Jammu and Kashmir team in Ranji Trophy : औकिब नबी (54 रन देकर पांच विकेट) और सलामी बल्लेबाज कामरान इकबाल के शानदार प्रदर्शन से जम्मू-कश्मीर की टीम ने कर्नाटक के खिलाफ विशाल बढ़त हासिल करने में सफल रही जिसके कारण रणजी ट्रॉफी खिताब जीतने में सफल रही, कर्नाटक और जम्मू-कश्मीर के बीच मैच ड्रा रहा और पहली पारी के आधार पर मिली बढ़त के कारण जम्मू-कश्मीर की टीम की टीम रणजी ट्रॉफी का खिताब पहली बार जीतने में सफल रही.
Historic moment for 𝗝𝗮𝗺𝗺𝘂 𝗮𝗻𝗱 𝗞𝗮𝘀𝗵𝗺𝗶𝗿 Team as they won their 1st ever Ranji Trophy title! 🏆
— 𝑺𝒉𝒆𝒃𝒂𝒔 (@Shebas_10dulkar) February 28, 2026
After nearly 67 years since their debut, overcoming political unrest, poor infrastructure, financial challenges and limited exposure, with players even traveling long… pic.twitter.com/NebsleQD0f
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मैच में नबी ने सत्र का सातवीं बार पांच विकेट झटकने का कारनामा किया जिससे कर्नाटक की टीम पहली पारी में 293 रन पर सिमट गई और जम्मू-कश्मीर ने पहली पारी में 291 रन की बढ़त हासिल की. कर्नाटक की पारी में पूर्व कप्तान मयंक अग्रवाल (266 गेंद में 160 रन) के शतक का अहम योगदान रहा क्योंकि अन्य खिलाड़ी संभलकर नहीं खेल सके. पर नबी के पांच विकेट अग्रवाल के शानदार शतक पर भारी पड़े. जम्मू-कश्मीर का यह तेज गेंदबाज बेहतरीन फॉर्म में हैं जिससे टीम के जीतने की उम्मीद बढ़ गई है.
जम्मू और कश्मीर की टीम की सफलता के पीछे कौन?
अब जब जम्मू और कश्मीर की टीम इतिहास रचने के करीब है तो इसके पीछे असली हीरो कौन है इसको लेकर बातें शुरू हो गई है. कोच अजय शर्मा के योगदान को लेकर बात हो रही है. इसमें कोई शक नहीं है कि अजय शर्मा की कोचिंग में टीम ने बेहतरीन खेल दिखाया है और दुनिया को चौंकाया है लेकिन असली में जम्मू और कश्मीर की टीम के यहां तक पहुंचाने में भारतीय क्रिकेट बोर्ड अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर क्रिकेट के पूर्व प्रशासक मिथुन मन्हास का हाथ रहा है.
दरअसल, अजय शर्मा साल 2022 के बीच में थाईलैंड में फ़ैमिली हॉलिडे पर थे, तभी उनका फ़ोन बजा. लाइन पर अभी के BCCI प्रेसिडेंट मिथुन मन्हास थे, जो उनके पुराने टीम-मेट थे और उस समय J&K में क्रिकेट डेवलपमेंट के हेड थे. शर्मा ने दिल्ली की एज-ग्रुप टीमों को अच्छी सफलता के साथ कोचिंग दी थी. यश ढुल को एज-ग्रुप से इंडिया अंडर-19 की कप्तानी तक पहुंचाने में उनकी अहम भूमिका रही थी.
ज़ाहिर है, उन्होंने सीनियर दिल्ली टीम में जाने का सपना देखा था. जब ऐसा नहीं हुआ तो शर्मा मैच-फ़िक्सिंग केस में अपनी कोर्ट की लड़ाइयों को इसका एक कारण बताते हैं, तो उन्होंने जो भी उनके रास्ते में आया, उसे करने का फ़ैसला किया.
शर्मा कहते हैं, "ईमानदारी से कहूं तो, मैं जॉइन करने का इच्छुक नहीं था, लेकिन दिल्ली के साथ, मैं कहीं नहीं जा रहा था. शायद कोर्ट केस एक रुकावट थे, भले ही मैं बरी हो गया था. इसलिए मिथुन के मनाने के बाद मैंने J&K का ऑफ़र स्वीकार कर लिया."
J&K में शर्मा के शुरुआती दिन उतार-चढ़ाव भरे थे. उन्हें तुरंत टीम के IPL खिलाड़ियों और बाकी टीम के बीच मतभेद का एहसास हो गया, और उन्होंने साफ़ कर दिया कि J&K टीम में "स्टार कल्चर" नहीं चलेगा.
J&K टीम में बदलाव रातों-रात नहीं हुए. ये तीन साल में हुए - कोच के लिए यह एक बहुत कम मिलने वाली सुविधा है, खासकर J&K में, जो लंबे समय से एडमिनिस्ट्रेटिव दिक्कतों से जूझ रहा है.
शर्मा कहते हैं, "मुझे यह मौका देने का क्रेडिट मन्हास और उनकी टीम को जाता है,जब आप किसी टीम के साथ इतने लंबे समय तक काम करते हैं, तो वह घर जैसा लगने लगता है.आप समझ बनाते हैं. आप रिश्ते बनाते हैं."
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