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IND U19 vs ZIM U19: बांह पर काली पट्टी बांधकर क्यों खेल रहे हैं भारतीय खिलाड़ी?

भारत अंडर 19 टीम के खिलाड़ी जिम्बाब्वे अंडर 19 टीम के खिलाफ आज बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा के निधन के शोक में ब्लैक बैंड के साथ उतरे हैं.

IND U19 vs ZIM U19: बांह पर काली पट्टी बांधकर क्यों खेल रहे हैं भारतीय खिलाड़ी?
Vaibhav Sooryavanshi
  • भारतीय अंडर 19 टीम ने आईसीसी अंडर 19 वर्ल्ड कप 2026 में जिम्बाब्वे के खिलाफ मैच में काली पट्टी पहनकर खेला
  • भारतीय खिलाड़ियों ने इंद्रजीत सिंह बिंद्रा के निधन पर शोक व्यक्त करने के लिए काली पट्टी पहनकर सम्मान जताया
  • इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का निधन 25 जनवरी 2026 को 84 वर्ष की आयु में हुआ था
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आईसीसी अंडर 19 वर्ल्ड कप 2026 का 30वां मुकाबला आज (27 जनवरी 2026) भारत अंडर 19 और जिम्बाब्वे अंडर 19 के बीच बुलावायो में खेला जा रहा है. जहां भारतीय खिलाड़ी मैदान में ब्लैक बैंड के साथ उतरे हैं. जिसे देख हर कोई हैरान है. लोग जानना चाहते हैं कि आखिर क्यों भारतीय खिलाड़ी अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर खेल रहे हैं? अगर आप भी इस सवाल का जवाब ढूंढ रहे हैं तो हम आपकी मदद कर देते हैं. बीते 25 जनवरी को भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा का 84 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था. उन्हीं के शोक में युवा रणबांकुरे आज मैदान में अपनी बांह पर काली पट्टी बांधकर खेल रहे हैं. 

जय शाह ने सोशल मीडिया के माध्यम से दी थी निधन की जानकारी 

पूर्व अध्यक्ष इंद्रजीत सिंह बिंद्रा के निधन की जानकारी इंटरनेशनल क्रिकेट काउंसिल के चेयरमैन जय शाह ने सोशल मीडिया के जरिए दी थी. उन्होंने उस दौरान बताया था कि इंद्रजीत सिंह बिंद्रा लंबे समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे. उन्होंने दिल्ली स्थित अपने आवास पर अपने जीवन काल की अंतिम सांस ली.

जय शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर लिखा, 'आई एस बिंद्रा, पूर्व बीसीसीआई अध्यक्ष और भारतीय क्रिकेट प्रशासन के एक दिग्गज के निधन पर गहरी संवेदनाएं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति दे. ओम शांति.'

1993 से 1996 तक बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे बिंद्रा

बिंद्रा 1993 से 1996 तक बीसीसीआई के अध्यक्ष रहे. वह भारतीय क्रिकेट प्रशासन में एक प्रमुख व्यक्ति थे और उन्होंने कई सालों तक पंजाब क्रिकेट एसोसिएशन का नेतृत्व किया. पीसीए के साथ उनका जुड़ाव तीन दशकों से ज्यादा समय (1978 से 2014) तक रहा.

प्रशासनिक भूमिकाओं में रहते हुए, बिंद्रा ने क्षेत्र और उसके बाहर क्रिकेट प्रबंधन और बुनियादी ढांचे में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसके लिए 2015 में उन्हें सम्मानित किया गया और क्रिकेट में उनके योगदान को देखते हुए मोहाली में पीसीए स्टेडियम का नाम बदलकर आईएस बिंद्रा स्टेडियम कर दिया गया. 

एक वरिष्ठ नौकरशाह के रूप में बिंद्रा ने 1990 के दशक में जगमोहन डालमिया के साथ मिलकर विश्व क्रिकेट में भारत की मजबूत स्थिति बनाने में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने टेलीविजन अधिकारों में मौजूद व्यावसायिक अवसरों को पहचाना, जिसके चलते निजी प्रसारकों की एंट्री हुई. इससे क्रिकेट की वित्तीय संरचना पूरी तरह बदल गई और वैश्विक स्तर पर भारत का प्रभाव काफी बढ़ गया.

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, बिंद्रा ने आईसीसी को भारत में बड़े इवेंट्स आयोजित करने के अधिकार दिलाने में अहम भूमिका निभाई. इसके बाद वह आईसीसी अध्यक्ष के मुख्य सलाहकारों में से एक रहे.

प्रशासक के रूप में अपनी भूमिका के अलावा, बिंद्रा भारतीय क्रिकेट प्रशासन पर अपनी बेबाक राय के लिए भी जाने जाते थे. खासतौर पर उन्होंने आईपीएल 2013 के भ्रष्टाचार कांड के मामले में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी पर भी गंभीर सवाल उठाए थे. (आईएएनएस इनपुट के साथ)

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