलाह 'एक पेच' पर आकर प्लान का रूप धारण करती होंगी. मसलन किस बल्लेबाज को पहले स्ट्राइक लेना है, शुरुआती गेंदों पर कैसा रवैया धारण करना है, किस गेंदबाज को कैसे खेलना है. वगैरह-वगैरह. लेकिन चार मैचों के बाद नतीजा यह है कि वैभव एप्रोच के संदर्भ में दोराहे पर ही खड़े दिखते हैं. किस एप्रोच के साथ आगे बढ़ें? यह टी20 जैसी हो या फिर हालात के हिसाब से दूसरी कोई एप्रोच? किसी भी खिलाड़ी विशेष की एप्रोच उतनी ही अच्छी होती है, जितना उसका आखिरी मैच. और अफगानिस्तान 'A' के खिलाफ वैभव को लगभग तीन जीवनदान मिले. यह वनडे नहीं, बल्कि पूरी तरह टी-20 एप्रोच थी! हालात (फॉर्म, जरूरत, पिच, वनडे आदि) के हिसाब से यह एप्रोच सही नहीं थी. 

Latest and Breaking News on NDTV

Photo Credit: @X

भ्रमित एप्रोच का नाकाम परिणाम!

कन्फ्यूजिंग एप्रोच का असर यह रहा कि वैभव के आंकड़े उम्मीद से कहीं ज्यादा खराब हो गए. अभी तक खेले चार मैचों में वैभव सूर्यवंशी ने 4 मैचों में 29.25 के औसत से 128 रन बनाए हैं. यह वह औसत है, जिसे टी20 में भी अच्छा नहीं माना जाता, फिर वनडे की तो बात ही छोड़ दीजिए. कुछ हद तक वैभव ने स्ट्राइक-रेट (153.94) को बरकरार रखा है. लेकिन जब बड़ी पारियां ही न हों, एक भी अर्द्धशतक न हो, तो इस स्ट्राइक-रेट के कोई मायने नहीं रह जाते. बहरहाल, उनके पास आखिरी मैच यानी फाइनल बचा हुआ है. और इस आखिरी पारी से वैभव पिछली विफलताओं को धोकर और तमाम पहलुओं को लेकर उठ रहे सवालों के जवाब दे सकते हैं. 

सही सुर लगाया था वैभव ने !

श्रीलंका A के खिलाफ पहले मैच की नाकामी के बाद वैभव ने 11 जून को अफगानिस्तान के खिलाफ खेले गए दूसरे ही मैच में एप्रोच के संदर्भ में एकदम सही सुर लगाय था. इस मैच में वैभव ने 22 गेंदों पर 44 रन बनाए थे. लेकिन इस पारी की यूएसपी यही थी कि उन्होंने एक भी हवा में शॉट नहीं खेला. वैभव ने दिखाया कि बिना एक भी छ्क्के के वह 200 का स्ट्राइक-रेट से रन बनाना चाहते हैं. यह उन्हें ईश्वर की ओर से दिया गया बेहतरीन उपहार है, लेकिन मन पर नियंत्रण तो सूर्यवंशी को ही रखना होगा. प्लान तो उन्हें ही बनाना होगा.  एप्रोच के लिहाज से यह एकदम सही सुर लगाया था वैभव ने, लेकिन इसके बाद अगले दोनों मैचों में सुर बिखर गया, तो परिणाम भी और खराब हो गया. 

वनडे में 'मध्यमार्गी रास्ता' ही सर्वश्रेष्ठ 

वैभव को कुछ भी नहीं करना था. जहां उन्होंने अफगानिस्तान 'A' के खिलाफ छोड़ा था, आगे के मैचों में उसी एप्रोच के सिरे को आगे पकड़कर चलना था. लेकिन अफगानिस्तान A के खिलाफ दूसरे मैच तक आते-आते यह सूर पूरी तरह से बिगड़ गया. वैभव की एप्रोच टी-20 में तब्दील हो गई! श्रीलंका की पिचों पर टप्पा खाने के बाद बल्ले पर धीमा आती गेंदों पर सही टाइमिंग हासिल करने के लिए वैभव को अभी खासा अनुभव हासिल करना होगा. स्लैश हार्ड करके शॉट कम खेलने होंगे. खुद से वादा करके मैदान पर उतरना होगा कि चाहे कुछ भी हो जाए, वह हवा में शॉट नहीं ही खेलेंगे. चाहे कुछ भी हो जाए, वह शुरुआती कम से कम 8-10 ओवर तक मैदानी चौकों से ही रन बटोरेंगे. कुछ अच्छी गेंदों को रोकेंगे, तो अच्छी गेंदों को विकेटकीपर के लिए लेफ्ट भी करेंगे. जितना जोखिम कम होगा, उतना ही पारी का आधार मजबूत होगा. वनडे में उनके लिए यही खासकर श्रीलंकाई पिच और आगे भविष्य को देखते हुए "मध्यममार्गीय एप्रोच"  ही  सर्वश्रेष्ठ एप्रोच है. टी20 में वैभव को कुछ साबित करने की जरूरत नहीं, लेकिन वनडे में उन्हें कुछ शानदार पारियों से कदम दर कदम सेलेक्टरों को भरोसा देना होगा. और उन्हें ठीक उसी एप्रोच की वापस लौटना होगा, जो एप्रोच उन्होंने अफगानिस्तान A के खिलाफ वनडे में दिखाई थी. फिलहाल, उनके लिए वनडे में यही एप्रोच सर्वश्रेष्ठ है!

यह भी पढ़ें:  वैभव सूर्यवंशी को यह सजा देना चाहते थे संजय मांजरेकर, जानें किस साइड खड़े हैं फैन्स

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Vaibhav Sooryavanshi, India A, Afghanistan A, Board Of Control For Cricket In India, Cricket
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com