IPL 2022: जानिए कितनी है आईपीएल की सभी 10 टीमों की ब्रांड वेल्यू, कहां से कितना पैसा मिलता है बीसीसीआई को

IPL 2022:हालिया समय में कुछ बड़े विदेशी फ्रेंचाइजियों का टीमों में रुचि दिखाना या राजस्थान रॉयल्स में अमेरिकी एनबीए और एनएफएल जैसे बड़े सुपरस्टारों का निवेश यह बताता है कि इंडियन प्रीमियर लीग को अब वैश्विक नजरिए से कैसे देखा जाने लगा है

IPL 2022: जानिए कितनी है आईपीएल की सभी 10 टीमों की ब्रांड वेल्यू, कहां से कितना पैसा मिलता है बीसीसीआई को

आईपीएल की प्रतीकात्मक तस्वीर

खास बातें

  • आईपीएल की 15 सालों में कई गुना बढ़ गयी
  • कई हजार करोड़ रुपये कीमत है आईपीएल की
  • स्पॉन्सरों से बरसता है छप्पर फाड़ कर पैसा
नई दिल्ली:

दस टीमों की भागीदारी वाला इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2022) का पहला चरण अपने चरम की ओर चल पड़ा है. साल 2008 में आगाज के बाद से आईपीएल ने हर लिहाज से दिन-दूनी चार चौ गुनी तरक्की की  है. और आज यह दुनिया के सबसे महंगे ब्रांडों में एक लीग बन चुकी है. वित्तीय लिहाज से इसका ऐसा आकार बढ़ा है. हालिया समय में कुछ बड़े विदेशी फ्रेंचाइजियों का टीमों में रुचि दिखाना या राजस्थान रॉयल्स में अमेरिकी एनबीए और एनएफएल जैसे बड़े सुपरस्टारों का निवेश यह बताता है कि इंडियन प्रीमियर लीग को अब वैश्विक नजरिए से कैसे देखा जाने लगा है.  अपने 15 साल के सफर के बाद आईपीएल का खासा स्वरूप बदला है. चलिए हम आपको आईपीएल की वित्तीय पहलू से कुछ खास बातें बताते हैं

1. इतने हजार करोड़ कीमत है आईपीएल की
साल 2021 से आईपीएल की कीमत में 4.7 प्रतिशत का इजाफा हुआ है. यह इजाफा पिछले दो साल में कोविड-19 के भयावह हालात के बाद हुआ है. साल 2021 के आईपीएल के आयोजन के बाद बाजार  के विशेषज्ञों ने आईपीएल की कीमत 35950..53 करोड़ रुपये आंकी थी. और उम्मीद है कि इस साल के आयोजन के बाद इसकी कीमत और ज्यादा बढ़ेगी. 

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2.  बेतहाशा बढ़ती प्रायोजन राशि
वर्तमान में आईपीएल का मुख्य प्रायोजन टाटा ग्रुप है. यह ग्रुप जारी और अगले साल के लिए 670 करोड़ रुपये चुकाएगा, जो आईपीएल इतिहास की अभी तक की सबसे बड़ी प्रायोजन राशि है. मतलब यह है कि ग्रुप साल साल बीसीसीआई को 355 करोड़  रुपये देगा. वहीं पिछले साल साल 2018 से लेकर 2022 तक मीडिया राइट्स (टीवी+डिजिटल+इंटरनेट) राइट्स 16347.50 करोड़ रुपये में बिके थे. वहीं, अगले महीने लगने जा रहे अगले पांच साल के अधिकारियों की कीमत पचास हजार करोड़ रुपये छू सकती है.

3. अंपायरों के प्रायोजन से आती है इतनी  रकम
आप अंपायरों की टी-शर्ट पर आगे-पीछे और कैप पर कंपनी का बड़ा नाम लिखे देखते होंगे. फिलहाल यह अधिकार पेटीएम के पास हैं. और इसके लिए पेटीएम का बीसीसीआई के साथ पांच साल का 326.80 करोड़ रुपये का करार है. मतलब पेटीएम हर साल भारतीय बोर्ड को करीब 65 करोड़ रुपये का भुगतान करती है. 

4. एसोसिएट्स प्रायोजकों से आता है इतना पैसा
मुख्य प्रायोजक टाटा ग्रुप के अलावा आईपीएल के अन्य एसोसिएट्स स्पॉन्सर भी हैं. ये ड्रीम-11, अपस्टोक्स, अनअकादमी, क्रेड, रूपे, स्विगी हैं. इन सभी से मिलाकर बीसीसीआई को करीब 220 करोड़ रुपये हर साल आता है. इसके तहत मैच के बाद अलग-अलग तरह की स्पॉन्सशिप हैं.  इसके अलावा सीएट मैच के दौरान चार स्ट्रेटिजिक टाइम-आउट के लिए हर साल तीस करोड़ रुपये देती है. 

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5. दुनिया की प्रसिद्ध पत्रिका फोर्ब्स के अनुसार आईपीएल की 8 टीमों की ब्रांड वेल्यू वर्तमान में इतनी है. राशि रुपयों में है

1. मुंबई इंडियंस-9900 करोड़  

2.चेन्नई सुपर किंग्स-8800 करोड़

3. केकेआर- 8400 करोड़

4. लखनऊ- 8200 करोड़

5. दिल्ली कैपिटल्स- 7900 करोड़

6. आरसीबी-7800 करोड़

7. राजस्थान-7600 करोड़

8. हैदराबाद-7400 करोड़

9. पंजाब- 7000 करोड़

10. गुजरात-6000 करोड़
 

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