राज्यसभा में बुधवार को बीस राज्यों के 59 सांसदों को विदाई दी गई. इनमें नौ महिला सदस्य शामिल हैं. इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि संसदीय लोकतंत्र में इनके योगदान को हमेशा याद किया जाएगा. प्रधानमंत्री श्री मोदी ने कहा कि चाहे सदस्य वापस लौटें या व्यापक सामाजिक सेवा में लग जाएं, उनका संचित अनुभव राष्ट्र के लिए अमूल्य संपत्ति बना रहेगा. उन्होंने कहा कि राजनीति के गतिशील क्षेत्र में यात्रा कभी समाप्त नहीं होती, क्योंकि भविष्य में अनुभवी नेताओं के लिए हमेशा नए अवसर विद्यमान रहते है.श्री मोदी ने बल देकर कहा, “राजनीति में कोई विराम नहीं होता; आपका अनुभव और योगदान राष्ट्र के जीवन का सदा हिस्सा रहेगा.
प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी रहे हैं लेकिन जब भी कोई ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है तो यह स्वाभाविक है कि सदस्य अपनी पार्टी से ऊपर उठते हैं और उनमें एक सामान्य भावना जागृत होती है. श्री मोदी ने कहा कि यह सदन अपने आप में एक खुला विश्वविद्यालय और राष्ट्रीय जीवन के अनेक महत्वपूर्ण पहलुओं से समृद्ध होने का अवसर देता है.
सेवानिवृत्त हो रहे उपसभापति हरिवंश का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उन्हें पिछले काफी समय से इस सदन में अपना दायित्व निभाने का अवसर मिला है. हरिवंश ने हमेशा सदन की कार्यवाही चलाते समय सभी का विश्वास जीतने का प्रयास किया. प्रधानमंत्री ने इस दौरान वरिष्ठ सदस्यों - एच डी देवेगौडा, मल्लिकार्जुन खरगे और शरद पवार का नाम लेकर उनके अमूल्य योगदान का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि इन सभी नेताओं ने अपना आधे से ज्यादा जीवन संसदीय कामकाज में बिता दिया. उन्होंने कहा कि संसद के नये सदस्यों को इनसे निष्ठा के साथ कैसे सदन में आने का तरीका सीखना चाहिए और जहां तक संभव हो सदन में अपना योगदान देना चाहिए तथा समाज द्वारा दी गई जिम्मेदारियों के प्रति वचनबद्ध रहना चाहिए.
इससे पहले, सदन के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने कहा कि हर दो साल में सदन के एक-तिहाई सदस्यों की सेवानिवृत्ति इसकी संवैधानिक संरचना को दर्शाती है जो अनुभवी सांसदों को संस्थागत स्थिरता संरक्षित करते हुए नये सदस्यों के लिए रास्ता खोलने का अवसर देती है. उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था सदन के कामकाज में निरंतरता सुनिश्चित करती है. साथ ही नये विचारों के साथ संसदीय बहस को समृद्ध करने के लिए नई आवाजों के लिए जगह बनाती है. सभापति ने कहा कि सदस्यों की सेवानिवृत्ति को अंत नहीं बल्कि नई जिम्मेदारियों और सार्वजनिक भूमिका की शुरूआत के रूप में देखा जाना चाहिए.
राज्यसभा से सेवानिवृत्त हो रहे सदस्यों को विदाई देते हेुए सदन में विपक्ष के नेता और कांग्रेस वरिष्ठ नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि राजनीति और सार्वजनिक जीवन में रहने वाले लोग न ही थकते हैं और न ही सेवानिवृत्त होते हैं क्योंकि उनमें देशसेवा का जूनून होता है. श्री खरगे ने कहा कि वे सदन की हर कार्यवाही में भाग लेने की कोशिश करते हैं ताकि अन्य सदस्यों के ज्ञान का लाभ उठा सकें.
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