पांचवें टी-20 मैच में इंग्रलैंड ने भारत को 56व रन से हराकर सीरीज में 4-0 की जीत दर्ज थी. जब इंग्लैंड ने मैच जीता तो कमेंट्री कर रहे इंग्लैंड के पूर्व कप्तान नासिर हुसैन ने कहा कि" अब इंग्लैंड ने वर्ल्ड चैंपियन को 4-0 से हराकर खुद दुनिया की नंबर टी-20 टीम बन गई है, यह कमाल का परफार्मंस हैं." जब नासिर हुसैन ने ये बातें की तो भारतीय फैन्स का दिल टूट गया, साथ में कमेंट्री कर रहे दिनेश कार्तिक के पास भी अपनी टीम के लिए पॉजिटिव बात करने के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे. दिनेश कार्तिक के जो जज्बात उस समय रहे होंगे, उसे बतौर भारतीय समझा जा सकता है, लेकिन इस सीरीज हार के पीछे सबसे बड़ा विलेन कौन है. इसके लेकर बात करनी बेहद ही जरूरी है.
क्लूलेस नजर आई टीम इंडिया
आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की सीरीज हो या फिर इंग्लैंड के खिलाफ टी-20 सीरीज भारतीय टीम रणनीति के हिसाब से बेहद ही क्लूलेस नजर आई है. भारत को लगातार 6 टी-20 मैच में हार का सामना करना पड़ा है. भारत की हार में टीम के प्लेइंग इलेवन के चुनाव को लेकर काफी गलती सामने आई है. टीम मैनेजमेंट एक मजबूत प्लेइंग 11 उतारने में नाकाम रहा है.
वैभव सूर्यवंशी के साथ नाइंसाफी
15 साल के खिलाड़ी को आयरलैंड के खिलाफ सीरीज में मौका न देना भारतीय थिंक टैंक के लिए एक भारी भूल साबित हुई है. वैभव को आचानक इंग्लैंड में डेब्यू कराया गया, जो 15 साल के एक युवा खिलाड़ी के लिए मुश्किल भरा रहा. इंग्लैंड में खेलना किसी भी एशियाई बल्लेबाज के लिए मुश्किल होता है. टीम में एक से बढ़कर एक विशेषज्ञ मौजूद हैं, उसके बाद भी वैभव को इंग्लैंड में मौका देना क्या एक भारी भूल थी.
संजू को इलेवन में बाहर करना और आखिरी मैच में मौका देना नाइंसाफी
संजू सैमसन जैसे खिलाड़ी के साथ ऐसा व्यवहार करना यकीनन यह दर्शाता है कि भारतीय टीम इंग्लैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में ठोस रणनीति के साथ नहीं उतरी थी. यही कारण था कि आयरलैंड और इंग्लैड के खिलाफ दूसरे मैच में flop होने के बाद उन्हें बाकी के मैचों से बाहर कर दिया गया और आखिरी मैच में इलेवन में शामिल किया गया. जिसने भारत को टी-20 वर्ल्ड कप जीताने में अहम योगदान दिया उस खिलाड़ी को प्लेइंग 11 में बने रहने की सिक्योरिटी न देना खिलाड़ी के लिए उसके आत्मविश्वास के साथ खिलवाड़ करने जैसा है. ऐसी रणनीति को देखकर यकीनन समझा जा सकता है कि टीम इंडिया क्लूलेस थी. आप उस खिलाड़ी से क्या अपेक्षा कर सकते हैं जिसे यह नहीं पता कि उसकी जगह वर्ल्ड कप जीताने के बाद भी टीम में है या नहीं.
प्लेइंग 11 को लेकर ये क्या हो रहा है
अब जब आपने 15 साल के खिलाड़ी को मौका दिया है तो उस युवा खिलाड़ी के साथ भी तालमेल न बैठा पाना भारत की हार का एक अहम कारण था. उस युवा खिलाड़ी की सोच क्या हुई होगी जब उसे यह पता चला होगा कि आप इस मैच में हिस्सा नहीं हैं. 15 साल के युवा के अंदर सिर्फ निगेटिव ख्यालात आए होंगे कि आपकी जगह टीम में उसी कीमत पर है, जब आप परफार्म करोगे. टीम इंडिया मैनेजमेंट यह विश्वास दिलाने में नाकाम है कि खिलाड़ी की जगह प्लेइंग 11 में हैं. एक खिलाड़ी जिसने अपने टैलेंट से खुद को साबित किया है उसपर विश्वास न करना यह एक बचकानी गलती की तरह है.
टीम में जगह को लेकर असुरक्षा
जो उदाहरण सामने आए हैं उसे देखकर उन खबरों को और हवा मिलती है कि टीम में खिलाड़ी अपनी जगह को लेकर असंतुष्ट जिसके कारण टीम के परफ़ॉर्मस पर भी असर पड़ रहा है. सीरीज को 4-0 से हारना एक भारी कलंक की तरह है. टी-20 रैंकिंग पर भी इस हार का असर पड़ा है. अब भारत नंबर 2 की टीम बनकर रह गई है.
कौन है सबसे बड़ा विलेन?
क्या टीम के कोच गौतम गंभीर हैं भारतीय टीम-20 टीम के हार का कारण, टीम का परफॉर्मेंस लगातार गिर रहा है, ऐसा लग रहा है कि टीम कॉम्बिनेशन को लेकर गंभीर की सोच कंफ्यूज है और सही तरीके से खिलाड़ियों का इस्तेमाल नहीं हो रहा है. अब सवाल यही है कि क्या टीम में हुई जल्दबाजी के फेरबदल ने डुबोई टीम इंडिया की लुटिया. अब एक समझदारी वाला मंथन बेहद जरूरी है.
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