ट्रक हादसे में अपना एक पैर गंवाने वाली मानसी जोशी ने एशियाई पैरा गेम्स 2026 में गोल्ड मेडल जीता है. उन्होंने थुलासिमथी मुरुगेसन के साथ मिलकर महिला युगल SL3-SU5 इवेंट का गोल्ड मेडल जीता है. भारतीय जोड़ी ने फाइनल में चीन की यांग किउशिया और शियाओ जुक्सियान को 21-16, 21-13 से हराकर खिताब अपने नाम किया. विश्व चैंपियनशिप की ब्रॉन्ज मेडल विजेता भारतीय जोड़ी ने 2025 एशियन चैंपियनशिप फाइनल में मिली हार का भी हिसाब बराबर कर लिया.
थुलासिमथी और मानसी ने उसी चीनी जोड़ी को फाइनल में हराकर गोल्ड जीता. इस जीत के साथ भारत ने नागोया एशियाई पैरा खेलों में 28वां गोल्ड मेडल हासिल किया और हांगझोऊ 2022 के गोल्ड मेडल रिकॉर्ड की बराबरी कर ली.
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एक हादसे ने बदल दी थी जिंदगी
राजकोट में जन्मी मानसी जोशी बचपन से ही बैडमिंटन खेलती थीं. उन्होंने मुंबई विश्वविद्यालय के केजे सोमैया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग से इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और एक इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर के रूप में काम शुरू किया, लेकिन दिसंबर 2011 में एक सड़क हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी.
ट्रक के नीचे आ गया था पैर
22 साल की उम्र में एक सुबह ऑफिस जाते समय फ्लाईओवर के नीचे यू-टर्न लेते वक्त गलत दिशा से आ रहे एक ट्रक ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी. हादसे में उनका बायां पैर बुरी तरह कुचल गया. शुरुआती अस्पताल में एंबुलेंस और सर्जन की सुविधा न होने के कारण उन्हें दूसरे अस्पताल ले जाया गया, जहां करीब नौ घंटे बाद उनका सही इलाज शुरू हो सका.
45 दिन अस्पताल में रहीं
डॉक्टरों ने कई सर्जरी के जरिए पैर बचाने की कोशिश की, लेकिन गैंग्रीन फैलने के बाद उनके बाएं पैर को काटना पड़ा. करीब 45 दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद मानसी को नई जिंदगी की शुरुआत करनी पड़ी.
कृत्रिम पैर के सहारे लौटीं
मानसी ने 2012 में कृत्रिम पैर की मदद से फिर से चलना शुरू किया. रिहैब के दौरान उन्होंने एक इंटर-कंपनी बैडमिंटन टूर्नामेंट में हिस्सा लिया और उसे जीत भी लिया. इसके बाद उन्होंने स्कूबा डाइविंग सीखी और 2014 में प्रोफेशनल पैरा बैडमिंटन खिलाड़ी बनने का फैसला किया.
विश्व चैंपियन से एशियन पैरा गेम्स गोल्ड तक
पूर्व विश्व नंबर-1 और विश्व चैंपियन रह चुकी मानसी जोशी ने अपने संघर्ष को ताकत में बदला. नागोया एशियाई पैरा खेलों में थुलासिमथी मुरुगेसन के साथ जीता गया यह गोल्ड मेडल उनके जज्बे, मेहनत और कभी हार न मानने वाले स्वभाव की एक और बड़ी मिसाल है.
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