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बेटे को नहीं मिला MLC टिकट, अब क्या करेंगे उपेंद्र कुशवाहा? दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर मंडराया संकट!

दीपक प्रकाश किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं, जिससे उनके मंत्री पद पर सवाल खड़ा हो गया है. हालांकि, नियमों के तहत वे बिना सदन सदस्य बने भी 6 महीने तक मंत्री रह सकते हैं.

बेटे को नहीं मिला MLC टिकट, अब क्या करेंगे उपेंद्र कुशवाहा? दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर मंडराया संकट!
कुशवाह अपनी पार्टी का अस्तित्व बचा कर रखना चाहते हैं
  • बिहार सरकार में मंत्री उपेंद्र कुशवाह के बेटे दीपक प्रकाश को विधान परिषद में एनडीए ने टिकट नहीं दिया है.
  • उपेंद्र कुशवाह बिना सदन के सदस्य बने भी छह महीनों तक मंत्री पद पर बने रह सकते हैं, बीजेपी सूत्रों का कहना है.
  • बीजेपी ने कुशवाह से पार्टी का विलय करने को कहा था, लेकिन उन्होंने अपनी पार्टी का अस्तित्व बचाना पसंद किया.
नई दिल्ली:

राष्ट्रीय लोक मोर्चा पार्टी के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाह को बीजेपी की ओर से एक कड़ा संदेश दिया गया है. बिहार सरकार में मंत्री उनके बेटे दीपक प्रकाश को एनडीए ने विधान परिषद में नहीं भेजा. वे किसी भी सदन के सदस्य नहीं हैं. ऐसे में उनके मंत्री बने रहने पर प्रश्न चिन्ह लग गया है. हालांकि, बीजेपी सूत्रों ने इशारा दिया है कि वे बिना किसी सदन का सदस्य बने भी 6 महीनों तक मंत्री रह सकते हैं.

उपेंद्र कुशवाह ने बुधवार को दिल्ली के भारत मंडपम में एनडीए की बैठक में हिस्सा लिया था. बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व की तारीफ भी की थी. हालांकि, बिहार से जुड़े सवालों के जवाब देने से वे बचते नजर आए. उन्होंने अपनी नाराजगी की खबरों को गलत बताया. उन्होंने कहा कि अगर वे नाराज होते तो एनडीए की बैठक में क्यों आते?

पार्टी विलय के लिए कुशवाह नहीं?

सूत्रों के मुताबिक बीजेपी ने कहा था कि वे अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में कर लें. उन्होंने ऐसा करने से मना कर दिया था. बाद में बीजेपी ने यह भी प्रस्ताव दिया था कि वह उनके बेटे को अपने टिकट पर विधान परिषद में भेजने को तैयार है. कुशवाह इसके लिए तैयार नहीं हुए क्योंकि इसका मतलब भी यही होता कि उनके बेटे बीजेपी के सदस्य बन गए हैं. कुशवाह अपनी पार्टी का अस्तित्व बचा कर रखना चाहते हैं. 

 परिवारवाद का आरोप, कुशवाह से विधायक भी नाराज 

परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप झेल रहे कुशवाह से उनकी पार्टी के कई नेता और विधायक भी नाराज हैं. विधानसभा चुनाव में उनके चार विधायक जीत कर आए थे, जिनमें से एक उनकी पत्नी है. बाद में उन्होंने अपने बेटे को मंत्री बनवा दिया, जिससे बाकी तीन विधायक नाराज हुए. विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी से हुए समझौते में तय किया गया था कि राष्ट्रीय लोक मोर्चा को छह सीटें दी जाएंगी और बीजेपी के हिस्से से बिहार विधान परिषद में एक सीट भी मिलेगी.

कुशवाह विधानसभा चुनाव से पहले हुए इसी समझौते की बीजेपी को याद दिला रहे हैं. हालांकि, बाद में बीजेपी ने खुद उपेंद्र कुशवाह को भी राज्य सभा भेजा है. अब कुछ नेता सवाल उठा रहे हैं कि केवल चार विधायक की पार्टी को एक राज्य सभा और एक विधान परिषद की सीट क्यों दी जाए. उनका यह भी कहना है कि सम्राट चौधरी के मुख्यमंत्री बनने के बाद कुशवाह समुदाय को बड़ा राजनीतिक संदेश और प्रतिनिधित्व दिया जा चुका है. ऐसे में कुशवाह को अलग से नुमाइंदगी देने में क्या तुक है. वे यह भी कहते हैं कि कुशवाह के लिए यही बेहतर होगा कि वे अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में कर लें. उनके बेटे के बारे में कहा जा रहा है कि संभवत उनका मंत्री बने रहना कठिन होगा. हालांकि, अगले साल राज्यपाल की ओर से 12 नेताओं को विधान परिषद में मनोनीत किया जाना है और तब शायद उनका नंबर आए. लेकिन क्या तब तक वे मंत्री बने रह पाएंगे, यह एक बड़ा सवाल है.

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Bihar Mlc Election 2026, Deepak Prakash, Upendra Kushwaha
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