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Devdutt Padikkal: 10 किलो वजन घट गया, आंत के संक्रमण से लड़ी जंग, शतकवीर देवदत्त पडिक्कल का संघर्ष जानिए

Devdutt Padikkal's journey of struggle: पडिक्कल के लिए यह एक प्रेरणादायक सफर रहा है, कुछ महीने पहले तक वे भारत के बल्लेबाजोंके विशाल टैलेंट पूल में कहीं खोए हुए थे लेकिन श्रीलंका में लगातार दो शतक लगाकर इस बल्लेबाज ने एक बार फिर अपने टैलेंट का जौहर दिखाया है.

Devdutt Padikkal: 10 किलो वजन घट गया, आंत के संक्रमण से लड़ी जंग, शतकवीर देवदत्त पडिक्कल का संघर्ष जानिए
Inspiring Rise of Devdutt Padikkal

Devdutt Padikkal, IND vs SL: श्रीलंका के खिलाफ दूसरे टेस्ट मैच में भारत की पहली पारी के दौरान देवदत्त पडिक्कल ने अपने टेस्ट करियर का दूसरा शतक ठोका, पडिक्कल का यह शतक उनके संघर्ष की जीत बयां कर रहा है. एक समय ऐसा था जब यह बल्लेबाज भारत के बल्लेबाज़ों के बड़े टैलेंट पूल में कहीं खो से गए थे, उनके लिए टीम इंडिया में आना मुश्किल था. लेकिन किस्मत एक ऐसी चीज होती है जो कभी भी बदल सकती है. ऐसा ही कुछ देवदत्त पडिक्कल के साथ हुआ है. साल 2022 में सेहत से जुड़ी दिक्कतों के कारण पडिक्कल कई महीनों तक अस्पताल आते-जाते रहे. इस दौरान उनका वजन कुछ किलो कम हो गया और उन्हें मैदान पर अपनी लय वापस पाने में संघर्ष करना पड़ा. आईपीएल 2023 में भी उनका प्रदर्शन कुछ खास नहीं रहा, ऐसा लगा कि पडिक्कल का नाम भी कहीं खो जा जाएगा.

आंत संक्रमण से करियर दांव पर था

पडिक्कल का करियर एक सही दिशा में आगे बढ़ रहा था, उन्होंने 2021 में श्रीलंका में भारत के लिए अपना डेब्यू किया. उन्होंने घरेलू क्रिकेट में कामयाबी हासिल की थी और आईपीएल की चकाचौंध भरी लाइमलाइट का भी सामना किया . उनका लंबा इंटरनेशनल करियर तय लग रहा था, फिर उनका शरीर अचानक कमजोर पड़ने लगा, साल 2022 आईपीएल के दौरान उनका पेट खराब रहने लगा, उन्हें लगा कि पेट की खराबी फूड पॉइजनिंग की वजह से है, लेकिन परेशानी बनी रही. वह बार-बार बीमार पड़ते रहे, उन्हें एनर्जी बनाए रखने में मुश्किल हुई और आखिरकार उनका वजन लगभग 10 किलोग्राम कम हो गया. मेडिकल टेस्ट से पता चला कि उन्हें आंतों की गंभीर बीमारी थी. उनके शुरुआती कोच इरफान सैत ने बाद में कहा कि पडिक्कल को 2021 से 2023 की शुरुआत तक फिट और स्वस्थ रहने में काफी संघर्ष करना पड़ता था.

इस बीमारी का असर उनके वजन, मूड और क्रिकेट पर पड़ा,  10 किलोग्राम वजन कम होना सिर्फ एक नंबर लग सकता है. लेकिन 6 फीट 3 इंच लंबे बल्लेबाज के लिए यह सब सहना और समझना मुश्किल था. उनकी ताकत कम हो रही थी.  रिकवरी धीमी हो जाती है, ध्यान बनाए रखना मुश्किल हो जाता है. इसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा और इस वजह से वे घरेलू क्रिकेट के कुछ टूर्नामेंट नहीं खेल पाए. बाद में कड़ी मेहनत के दम पर उन्होंने घरेलू क्रिकेट में शानदार वापसी की और इंडिया A से भारतीय टीम तक का सफर तय किया. 

