भारत ने बारिश से प्रभावित वनडे सीरीज के दूसरे मुकाबले में न्यूजीलैंड को 'डकवर्थ लुईस नियम' के आधार पर 4 रन से शिकस्त दी. भारत ने जीत के साथ न सिर्फ सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त बनाई बल्कि उन्होंने कीवी टीम के जख्मों पर नमक भी छिड़का है. शनिवार की हार 2026 में सभी फॉर्मेट में भारत के खिलाफ ब्लैक कैप्स की 11वीं हार रही, जो किसी भी टीम के खिलाफ एक कैलेंडर ईयर में सभी फॉर्मेट में एक ही विरोधी टीम के खिलाफ मिली सबसे ज़्यादा हार है. इससे पहले 2005 में न्यूजीलैंड को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 10 हार का सामना करना पड़ा था.
गुरनूर बराड़ की अगुवाई में बारिश के बाधित इस मुकाबले में टीम इंडिया ने मेजबान टीम को सिर्फ 134 रनों पर ऑल-आउट किया. यह भारत के खिलाफ घर पर वनडे में न्यूजीलैंड का सबसे सो स्कोर है. इससे पहले 1994 में ऑकलैंड में ब्लैक कैप्स 142 रनों पर ऑल-आउट हुई थी. न्यूजीलैंड अब भारत के खिलाफ लगातार वनडे मैचों में 200 से कम रन पर आउट हो गया है. पिछली बार वे जनवरी-फरवरी 2001 में श्रीलंका के ख़िलाफ़ एक सीरीज़ में लगातार दो ODI मैचों में 200 से कम रन पर आउट हुए थे.
गुरनूर बराड़ के सामने बेबस न्यूजीलैंड
बारिश से प्रभावित दूसरे वनडे में मिली जीत में अहम भूमिका निभाने वाले भारत के युवा तेज गेंदबाज गुरनूर बराड़ ने यहां कहा कि न्यूजीलैंड की पिचों पर गेंदबाजी करना उन्हें रास आ रहा है जिस पर उन्हें अतिरिक्त उछाल से काफी मदद मिल रही है.
बराड़ ने चार विकेट लेकर न्यूजीलैंड की पूरी टीम को महज 134 रन पर समेटने में महत्वपूर्ण योगदान दिया. हालांकि इसके बावजूद भारतीय टीम को जीत हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी.अंततः डकवर्थ-लुईस पद्धति के तहत भारत ने जीत दर्ज की और पांच मैच की सीरीज में 2-0 की बढ़त बना ली.
बराड़ ने मैच के बाद कहा,"मुझे यहां गेंदबाजी करने में बहुत मजा आया. न्यूजीलैंड में गेंदबाजी करते समय मिलने वाले उछाल और गति ने मेरी काफी मदद की. इसलिए मुझे यहां गेंदबाजी करना अच्छा लगा."
अपनी गेंदबाजी रणनीति के बारे में बताते हुए इस तेज गेंदबाज ने कहा कि न्यूजीलैंड में मिलने वाले अतिरिक्त उछाल के कारण उन्हें अपनी स्वाभाविक क्षमता के अनुसार गेंदबाजी करने का मौका मिला. उन्हें भारतीय पिच की तरह ‘हार्ड लेंथ' पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं पड़ी क्योंकि भारत में पिचें अपेक्षाकृत सपाट होती हैं.
उन्होंने कहा,"निश्चित रूप से भारत में पिचें काफी सपाट होती हैं इसलिए हमें ‘हार्ड लेंथ' पर गेंदबाजी करनी पड़ती है. लेकिन यहां अतिरिक्त उछाल मिलता है. इसलिए मैंने अपनी ताकत के अनुसार गेंदबाजी की और इसका फायदा भी मिला."
बराड़ ने कहा कि तेज गेंदबाज के लिए आक्रामक होना जरूरी है, लेकिन अपनी सीमाओं को समझना भी उतना ही महत्वपूर्ण है. उन्होंने कहा,"अगर आप 140 या 142 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत गति से गेंदबाजी करने वाले तेज गेंदबाज हैं तो आपको आक्रामक भी होना होगा. लेकिन अपनी सीमाओं को समझना भी जरूरी है. मैं बस इसका आनंद लेता हूं और लगातार गेंदबाजी करता रहता हूं."
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