इंडियन प्रीमियर लीग (IPL 2026) में चेन्नई सुपर किंग्स का भविष्य क्या होगा, यह शुरुआती चार मैचों से साफ समझा जा सकता है. धोनी की पूर्व टीम का हाल यह है चार मैचों के बाद पांच बार की चैंपियन नौवें नंबर पर अपने सम्मान के लिए जूझ रही है. यह सही है कि अभी तक के सफर में खिलाड़ी उम्मीदों के हिसाब से योगदान नहीं दे सके हैं, लेकिन इनमें भी सबसे ज्यादा निराश कप्तान ऋतुराज गायकवाड़ (Ruturaj Gaidkwad) ने किया है. पांचवें मैच में भी गायकवाड़ सिर्फ 7 रन बनाकर चलते बने. और लगातार पांचवीं नाकामी के बाद गायकवाड़ के ऊपर सवालों का शिकंजा और ज्यादा कस गया है. और इन सवालों का सटीक जवाब ही यह आगे तय करेगा कि चेन्नई आगे की यात्रा कैसे करता है क्योंकि गायकवाड़ पांचवें मुकाबले में बड़ा स्कोर नहीं ही कर सके.
गायकवाड़ की विफलता पड़ी भारी
इस सीजन में गायकवाड़ 'जंग' लगे और आत्मविश्वास से दूर दिख रहे हैं. पांच मैचों में एक बार भी 20 का स्कोर नहीं छू सके हैं. और 12.6 के औसत से इन मैचों में 63 रन और 105 का स्ट्राइक रेट बताने के लिए काफी है कि अगर चेन्नई की टीम का यह हाल है, तो उसमें कप्तान की विफलता एक बड़ा पहलू है. धोनी की अनुपस्थिति और कुछ नए खिलाड़ियों के साथ बदलाव के दौर से गुजर रही सुपर किंग्स के लिए गायकवाड़ को अतिरिक्त जिम्मेदारी लेनी थी, लेकिन अतिरिक्त तो छोड़िए, चेन्नई कप्तान जरूरी जिम्मेदारी भी पूरी नहीं कर पा रहे हैं.
गायकवाड़ की नाकामी का असर देखिए
ऋतुराज की नाकामी का असर आप देख सकते हैं कि चेन्नई को पांचों मैचों में कितनी खराब शुरुआत मिली है. हालांकि, एक-दो मौकों पर सैमसन भी फ्लॉप रहे, लेकिन यहां कप्तान के योगदान की बात कर रहे हैं.
साझेदारी बनाम
14 राजस्थान
14 पंजाब
09 बेंगलुरु
62 दिल्ली
25 केकेआर
तस्वीर कितनी भयावह है, यह आप इससे समझें कि कुल 124 रन 9.28 के औसत से आए हैं. यह रन-रेट लखनऊ (8.32) लखनऊ के बाद इस सीजन में सभी टीमों में दूसरा सबसे कम रन-रेट है
प्रबंधन लेगा यह बड़ा फैसला?
चेन्नई सुपर किंग्स के चाहने वाले और पूर्व क्रिकेटर यह कहने लगे हैं कि टॉप ऑर्डर में युवा आयुष म्हात्रे कप्तान गायकवाड़ से अच्छी फॉर्म में दिख रहे हैं. और उपयोगी रन भी बना रहे हैं. ऐसे में तमाम लोगों का कहना है कि गायकवाड़ को खुद को क्रम में नीचे लाकर सैमसन के साथ म्हात्रे को पारी शुरू करने भेजना चाहिए. निश्चित रूप से ऋतुराज की वर्तमान फॉर्म को देखते हुए यह एक अच्छा विचार है, लेकिन देखने की बात होगी कि प्रबंधन यह फैसला लेता भी है या नहीं..और इससे ऊपर कि यह फैसला कितनी जल्द लेता है क्योंकि समय तो यही कह रहा है कि ऐसा छठे मैच से ही होना चाहिए.
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