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This Article is From Jan 22, 2026

क्रिकेट टीम के लिए 'टीम इंडिया' का इस्तेमाल होगा या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने सुना दिया फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने क्रिकेट टीम के लिए 'टीम इंडिया' शब्द का इस्तेमाल रोकने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को फटकार भी लगाई है.

क्रिकेट टीम के लिए 'टीम इंडिया' का इस्तेमाल होगा या नहीं? सुप्रीम कोर्ट ने सुना दिया फैसला
  • सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन क्रिकेट बोर्ड को 'टीम इंडिया' शब्द का इस्तेमाल रोकने की याचिका को खारिज कर दिया है
  • कोर्ट ने याचिकाकर्ता वकील रीपक कंसल को बिना वजह अदालत पर बोझ डालने पर कड़ी फटकार लगाई है
  • सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को गलत बताया और फालतू याचिकाओं को रोकने की बात कही है
नई दिल्ली:

सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया है, जिसमें इंडियन क्रिकेट बोर्ड (BCCI) को 'इंडियन नेशनल क्रिकेट टीम' और 'टीम इंडिया' जैसे शब्दों का इस्तेमाल रोकने का आदेश देने की मांग की गई थी. याचिका में मांग की गई थी कि प्रसार भारती BCCI की टीम को 'टीम' इंडिया के रूप में दिखाती है, जिस पर रोक लगाई जाए. इस याचिका को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को कड़ी फटकार भी लगाई है. अदालत ने फटकार लगाते हुए कहा कि अदालतों पर बेबवजह बोझ न डाला जाए.

ये याचिका वकील रीपक कंसल ने दाखिल की थी. उन्होंने पहले दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, जहां से उनकी याचिका खारिज हो गई थी. दिल्ली हाई कोर्ट के खिलाफ उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. उनकी मांग थी कि BCCI क्रिकेट टीम के लिए 'इंडियन नेशनल क्रिकेट टीम' या 'टीम इंडिया' का इस्तेमाल करना बंद करे. उन्होंने मांग की थी कि प्रसार भारती, जो दूरदर्शन और ऑल इंडिया रेडियो को चलाता है, वह भी 'टीम इंडिया' का इस्तेमाल बंद करे.

हाई कोर्ट से याचिका खारिज होने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने उनकी याचिका को खारिज कर दिया. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के साथ-साथ हाई कोर्ट को भी फटकार लगाई.

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने?

याचिका खारिज करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा, 'आप बस घर बैठकर याचिकाएं लगाना शुरू कर देते हैं. इसमें क्या दिक्कत है? नेशनल स्पोर्ट्स ट्रिब्यूनल के लिए भी एक नोटिफिकेशन है, जिसमें बेहतरीन सदस्य हैं. बिना वजह कोर्ट पर बोझ न डालें.'

वहीं, जस्टिस बागची ने कहा कि 'अगर केंद्र सरकार इस मामले में सामने आती तो कोई मुद्दा बन भी सकता था लेकिन यहां तो BCCI को जबरदस्त सपोर्ट मिल रहा है. मुद्दा यह है कि कभी-कभी पूंछ कुत्ते को हिलाने लगती है, क्योंकि इसमें पैसा शामिल है.'

चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को भी गलत ठहराया. उन्होंने कहा, 'हाई कोर्ट का फैसला गलत था. हाई कोर्ट को भारी जुर्माना लगाना चाहिए था. नहीं तो सुप्रीम कोर्ट में इस तरह की फालतू याचिकाओं को कैसे रोका जाएगा?'

क्या था पूरा मामला?

वकील रीपक कंसल ने अपनी याचिका में दावा किया था कि BCCI टीम के लिए 'टीम इंडिया' शब्द का इस्तेमाल कर रहा है. साथ ही तिरंगे का भी इस्तेमाल करता है. ये कानून के खिलाफ है. 

उन्होंने अपनी याचिका में दावा किया था कि जिस टीम का प्रबंधन BCCI के पास है, उसे प्रसार भारती गलत तरीके से 'टीम इंडिया' के रूप में दिखा रहा है. 

उन्होंने दलील दी थी कि BCCI तमिलनाडु सोसाइटीज रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत रजिस्टर्ड एक प्राइवेट एसोसिएशन है. BCCI कोई शनल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट कोड, 2011 के तहत मान्यता प्राप्त नेशनल स्पोर्ट्स फेडरेशन (NSF) नहीं है. उन्होंने मांग की थी कि BCCI सहित किसी भी निजी संस्था को कानूनी मान्यता के बिना 'टीम इंडिया' के रूप में दिखाने से रोका जाए.

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