T20 World Cup 2026 में वीरवार का दिन टीम इंडिया के लिए खेले जा रहे वर्ल्ड कप में बहुत ही अहम है. सुपर-8 राउंड (super-8 round) में अपने दूसरे मुकाबले में जिंबाब्वे (Ind vs Zim) से भिड़ेगा. पहले मैच में दक्षिण अफ्रीका के हाथों मिली 76 रन और फिर विंडीज के जिंबाब्वे को 102 रन से पटखनी के बाद भारत के लिए हालात खासे जटिल हो गए हैं. और अब हालात ये है कि यहां से टीम इंडिया को ग्रुप-1 में नंबर-2 टीम बनने के लिए जीत से ज्यादा 'बहुत कुछ' हासिल करना है. हासिल क्या करना है, यह तो अलग बात है, लेकिन अगर टीम सूर्यकुमार को जीत से इतर यह हासिल करना है, या NRR का बॉस बनने की दिशा में कितना या किस गति से आगे सफर तय करना है, इसके लिए उसका टॉस जीतना हर हाल में जरूरी. और अगर ऐसा नहीं होगा, तो इसका सीधा-सीधा असर NRR पड़ेगा.
इसलिए जरूरी है टॉस की जीत!
मैच हालत की बात करें, तो आधी पारी तक आउटफील्ड फिसलन भरी हो जाती है. और पड़ने वाली ओस से गेंद खासी गीली हो जाती है. इससे बॉलर को ग्रिप करने में बहुत मुश्किल होती है. फेंकने कुछ जाते हैं, होता, कुछ है. फेंकने यॉर्कर जाते हैं, हो जाती फुलटॉस है. और इसका सीधा फायदा बल्लेबाजी करने वाली टीम को मिलता है. हालांकि, गेंद सतह पर पकड़ बनाती है, यह धीमा घुमाव लेती है, तो बल्लेबाज के धैर्य की परीक्षा होती है. पेसरों की गेंद भी स्किड (टप्पा पड़कर तेज उपर की ओर तेजी से उठती है) ,लेकिन इन तमाम पहलुओं के बावजूद ओस एक ऐसा पहलू है, जो बाद में बॉलिंग करने वाली टीम के लिए हालात मुश्किल बनाता है.
इस पहलू की अनदेखी कर ही नहीं सकते
यह पहलू NRR यानी नेट रन-रेट है. यह सही है कि जिंबाब्वे टीम इंडिया को जो भी लक्ष्य देगा, वह खासा मुश्किल होगा, लेकिन पहली पारी की तुलना में बाद में ऊपर बताए गए हालात की वजह से इसे हासिल करना न सान होगा. साथ ही, बड़ा पहलू यह है कि बाद में बैटिंग करने वाली को पता होगा कि उसे 'NRR विशेष' हासिल करने के लिए किस अंदाज में बैटिंग करनी है.
पहलू बनाते हैं जीत को सरल
ऊपर बताए गए दोनों खासकर सबसे पहले पहलुओं के कारण जब दूसरी पारी में बैटिंग सरल हो जाती है, या हालात स्पिनरों के खिलाफ फायदा उठाने का मौका देते हैं, तो साफ है की जीत भी कहीं सरल हो जाती है. और इसके लिए जरूरी है कि सिक्के की उछाल अनिवार्य रूप से हाथ में हो. और अगर जिंबाब्वे के खिलाफ अहम मुकाबले में सूर्यकुमार यादव ने टॉस नहीं जीता, तो न केवल बैटिंग के लिए हालात मुश्किल होंगे, बल्कि 'बॉस' (NRR की दिशा में) बनने में भी खासी मुश्किलें आएंगी.
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