8th Pay Commission Good News on Gratuity Expectation: देश के करीब 50 लाख सरकारी कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स को 8वें वेतन आयोग के लागू होने का इंतजार है. आयोग के सामने अपनी मांगें रखने और सुझाव देने के लिए मेमोरेंडम सौंपने की डेडलाइन खत्म हो गई है और अब सबसे बड़ी एक्सरसाइज शुरू हुई है- उन मांगों और सुझावों पर विचार करने की. जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई की अध्यक्षता वाला आयोग मंथन कर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगा. अलग-अलग कर्मचारी-पेंशनर वर्गों और संगठनों ने सैलरी, पेंशन, फिटमेंट फैक्टर, हेल्थ स्कीम समेत कई मुद्दों पर अपने सुझाव दिए हैं. इनमें एक अहम मुद्दा ग्रेच्युटी का भी है. कर्मचारी वर्ग चाहता है कि ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को 25 लाख से बढ़ाकर 50 और 75 लाख किया जाए. आयोग इसे मांग समझे या सुझाव, लेकिन अगर इस पर विचार किया जाता है तो कर्मचारियों के लिए ये बहुत बड़ी खुशखबरी हो सकती है.
AINPSF यानी ऑल इंडिया एनपीएस एम्पलाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ मंजीत सिंह पटेल ने कहा कि सुझावों की डेडलाइन खत्म होने के बाद आयोग का अब सारा फोकस मीटिंग्स और रिपोर्ट तैयार करने पर होगा. अपने सहयोगी संगठनों को साथ लेकर चलते हुए AINPSEF लगातार कमीशन के साथ इंटरेक्शन कर रहा है. डॉ पटेल को भरोसा है कि 2027 के बजट से पहले आयोग अपनी रिपोर्ट भारत सरकार को सबमिट कर देगा और कर्मचारियों-पेंशनर्स को अप्रैल 2027 से फायदा मिलना शुरू हो जाएगा.
क्यों ग्रेच्युटी को 2 से 3 गुना करने की मांग कर रहे कर्मचारी?
कर्मचारी संगठनों का कहना है कि आज के समय में बढ़ती महंगाई और इलाज के खर्चों को देखते हुए पुराने नियम नाकाफी हैं. ऐसे में इस बार कर्मचारियों की एक बड़ी और प्रमुख मांग 'ग्रेच्युटी' की रकम को तीन गुना तक बढ़ाने की है, जिससे रिटायरमेंट के बाद कर्मचारियों का भविष्य पूरी तरह सुरक्षित हो सके. आयोग ने तमाम प्रस्तावों पर गंभीरता से विचार करना शुरू कर दिया है. कर्मचारी संगठनों को उम्मीद है कि ग्रेच्युटी पर भी आयोग सकारात्मक सिफारिश करेगा और सरकार भी उचित विचार कर सकती है.
बहरहाल, यहां आसान तरीके से समझने की कोशिश करते हैं कि अभी कर्मचारियों को क्या मिलता है और नए प्रस्तावों में क्या मांगें रखी गई हैं.
अभी क्या है ग्रेच्युटी का नियम?
देश में मौजूदा व्यवस्था के तहत, किसी भी केंद्रीय सरकारी कर्मचारी को कम से कम 5 साल की नौकरी पूरी करने के बाद रिटायरमेंट या मौत की स्थिति में ग्रेच्युटी का लाभ मिलता है. इसका कैलकुलेशन ऐसे होता है-
- ग्रेच्युटी की रकम: अभी अधिकतम ग्रेच्युटी सिर्फ ₹25 लाख ही मिल सकती है.
- कैलकुलेशन का तरीका: हर 6 महीने की नौकरी के बदले 1 महीने के (मूल वेतन + महंगाई भत्ते) का एक-चौथाई (1/4) हिस्सा मिलता है.
- अधिकतम सीमा: यह कुल मिलाकर कर्मचारी की सैलरी के 16.5 गुना से ज्यादा नहीं हो सकती.
ग्रेच्युटी पर क्या हैं कर्मचारी संगठनों की मांगें?
अलग-अलग कर्मचारी संगठनों ने 8वें वेतन आयोग के सामने ग्रेच्युटी के नियमों को पूरी तरह बदलने का प्रस्ताव रखा है. सारे संगठनों की बात एक साथ नहीं की जा सकती. ऐसे में हम 3 बड़े संगठनों की मांग और उनके सुझावों को समझने की कोशिश करते हैं.
NC-JCM की बड़ी मांग: 75 लाख की सीमा
कर्मचारियों की इस सबसे बड़ी संस्था ने मांग की है कि ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा को 25 लाख से सीधे तीन गुना बढ़ाकर 75 लाख किया जाए. इसके साथ ही, कैलकुलेशन के लिए महीने को 30 दिन के बजाय 25 कार्य दिवसों के आधार पर गिना जाए, जिससे कर्मचारियों को ज्यादा फायदा मिले. उन्होंने 16.5 गुना की अधिकतम सीमा को भी पूरी तरह हटाने की मांग की है.
रेलवे कर्मचारियों का प्रस्ताव: 50 लाख की सीमा
IRTSA यानी भारतीय रेलवे तकनीकी पर्यवेक्षक संघ ने मांग की है कि कम से कम 50 लाख रुपये की अधिकतम सीमा तय की जाए. साथ ही, जो कर्मचारी देश सेवा में अपने जीवन के 33 साल या उससे ज्यादा का वक्त देते हैं, उन्हें उन्हें 32 गुना तक ग्रेच्युटी का भुगतान मिलना चाहिए.
समय-समय पर बदलाव की मांग: RSCWS
सीनियर सिटीजन और रिटायर्ड कर्मचारियों की संस्था (RSCWS) ने सुझाव दिया है कि ग्रेच्युटी की सीमा को सिर्फ एक बार न बढ़ाया जाए, बल्कि ऐसा सिस्टम बने जिससे महंगाई के हिसाब से यह अपने आप समय-समय पर बढ़ती रहे. चाहे कर्मचारी पुरानी पेंशन (OPS) में हो, न्यू पेंशन (NPS) में या फिर नई एकीकृत पेंशन योजना (UPS) में सभी को इसका समान लाभ मिलना चाहिए.
कर्मचारियों की तो चांदी हो जाएगी!
अगर 8वां वेतन आयोग इन सिफारिशों को मंजूर कर लेता है, तो ये सरकारी कर्मचारियों के लिए एक ऐतिहासिक फैसला होगा. इससे न सिर्फ रिटायर होने वाले बुजुर्गों को लंबी उम्र और बढ़ती मेडिकल लागतों से निपटने में बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी, बल्कि मौजूदा समय में नौकरी कर रहे कर्मचारियों का मनोबल भी बढ़ेगा.
फिलहाल ये संगठनों की मांगें हैं. अब गेंद 8वें वेतन आयोग के पाले में है. आयोग को सरकार के खजाने और बजट को ध्यान में रखते हुए इन मांगों पर अंतिम फैसला लेना है. उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार ग्रेच्युटी के नियमों में बड़ा और सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है.
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