इंडियन प्रीमियर लीग की शुरुआत से पहले लखनऊ सुपर जायंट्स एक मजबूत टीम माना जा रहा था. टीम खिताब की दावेदार थी. बल्लेबाजी से लेकर गेंदबाजी तक, हर विभाग में टीम के पास स्टार खिलाड़ी थे. लेकिन सीजन की शुरुआत से ही लखनऊ संघर्ष करने लगी. आधे सीजन तक आते-आते यह तय हो गया कि प्लेऑफ की रेस से बाहर होने वाली पहली टीम होगी और हुआ भी यही. इसमें सबसे बड़े दोषी खुद ऋषभ पंत रहे. लखनऊ का टॉप ऑर्डर पावरप्ले में दमदार शुरुआत नहीं दिला पाया. मिडिल ऑर्डर ने तो सरेंडर ही कर दिया. पिछले सीजन छक्के से नीचे बात नहीं करने वाले निकोलस पूरन का तो जैसे चूरन निकल गया. टीम के लिए अच्छी बात बस गेंदबाजी रही, लेकिन उसमें भी निरंतरात की कमी दिखी. जब किसी टीम में इतनी चीजें एक साथ खराब हो तो उसका नतीजा वहीं आता है, जहां लखनऊ है. लखनऊ अंक तालिका में सबसे निचले पायदान पर फिनिश करेगी. टीम ने 14 मैच खेले हैं और सिर्फ 4 में वह जीत पाई.
कप्तान पंत हर मोर्चे पर फ्लॉप
इस सीजन में ऋषभ पंत का प्रदर्शन कप्तान और बल्लेबाज, दोनों रूपों में निराशाजनक रहा. उनके बल्ले से न तो बड़ी पारियां निकलीं और न ही वह टीम को मुश्किल हालात से निकाल पाए. कप्तानी में भी पंत कई बार रणनीतिक तौर पर चूकते दिखे. गेंदबाजी बदलाव से लेकर फील्ड प्लेसमेंट तक, कई फैसले टीम पर भारी पड़े. दबाव के मौकों पर नेतृत्व की कमी साफ नजर आई. पंत ने 14 मैचों में 28.36 की औसत से रन बनाए. सीजन में सिर्फ एक अर्धशतक लगा पाए.
आतिशी पूरन का निकला चूरन
निकोलस पूरन, 2025 में छक्कों की बरसात करने वाला बल्लेबाज, 2026 में बुरी तरह से फ्लॉप हुआ. पूरन इस सीजन नंबर-3 से लेकर नंबर-5 हर पोजिशन पर खेले, लेकिन संघर्ष करते नजर आए. पिछले सीजन 14 मैचों में 40 छक्के लगाने वाले पूरन इस सीजन 19 छक्कों पर सीमित रहे. आईपीएल 2026 में इस बाएं हाथ के बल्लेबाज ने 18.00 की औसत और 127.86 की स्ट्राइक रेट से रन बनाए. उनके बल्ले से इस दौरान सिर्फ एक पचासा आया.
मिडिल ऑर्डर पूरी तरह बेअसर
अगर यह कहा जाए कि लखनऊ के मिडिल ऑर्डर में एक बड़े नाम की कमी रही तो बिल्कुल भी गलत नहीं होगा. अब्दुल समद, आयुष बोदनी और मुकुल चौधरी तीनों ही अनकैप्ड हैं. टॉप ऑर्डर के लड़खड़ाने के बाद टीम की पारी को संभालने का जिम्मा मिडिल ऑर्डर पर होता है और लखनऊ को यहां उसके बल्लेबाजों ने साथ नहीं दिया. जबकि एडेन मार्करम की पोजिशन ऊपर नीचे होती रही. इंग्लिश के आने के बाद वह मिडिर ऑर्डर में गए.
- आयुष बडोनी: 10 मैच- 215 रन- 21.50 का औसत- 138.32 का स्ट्राइक रेट
- एडेन मार्करम: 14 मैच- 231 रन- 25.66 का औसत- 138.32 का स्ट्राइक रेट
- मुकुल चौधरी: 10 मैच- 170 रन-28.33 का औसत- 141.66 का स्ट्राइक रेट
- अब्दुल समदछ 8 मैच- 116 रन-19.33 का औसत-131.81 का स्ट्राइक रेट
गेंदबाजी में निरंतरता का अभाव
पूरे सीजन टीम की गेंदबाजी बिखरी हुई नजर आई. न तो पावरप्ले में विकेट मिले और न ही डेथ ओवर्स में रन रोके जा सके. विरोधी टीमें आसानी से बड़े स्कोर खड़े करती रहीं. गेंदबाजों के बीच तालमेल की कमी और लगातार महंगे स्पेल्स ने टीम को कई मैचों में बैकफुट पर धकेला. कोई भी गेंदबाज पूरे सीजन में ‘मैच विनर' की भूमिका में नहीं दिखा.शमी ने शुरुआती मैचों में अपना डंक दिखाया, लेकिन इसके हाद वो प्रभाव नहीं छोड़ पाए. आखिरी में मोहसिन और प्रिंस ने विकेट निकाले, लेकिन रन भी लुटाए. प्रिंस ने 14 मैचों में 16 विकेट निकाले. लेकिन इकॉनमी रही 8.82 की. शमी के नाम 13 मैचों में 12 विकेट रहे. मोहसिन के नाम 7 मैचों में 11 विकेट रहे.
युवाओं ने किया निराश
लखनऊ ने इस सीजन युवा और अनुभनी खिलाड़ियों का एक मिश्रण रखा था. लेकिन अनुभवी खिलाड़ी आउट ऑफ फॉर्म रहे तो युवा खिलाड़ियों ने उसे अधिक निराश किया. मुकुल ने एक मैच के अलावा बाकी मुकाबलों में निराश किया. दिग्वेश राठी से लेकर आकाश सिंह तक, सभी एक मैच के हीरो रहे, लेकिन बाकी में उन्होंने टीम की डुबिया लुटोई.
यह भी पढ़ें: MI vs RR IPL 2026: राजस्थान को जीत से मिलेगी प्लेऑफ का टिकट, मुंबई की जीत की दुआ करेंगी पंजाब-कोलकाता
यह भी पढ़ें: IPL 2026 Playoff: अगर राजस्थान हारी तो पंजाब से कैसे आगे निकलेगी कोलकाता, ऐसा है समीकरण
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं