Ravichandran Ashwin on his Retirement: पूर्व भारतीय स्टार स्पिन ऑलराउंडर रविचंद्रन अश्विन ने अपने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास को लेकर एक बेहद ईमानदार और जोशीला पहलू साझा किया है. उन्होंने बताया कि यह फैसला अचानक नहीं था, बल्कि एक खास पल ने उन्हें यह एहसास दिलाया कि अब टीम में उनकी भूमिका खत्म हो रही है. साल 2024 में ऑस्ट्रेलिया दौरे के दौरान अश्विन टीम के सीनियर स्पिनर के रूप में मौजूद थे, लेकिन पर्थ टेस्ट में उनसे पहले युवा वाशिंगटन सुंदर को मौका दिया गया. यही वह क्षण था, जिसने उन्हें अंदर से झकझोर दिया. अश्विन ने स्वीकार किया कि उसी समय उन्हें समझ आ गया था कि भारतीय टेस्ट टीम में उनका सफर अब अपने अंतिम पड़ाव पर है. सीरीज खत्म होने के बाद उन्होंने संन्यास लेने का फैसला कर लिया.
कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान इस अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने साफ किया कि यह उनका खुद का फैसला था. उस समय टीम मैनेजमेंट पर उठने वाले सवाल और जबरदस्ती संन्यास लेने जैसी चर्चाओं को उन्होंने पूरी तरह खारिज कर दिया. जगह पर हेड कोच गौतम गंभीर के समर्थन में बोले हुए अश्विन ने कहा कि गंभीर हमेशा टीम को किसी भी खिलाड़ी से ऊपर रखते हैं और जीत का श्रेय पूरी टीम को देते हैं.
अश्विन ने यह भी कहा कि भारतीय क्रिकेट किसी एक या दो खिलाड़ियों पर निर्भर नहीं है. उन्होंने विराट कोहली और रोहित शर्मा के साथ कई सालों को याद करते हुए बताया कि उस दौर की सबसे बड़ी खासियत टीम के भीतर का आपसी भरोसा और एकजुटता थी. टीम में कोई भी खिलाड़ी हार का ठीकरा दूसरे पर नहीं फोड़ता था सबका एक ही लक्ष्य था, भारत को जीत दिलाना.
अपने शानदार करियर पर नजर डालें तो अश्विन ने 106 टेस्ट मैचों में 537 विकेट के लिए और कई बार मैच जिताऊ प्रदर्शन किया. हालांकि, वे मौजूदा टीम को लेकर भी एक अहम बात कही. उनके अनुसार, टीम इस समय बदलाव के दौर से गुजर रही है. बल्लेबाजी को लेकर उन्हें ज्यादा चिंता नहीं है, लेकिन गेंदबाजी को और मजबूत बनाने की जरूरत जरूर है.
अश्विन की यह कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी के संन्यास की नहीं, बल्कि उस समझ की भी है, जब एक दिग्गज खुद यह पहचान लेता है कि अब नई पीढ़ी के लिए जगह बनाने का समय आ गया है.
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