विराट कोहली (Virat Kohli) ने हाल ही में एक पॉडकास्ट में टेस्ट क्रिकेट से हटने और अपने इस फैसले पर असर डालने वाले दबावों के बारे में खुलकर बात की है. विराट ने पॉडकास्ट में कहा था कि इतने लंबे समय तक क्रिकेट खेलने के बाद हर मैच में अपनी अहमियत साबित करने के दबाव ने उन्हें टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने को मजबूर किया. पूर्व क्रिकेटर रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) ने कोहली के रुख का समर्थन किया है. आर अश्विन ने अपने यूट्यूब चैनल पर कहा, 'विराट ने पॉडकास्ट में कहा कि मुझे अपना काम किसी को साबित करने की जरूरत नहीं है. यह बिल्कुल सही है. मुझे भी ऐसा ही महसूस हुआ था. साबित करने के लिए कुछ भी नहीं बचा था. इतने सालों तक खेलने और भारत के लिए इतने मैच जीतने के बाद विराट को किसे साबित करने की जरूरत है?'
अश्विन ने कहा, 'एक क्रिकेटर के करियर में एक ऐसा दौर आता है जब बाहरी लोगों की तारीफ या मंजूरी मायने रखना बंद कर देती है. बाहर से लोग जो कहते हैं, वह तो उनका काम है. जब आप युवा होते हैं, तो अक्सर यह कहने की जोरदार इच्छा होती है, 'मैं तुम्हें गलत साबित कर दूंगा.' लेकिन समझदारी और ज्ञान तब आता है जब आपको एहसास होता है कि लड़ाई किसी और से नहीं, बल्कि खुद से है. जिस पल आपको यह एहसास होता है, जिंदगी बहुत आसान हो जाती है. मुझे लगता है कि विराट उस मुकाम पर पहुंच गए हैं. पछतावों को पीछे छोड़ना आसान नहीं होता.'
विराट ने हाल में एक पॉडकास्ट में कहा था कि बार-बार ऐसी स्थितियों में डाला जाना जहां उन्हें अपनी अहमियत साबित करने के लिए मजबूर महसूस होता था, उसका उन पर बुरा असर पड़ा था. आप या तो मुझे पहले ही दिन बता दो कि मैं उतना अच्छा नहीं हूं या मेरी जरूरत नहीं है. अगर मुझे यह महसूस कराया जाता है कि मुझे लगातार अपनी काबिलियत और अहमियत साबित करनी होगी, तो मैं उस माहौल में नहीं रह सकता.
कोहली ने कहा था कि अपने करियर के इस पड़ाव पर उन्हें अब किसी की मंजूरी पाने या आलोचकों को चुप कराने की कोई जरूरत महसूस नहीं होती.
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