इससे पहले पहले उन्हें कोविड-19 से भी जूझना पड़ा था. जिससे उनकी तैयारियों को झटका लगा था, लेकिन उन्होंने रिकवर करके जोरदार वापसी की.  

देवदत्त पडिक्कल ने धैर्य बनाए रखा, रणजी ट्रॉफी में मिली सफलता

आईपीएल में मिली असफलता के बाद भी पडिक्कल ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार मेहनत करते रहे, रणजी ट्रॉफी 2026 के में 6 पारियों में कुल 556 रन बनाए हैं, जिसमें उनका औसत 92.66 रहा है. उन्होंने तीन शतक भी लगाए हैं, जिसमें पंजाब के खिलाफ सीजन के पहले मैच में बनाया गया 193 रन का स्कोर उनका सर्वोच्च स्कोर भी रहा था. पडिक्कल ने इसके अलावा चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में तमिलनाडु के खिलाफ 151 रन बनाकर चयनकर्ताओं को प्रभावित किया.  चयन समिति के अध्यक्ष अजीत अगरकर की मौजूदगी में, बाएं हाथ के इस बल्लेबाज ने सीजन का अपना तीसरा रणजी ट्रॉफी शतक जमाकर अपनी वापसी दरवाजा खटखटाया. 

निरंतरता का इनाम मिला 

इससे पहले कर्नाटक के इस बल्लेबाज़ ने अहमदाबाद में इंग्लैंड लायंस के ख़िलाफ इंडिया A के लिए 65, 21 और 105 रन बनाकर भी चयनकर्ताओं को प्रभावित किया था,  31 मैचों में 44.54 के औसत के साथ उनका फर्स्ट-क्लास रिकॉर्ड भी बहुत अच्छा रहा, जिसके कारण उन्हें श्रीलंका के खिलाफ टेस्ट सीरीज के लिए साई सुदर्शन की जगह टीम में शामिल किया गया. अब श्रीलंका में दोनों टेस्ट में दो शतक ठोकर पडिक्कल ने साबित कर दिया है कि मेहनत और विश्वास करने वालों की हार नहीं होती है. 

ज़ुबिन भरूचा की ट्रेनिंग आई काम

पडिक्कल के वापसी के पीछे एक खास ट्रेनिंग प्रोग्राम है, जिसे क्रिकेट की बेहतरीन समझ रखने वाले राजस्थान रॉयल्स के टीम डायरेक्टर ज़ुबिन भरूचा ने तैयार किया था. भरूचा ने ट्रेनिंग को लेकर कहा था, "देवदत्त पहले सिर्फ 15-20 मिनट ही खेला करते थे, यही उनकी सोच थी,  फिर उन्होंने दो-तीन घंटे तक बैटिंग करना और अपने खेल के अलग-अलग पहलुओं पर काम करना शुरू किया. जिसके बाद घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन में फर्क नजर आया"

अब श्रीलंका में रचा इतिहास

अब देवदत्त को नंबर 3 का सही उत्तराधिकारी माना जा रहा है. भारतीय टीम मैनेजमेंट काफी समय से नंबर 3 के लिए एक ऐसे बल्लेबाज की खोज में था जिसके पास सही तकनीक और लंबे समय तक बल्लेबाजी करने का टैलेंट हो, अब देवदत्त ने अपने परफॉर्मेंस से टीम मैनेजमेंट के लिए नंबर 3 बल्लेबाजी क्रम की खोज को लगभग खत्म कर दिया है. इस बाएं हाथ के बल्लेबाज के नाम अब श्रीलंका में 2 मैचों की टेस्ट सीरीज के दौरान मेहमान टीम के लिए नंबर 3 बल्लेबाज के तौर पर सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड दर्ज हो गया है. इससे पहले यह रिकॉर्ड पहले न्यूजीलैंड के पूर्व कप्तान स्टीफन फ्लेमिंग के नाम था, जिन्होंने 307 रन बनाए थे

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Devdutt Babunu Padikkal, India Vs Sri Lanka 2026/27, Cricket
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