भारत में क्रिकेट महज एक खेल नहीं बल्कि बच्चों और युवाओं के लिए एक सपना हैं और उस सपने का शिखर हैं टीम इंडिया के लिए खेलना. आपको पता है की भारत में बच्चे दिन के समय में स्कूल का बैग तो शाम के समय में क्रिकेट का किट बैग अपने कंधे पर लिए जाते हुए दीखते हैं और उनकी आंखों में एक सपना हटा हैं की मैं भी देश के लिए खेलूंगा. एक शानदार भविष्य हो जायेगा लेकिन सालों की मेहनत के बाद जरुरी नहीं की सफलता आपके कदमों में हो. ऐसे में क्या क्रिकेट के मैदान पर आप गेंदबाज या बल्लेबाज नहीं बन पाते हैं तो क्या आपका भविष्य तब भी मैदान पर बीत सकता हैं तो इसका जवाब हैं हां, क्योंकि कई ऐसे विकल्प हाल के समय में आ चुके हैं जिसको लेकर आप खेल में भी अपना भविष्य बना सकते हैं.
हकीकत यह है कि क्रिकेट अब सिर्फ बल्लेबाजों और गेंदबाजों का खेल नहीं रहा. मैदान पर जो 22 खिलाड़ी दिखते हैं, उनके पीछे भी एक पूरी टीम काम करती है.
किसी खिलाड़ी की तकनीक सुधारने वाला कोच होता है. किसी मैच की बारीकियों पर नजर रखने वाला वीडियो एनालिस्ट. हर रन और हर विकेट का रिकॉर्ड रखने वाला स्कोरर. मैदान पर फैसले लेने वाला अंपायर. चोट लगने पर खिलाड़ी को वापस मैदान तक पहुंचाने वाला फिजियो. टीम की फिटनेस संभालने वाला स्ट्रेंथ एंड कंडीशनिंग कोच.
आज आईपीएल से लेकर घरेलू क्रिकेट तक शायद ही कोई टीम हो जो डेटा और वीडियो एनालिसिस का इस्तेमाल न करती हो. यही वजह है कि क्रिकेट में एनालिस्ट और सपोर्ट स्टाफ की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है.
दूसरी तरफ डिजिटल दौर ने भी नए रास्ते खोले हैं. कई लोग क्रिकेट पर लिखकर, कमेंट्री करके, यूट्यूब चैनल चलाकर या सोशल मीडिया के जरिए ही अपना करियर बना रहे हैं. क्रिकेट देखने और समझने का शौक भी अब पेशे में बदला जा सकता है.
यही वजह है कि अगर कोई खिलाड़ी बड़े मुकाम तक नहीं पहुंच पाता, तो इसका मतलब यह नहीं कि क्रिकेट उसके जीवन से खत्म हो गया. खेल के आसपास भी एक ऐसी दुनिया है, जहां मौके कम नहीं हैं. कई बार मैदान के बीच में खड़ा खिलाड़ी सबसे ज्यादा दिखाई देता है, लेकिन उसके पीछे काम कर रहे लोग भी उतने ही जरूरी होते हैं. क्रिकेट का दायरा अब इतना बड़ा हो चुका है कि इसमें अपने लिए जगह तलाशने वालों के पास पहले से कहीं ज्यादा विकल्प हैं.
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