भारत-न्यूजीलैंड के बीच सीरीज का तीसरा टी20 अंतरराष्ट्रीय वेलिंग्टन में होना है. इसके अलावा टीम इंडिया टेस्ट सीरीज के पहले मैच भी इसी मैदान पर खेलेगी. हालांकि, इस मैदान पर खिलाड़ियों को हवा से भी दो चार होना पड़ेगा. तीन तरफ से खुला बेसिन रिज़र्व ग्राउंड अपनी लोकेशन के कारण काफी अलग है और यहां तेज हवाएं गेंदबाजों को काफी परेशान करती हैं. वहीं भारत के बॉलिंग कोच मोर्ने मोर्केल के पास टेस्ट स्पेशलिस्ट खिलाड़ियों के लिए एक खास टिप है, जो अभी तक न्यूजीलैंड नहीं पहुंचे हैं. उनकी सलाह है,"तेज हवा का सामना करने के लिए एक बहुत तेज चलने वाले पंखे के पास खड़े हों." यह हवा हमेशा से ही बाहर से आने वाली टीमों के लिए परेशानी का सबब रही है.
भारत के तीसरे T20 इंटरनेशनल मैच से पहले मोर्ने मोर्केल ने एक दिलचस्प बात कही,"हमने वेलिंग्टन के बारे में बात की है, खासकर दौरे की शुरुआत से पहले ही हमने खिलाड़ियों के दिमाग में यह बात डाल दी थी. कल रात मेरी भारत में मौजूद कुछ खिलाड़ियों से बात हुई, उन्होंने पूछा कि वहां के हालात कैसे हैं. मैंने उनसे कहा,'अपने घर पर एक बहुत तेज़ चलने वाला पंखा जरूर रखें. उस पंखे के सामने खड़े होना ही आपकी तैयारी होगी'."
भारतीय टीम न्यूज़ीलैंड की राजधानी में है, जिसे 'विंडी वेलिंग्टन' भी कहा जाता है. सोमवार को यहां हवा 120 किमी प्रति घंटे की रफ़्तार से चल रही थी. भले ही ब्लैक कैप्स के खिलाफ तीसरा T20I मंगलवार को खेला जाना है, लेकिन मोर्केल और हेड कोच गौतम गंभीर बड़ी तस्वीर पर नज़र रखे हुए हैं.
मोर्केल ने कहा,"यह हवा कुछ अलग ही तरह की चुनौती है. आज सुबह मैं होटल में था और पूरी इमारत हिल रही थी. इसलिए मुझे लगता है कि यह एक नई चीज है जिसे हमें अपने खिलाड़ियों के अनुभव में शामिल करना होगा, ताकि वे कम समय में ही इसके आदी हो सकें."
मोर्केल ने कुछ व्यावहारिक समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा,"हमारे लिए चुनौती यह है कि हम इसका डटकर सामना करें, न कि कोई बहाना बनाएं. यह हवा कई चीजों पर असर डाल सकती है - जैसे कि बैटिंग, आपका स्टांस, क्रीज़ पर आपकी पोज़िशन और कई अन्य चीजें."
अपने खेलने के दिनों में, मोर्केल को भी बेसिन रिजर्व में बॉलिंग करते समय ऐसी ही दिक्कतों का सामना करना पड़ा था. उन्होंने कहा कि केवल तीन-चार दिन की ट्रेनिंग में इन हालात के हिसाब से खुद को ढालना बहुत मुश्किल होता है.
उन्होंने कहा,"जब मैं दक्षिण अफ्रीका के साथ यहां दौरे पर आया था, तो हमने यहां की परिस्थितियों के अनुकूल ढलने के लिए कुछ तरीके अपनाए थे. मुझे नहीं लगता कि आप दो, तीन या चार दिनों में पूरी तरह से इसके आदी हो सकते हैं. इसलिए, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप पूरी स्थिति को कैसे देखते हैं. या तो आप इसे एक चुनौती के रूप में देख सकते हैं, या फिर इसे नकारात्मक मानकर निराश हो सकते हैं."
"उम्मीद है कि हम खिलाड़ियों को ऐसी मानसिक स्थिति में ला सकेंगे जहां वे इस चुनौती का सामना करने के लिए उत्साहित हों. आखिरकार, किसी न किसी को तो आगे आकर हवा के विपरीत गेंदबाजी करनी ही होगी, क्योंकि हम ऐसा नहीं कर सकते कि चारों गेंदबाज हवा के साथ गेंदबाजी करें."
न्यूजीलैंड के ऑलराउंडर माइकल ब्रेसवेल भी समझते हैं कि हवा विपक्षी टीम के लिए किस तरह की मुश्किलें पैदा कर सकती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी टीम इस स्थिति का पूरा फायदा उठाने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी. ब्रेसवेल ने याद करते हुए बताया,"यह दिलचस्प है. बंद स्टेडियमों में हवा थोड़ी घूमती रहती है, इसलिए यह बेसिन जैसे थोड़े खुले मैदानों जितनी स्थिर नहीं होती. यहां हमारा एक मैच ऐसा भी था, जहाँ एक छोर से कैमरे बंद करने पड़े थे क्योंकि हवा बहुत तेज चल रही थी."
लेकिन ब्रेसवेल ने ऐसी चुनौतियों का डटकर सामना करने के मजे के बारे में भी बात की. पूर्व अफ्रीकी गेंदबाज ने आगे कहा,"यहां खेलने का असली मजा यही है कि आपको अलग-अलग तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की यही तो सबसे बड़ी खूबी है. आप दुनिया भर में जाते हैं और आपको अलग-अलग तरह की चुनौतियों से निपटना पड़ता है. स्टेडियम में हवा घूमती रहती है, इसलिए ऐसा जरूरी नहीं है कि कोई एक ऐसा छोर हो जिसे आप निशाना बना सकें-जैसा कि अक्सर खुले स्टेडियमों में होता है."
"इसलिए, अहम बात यह है कि आप उन पलों को पहचानें जब हवा थोड़ी शांत हो, या एक बल्लेबाज के तौर पर हवा आपकी दिशा में बह रही हो. वहीं, गेंदबाजी करते समय आपको थोड़ा अधिक रक्षात्मक रुख अपनाना पड़ सकता है." जब उनसे टेस्ट मैच की रणनीति के बारे में पूछा गया, तो ब्रेसवेल ने अपनी योजना का खुलासा करने से परहेज किया.
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