मौजूदा समय में भारतीय टीम इंग्लैंड दौरे पर है. जहां दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की टी20 इंटरनेशनल सीरीज जारी है. प्रतिष्ठित सीरीज का चौथा मुकाबला आज (नौ जुलाई 2026) ब्रिस्टल में खेला जाएगा. जहां भारतीय टीम की कोशिश रहेगी कि वह इस मुकाबले को जीतकर सीरीज को ड्रॉ करने की संभावनाओं को जीवंत रखे. जारी सीरीज में अब तक कुल तीन मैच खेले गए हैं. पहला मुकाबला बिना किसी परिणाम के बारिश की वजह से धुल गया था, जबकि दूसरे और तीसरे मुकाबले में मेजबान टीम इंग्लैंड जीत हासिल करने में कामयाब रही थी. इससे पहले आयरलैंड दौरे पर भी भारतीय धुरंधरों का हाल बेहाल रहा था. वहां ब्लू टीम को 2-0 से शिकस्त का सामना करना पड़ा था. आयरलैंड के खिलाफ मिली शिकस्त के बाद इंग्लैंड में भी भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन को देखते हुए संजू सैमसन को बलि का बकरा बनाया गया है. टी20 वर्ल्ड कप में शानदार प्रदर्शन के बावजूद पिछले तीन मुकाबलों में उनके खराब प्रदर्शन को देखते हुए प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया है. उनकी जगह पर पिछले दो मुकाबलों में वैभव सूर्यवंशी को प्लेइंग इलेवन में शामिल किया था. मगर यह तरकीब भी कुछ काम नहीं आई और टीम को शिकस्त पर शिकस्त का मुंह देखना पड़ रहा है. ऐसे में एक बार फिर से संजू के नाम पर चर्चा होने लगी है. टी20 वर्ल्ड कप के दौरान संजू ने ऐसे ही मौकों पर सराहनी प्रदर्शन किया था. चौथे यानी की आज खेले जाने वाले करो या मरो मुकाबले से पहले बात करें हम उन तीन मुख्य कारणों के बारे में जिसकी वजह से सैमसन को एक बार फिर से प्लेइंग इलेवन में शामिल किया जाना चाहिए, तो वह कुछ इस प्रकार हैं-
1- टी20 वर्ल्ड कप के दौरान ऐसी ही परिस्थिती में सैमसन ने किया था शानदार प्रदर्शन
टी20 वर्ल्ड कप 2026 के दौरान सैमसन ने ऐसी ही स्थिति का सामना किया था. शुरुआती मुकाबलों में उनका बल्ला कुछ खास नहीं चला था. जिसके बाद उन्हें प्लेइंग इलेवन से बाहर कर दिया गया था. मगर अभिषेक शर्मा के खस्ता हालात को देखते हुए उन्हें फिर से प्लेइंग इलेवन में मौका देना पड़ा. जिसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और भारतीय टीम को तीसरी बार टी20 वर्ल्ड कप का चैंपियन बना दिया. पहले उन्होंने कोलकाता में वेस्टइंडीज के खिलाफ करो या मरो सुपर-8 मुकाबले में 50 गेंदों में नाबाद 97 रनों की पारी खेली. उसके बाद नॉकआउट मैचों में भी शानदार प्रदर्शन किया. जिसके लिए उन्हें 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' के अवॉर्ड से नवाजा गया. 31 वर्षीय सैमसन को बड़े मंच पर खेलने का अच्छा खासा अनुभव है. सबसे महत्वपूर्ण जो बात है कि वह ऐसी ही स्थिति में कुछ महीने पहले खेलते हुए भारतीय टीम को चैंपियन बना चुके हैं. ऐसे में उन्हें एक बार फिर मौका मिलता है तो वह भारतीय टीम की तकदीर बदल सकते हैं.
2- टीम में बाएं हाथ के बहुत हो गए हैं बल्लेबाज
तीसरे टी20 मुकाबले में भारत की तरफ से शीर्ष आठ बल्लेबाजों में से कुल छह बल्लेबाज बाएं हाथ के थे. जिससे विपक्षी टीम को रणनीति बनाने में आसानी हुई थी. टीम इंडिया की तरफ से पिछले मुकाबले में अभिषेक और वैभव ने पारी का आगाज किया था, जबकि ईशान किशन तीसरे, अक्षर पटेल पांचवें, तिलक वर्मा छठे और शिवम दुबे आठवें नंबर पर बल्लेबाजी करने के लिए उतरे थे. इतने सारे बाएं हाथ के बल्लेबाजों की मौजूदगी की वजह से विपक्षी गेंदबाजों को अपनी लाइन और लेंथ में ज्यादा बदलाव नहीं करना पड़ा, क्योंकि वे लगातार बाएं हाथ के बल्लेबाजों को गेंदबाजी कर रहे थे. पिछले मुकाबले में बाएं हाथ के बल्लेबाजों की एकरसता को तोड़ने के लिए कप्तान और कोच को शिवम दुबे से पहले हर्षित राणा को भेजना पड़ा. मगर वह दाव भी काम नहीं आया. ऐसे में आज के मुकाबले में बाएं और दाएं हाथ के संयोजन को बनाए रखने के लिए संजू को प्लेइंग इलेवन में मौका दिया जा सकता है.
3- सैमसन के पास है अतिरिक्त गति और उछाल का सामना करने की क्षमता
पिछले मुकाबले में भारतीय बल्लेबाजी क्रम के पतन का एक मुख्य कारण अतिरिक्त उछाल और गति के सामने बल्लबाजों का फ्लॉप होना भी था. अधिकांश बल्लेबाजों ने अतिरिक्त उछाल और गति के सामने अपने घुटने टेक दिए थे. मगर सैमसन के अंदर तेज गति के गेंदबाजी का सामना करने की क्षमता बखूबी है. वह बैक फुट पर जाकर तेज गेंदबाजों के खिलाफ जिस तरह से शॉट लगाते हैं. वह काबिले तारीफ है.
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