"कुछ को तकलीफ होगी...होने दो..." कपिल देव ने बीसीसीआई सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट के विवाद के बीच दिया बड़ा बयान

Kapil Dev said on Ishan Kishan and Shreyas Iyer: भारत को पहला विश्व कप दिलाने वाले कपिल ने इस मुद्दे पर साफ किया है कि यह क्रिकेट बोर्ड ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए एक कदम आगे बढ़ाया है.

बीसीसीआई ने अपने सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से ईशान किशन और श्रेयस अय्यर को बाहर कर खिलाड़ियों को साफ संदेश दिया है कि उन्हें रणजी ट्रॉफी में खेलना ही होगा. ईशान किशन लगातार रणजी से दूरी बनाए हुए थे. ईशान किशन ने दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दौरे से नाम वापस लेने के बाद से रणजी से दूरी बनाए रखी. इस दौरान राहुल द्रविड़ ने साफ किया था कि ईशान को टीम में वापसी के लिए रणजी खेलना होगा. लेकिन ईशान किशन आईपीएल के लिए तैयारी करने के लिए बड़ौदा में पांड्या बंधुओं के साथ अभ्यास करते नजर आए. बीसीसीआई ने साफ किया था कि बोर्ड से केन्द्रीय अनुबंध प्राप्त खिलाड़ियों को रणजी खेलना होगा. लेकिन ईशान किशन रणजी से दूर रहे.

दूसरी तरफ इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के शुरुआती दो मैच खेलने के बाद चोट के चलते टीम इंडिया से बाहर हुए श्रेयस अय्यर ने भी रणजी से दूरी बनाई. मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि श्रेयस अय्यर ने पीठ में दर्ज की शिकायत की थी, लेकिन एनसीए ने साफ किया कि अय्यर चोटिल नहीं थे. इसके बाद बीसीसीआई ने इन दोनों खिलाड़ियों को सेंट्रल कॉन्ट्रैक्ट से बाहर करने का फैसला लिया. इसके बाद से इस मुद्दों को कई दिग्गजों ने अपनी राय दी है.


वहीं अब भारत को पहला विश्व कप दिलाने वाले कपिल ने इस मुद्दे पर साफ किया है कि यह क्रिकेट बोर्ड ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए एक कदम आगे बढ़ाया है. कपिल देव ने कहा,"मैं बहुत खुश हूं कि क्रिकेट बोर्ड ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट के लिए एक कदम आगे बढ़ाया है. लड़कों को वह जरूर खेलना चाहिए, यह देश के लिए अच्छा है.' जो भी देश के लिए अच्छा है, मुझे उसमें ख़ुशी होती है. हां, कुछ खिलाड़ियों को नुकसान होगा...कुछ को तकलीफ होगी...होने दो, लेकिन देश से बढ़कर कोई नहीं है. बहुत अच्छा."

बीसीसीआई ने केंद्रीय अनुबंधों की घोषणा करते हुए खिलाड़ियों से घरेलू प्रतियोगिताओं को उचित महत्व देने का आग्रह किया. बीसीसीआई ने केंद्रीय अनुबंध का ऐलान को लेकर अपनी प्रेस रिलीज में कहा,"कृपया ध्यान दें कि वार्षिक अनुबंध के लिए श्रेयस अय्यर और ईशान किशन के नाम पर विचार नहीं किया गया." बीसीसीआई ने खिलाड़ियों से घरेलू क्रिकेट को प्राथमिकता देने को लेकर कहा,"बीसीसीआई ने सिफारिश की है कि सभी एथलीट उस अवधि के दौरान घरेलू क्रिकेट में भाग लेने को प्राथमिकता दें जब वे राष्ट्रीय टीम का प्रतिनिधित्व नहीं कर रहे हों."

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