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'अलग कमरे में रखा गया...,' क्रिकेटर अभिषेक पोरेल ने बताया जेल में कैसे कटी रातें

जेल से बाहर आने के बाद रणजी ट्रॉफी में शतक लगाने वाले अभिषेक पोरेल ने बताया कि यह उनकी जिंदगी का सबसे मुश्किल दौर था, लेकिन परिवार और टीम के साथ ने उन्हें संभाले रखा.

'अलग कमरे में रखा गया...,' क्रिकेटर अभिषेक पोरेल ने बताया जेल में कैसे कटी रातें
Abhishek Porel
IANS

दिल्ली कैपिटल्स के ऑलराउंडर अभिषेक पोरेल जेल से बाहर आने के बाद घरेलू क्रिकेट में बल्ले से शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं. 12 अक्टूबर को रणजी ट्रॉफी ग्रुप C मैच में शतक जड़कर उन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी थीं. शतक के बाद मैदान पर उनके रोने का वीडियो भी काफी वायरल हुआ था. अब उन्होंने एक इंटरव्यू में अपने जीवन के सबसे मुश्किल दौर पर खुलकर बात की.

स्पोर्ट्स तक को दिए इंटरव्यू में अभिषेक से पूछा गया कि हाल के दिनों में जो कुछ हुआ, वह मानसिक रूप से कितना मुश्किल था. इस पर उन्होंने कहा कि उस दौरान उनके दिमाग में सिर्फ यही चलता रहता था कि वह इस स्थिति से कैसे बाहर निकलें, क्योंकि वहां (जेल) की दुनिया बाहरी दुनिया से बिल्कुल अलग है. उन्होंने बताया कि परिवार ने उन्हें इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने में सबसे बड़ी मदद की.

अभिषेक ने कहा, 'मैं अभी जमानत पर बाहर हूं. दोबारा ड्रेसिंग रूम में जाना और फिर रन बनाना आसान नहीं था. उस समय मेरे मन में यही सवाल था कि मैं इस स्थिति से कैसे बाहर निकलूंगा. मुझे अपने भविष्य को लेकर अनिश्चितता थी कि आगे क्या होगा और जिंदगी कैसी रहेगी.'

अभिषेक ने बताया शतक के बाद क्यों रोए

उन्होंने बताया कि शतक पूरा करने के बाद कई पुरानी बातें एक साथ याद आ गईं, इसलिए वह अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सके. उन्होंने कहा, 'वह सिर्फ शतक लगाने की खुशी नहीं थी, बल्कि उसके पीछे एक पूरी कहानी और गहरी भावनाएं थीं. उस मुश्किल समय में मेरे परिवार, खासकर मां-पिताजी और सौरव सर ने मेरा पूरा साथ दिया.'

बंगाल टीम और साथियों के स्वागत ने किया भावुक

अभिषेक ने कहा कि बंगाल टीम के ड्रेसिंग रूम में उनकी वापसी बेहद भावुक कर देने वाली थी. उन्हें कभी ऐसा महसूस नहीं कराया गया कि वह किसी परेशानी से गुजरकर लौटे हैं. उन्होंने कहा, 'टीम के सभी खिलाड़ियों ने जिस तरह मेरा स्वागत किया, वह दिल छू लेने वाला था.'

अभिषेक ने याद किए संघर्ष के दिन

उन्होंने अपने संघर्ष भरे दिनों को याद करते हुए कहा, 'मेरी मां सुबह 4 या 4:30 बजे उठकर मेरे लिए खाना बनाती थीं और मुझे क्रिकेट खेलने ले जाती थीं. हम ट्रेन से सफर करते थे. जब मैंने शतक लगाया तो वह सब कुछ मेरी आंखों के सामने आ गया. वह 36 दिनों का दौर, परिवार का संघर्ष और क्रिकेट के लिए की गई मेहनत, सब एक साथ याद आ गया.'

अभिषेक ने कहा कि क्रिकेट ही उनके जीवन का सबसे बड़ा लक्ष्य रहा है. 'जिस क्रिकेट की वजह से मुझे पहचान और प्यार मिला, उसी क्रिकेट में वापसी कर मैं सफल रहा और शतक लगाया. यही भावना मेरे आंसुओं की वजह थी.'

जेल के अनुभव पर क्या बोले अभिषेक?

जब अभिषेक से जेल के अनुभव के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, 'मुझे बाकी लोगों से अलग रखा गया था. जहां तक संभव हो सका, मुझे सुविधाएं भी दी गईं. मैं उस मामले पर ज्यादा बात नहीं करना चाहता क्योंकि यह काफी निजी विषय है. हो सकता है कि किसी गलतफहमी की वजह से मुझे वहां जाना पड़ा हो.'

उन्होंने आगे कहा, 'इस अनुभव ने मुझे मानसिक रूप से पहले से ज्यादा मजबूत बनाया. वहां बिताया गया हर दिन और हर मिनट धैर्य की परीक्षा थी. मैंने इसे सकारात्मक तरीके से लिया और इसका फायदा मुझे क्रिकेट में भी मिला.'

जब उनसे पूछा गया कि क्या कभी ऐसा लगा था कि जिंदगी या क्रिकेट करियर खत्म हो गया है, तो उन्होंने कहा, 'मेरा हमेशा से मानना रहा है कि अगर रात है तो सुबह भी होगी. सूरज जरूर निकलेगा. मुझे अपनी क्षमताओं पर भरोसा था और आज भी है. क्रिकेट मेरे लिए सब कुछ है और मैं इसमें लगातार मेहनत करता रहूंगा.'

दिल्ली कैपिटल्स में बने रहने के संकेत

अभिषेक का मामला फिलहाल कोर्ट में विचाराधीन है और वह जमानत पर बाहर हैं. इस बीच उन्होंने संकेत दिए कि वह आगामी सीजन में भी दिल्ली कैपिटल्स के साथ बने रह सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.

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